जीजू ने बनाया रंडी घुसा के अपनी डंडी

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम मानसी Antarvasna है और मैं 26 साल की हूँ, मैं उदयपुर की रहने वाली हूँ. मेरा फिगर 34-28-34 का है. चलो यह सब तो छोड़ो अब आप सब लोग जिसका इन्तजार कर रहे है उस बात पर आती हूँ।

दोस्तों यह बात तब की है जब मेरी बड़ी बहिन गर्भवती थी तो मैं उनके साथ रहने के लिए और उनके काम में हाथ बंटाने के लिये उनके पास दिल्ली गई हुई थी. और अब मेरी परीक्षा आ गई है, तो मैं अब आ गई हूँ वापस आप सभी के लंड लेने के लिए, सॉरी लंड खड़े करने के लिये।

दोस्तों यह कहानी है मेरे और मेरी बहिन के पति के बीच हुई कामलीला की है. वैसे तो मेरी बहिन की शादी को हुए 3 साल हो गये थे और उसका नतीजा अब आया था. दोस्तों मेरी बहिन और उसके पति दिल्ली में एक किराये के फ्लेट में रहते है. और फिर जब मेरी बहिन को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था तो जीजू के खाने की और देखभाल की जिम्मेदारी मुझपर आ गई थी।

और मुझको भी अभी आए हुए 4-5 दिन ही हुए थे कि, मेरे जीजू ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था. वैसे तो वह बहुत रोमांटिक किस्म के है पर कभी-कभी वह मुझको बहुत ज्यादा हवस की नजर से देखते है, और वैसे भी उसने मुझको खुद को जीजू कहने से भी मना कर दिया है, तो अब मैं उनको नाम से ही बुलाती हूँ, हम तीनों एक ही कमरे में सो जाते थे, और मैं उन दोनों के बीच में सोती थी. दीदी का 8 वां महिना चल रहा था, तो वह आसानी से खड़ी होने के लिए वह बेड पर साइड में ही सो जाती थी, और दवा की वजह से चेन की नींद सोती थी। पर जीजू ना तो खुद सोते थे और ना ही मुझको सोने देते थे, पहले तो उन्होनें मेरे बब्स पर सिर्फ़ अपना हाथ ही रखा था, पर मैंने उस बात को नजरअंदाज कर दिया था. और फिर तो वह रोज़ ही रखने लग गए थे. और कभी-कभी तो वह मेरे बब्स को सहलाने भी लग जाते थे. दोस्तों मेरा एक राज़ जीजू को पता चल गया था तो वह मुझे उस बात पर डराते थे. और मैं अबला नारी चुपचाप उनका दमन सहती रहती थी।

और फिर एक दिन रात को मैं बाथरूम जाने के लिए उठी, और फिर मैं जैसे ही बाथरूम से बाहर निकली तो मेरे जीजू मेरे सामने खड़े थे. और फिर उन्होनें मुझको धक्का दिया और फिर वह भी बाथरूम के अन्दर आ गए थे. दोस्तों मैं उस अचानक होने वाले हमले के लिए पहले से ही तैयार थी और मैं मन ही मन सोच भी रही थी कि, अब यह कुछ करेगा मेरे बब्स के साथ, लेकिन अकस्मात! मेरे साथ वह हुआ जो मैंने सोचा भी नहीं था, उसने मेरे बाल पकडकर मुझको मेरे घटनों पर बैठा दिया।

जीजू :- सुन, अब तू ही सोच ले कि, या तो मैं किसी और से चक्कर चलाकर तेरी दीदी को धोखा दूँ, या फिर तू अपनी दीदी की जिम्मेदारी निभाएगी?

और फिर उसने अपना लंड निकालकर मेरे मुहँ में डालकर धक्के देने लगा, आहहह… एम्म्म… और उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी थी. और फिर मैं भी अब उसके बस में थी. और फिर उसने मुझे बाथरूम के एक कौने में दबोचकर मेरे मुहँ को चोदना शुरू कर दिया था, आहहह… उम्म… और मुझको साँस लेने में दिक्कत होने लगी थी कि, तभी उनके लंड राजा ने हार मान ली थी, और उन्होंने अपना पूरा जोश मेरे मुहँ में ही छोड़ दिया था. और शायद दीदी की प्रेग्नेन्सी की वजह से उनको कुछ करने को नहीं मिला होगा। और फिर मैंने उनको एक शरारती सी मुस्कान दी तो जीजू फिर से जोश में आ गए थे. और फिर उन्होंने मुझको दीवार के सहारे खड़ा किया और फिर वह मेरी गांड पर धक्के देने लग गए थे कपड़ों के ऊपर से ही आहहह… उम्म्म… और फिर अचानक से कुछ आवाज़ आई तो जीजू जल्दी से बाथरूम से चले गए थे. और फिर मैं भी अपने कपड़े ठीक करके सोने आ गई थी, और फिर मेरे बेड पर आते ही दूसरे ही मिनट में मेरी ब्रा में उनका हाथ आ गया था।

इस बार सहलाने की जगह वह मेरे बब्स को दबोचने लग गए थे. और फिर उन्होनें मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया था. और फिर तो थोड़े दिन तक ऐसे ही रोज़ मैं उनका लंड चूसने लगी थी, और चूसना ही पड़ता था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, उसका हाथ मेरे बब्स पर या चूत पर और मेरा हाथ उसके लंड पर, अब तो हम रोज ही ऐसे ही सोने लग गए थे. और फिर 15 दिन के बाद दीदी को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, फिर तो जीजू को मुझको चोदने का खुला लाइसेन्स मिल गया था। मैं दिन भर अपनी पढ़ाई करती, या फिर हॉस्पिटल में दीदी के साथ रहती थी. और जैसे ही जीजू घर पर आते थे तो वह मुझको परेशान करते थे, और कहते थे कि…

जीजू :– आ कुत्तिया, मेरा लंड तुम्हारा इन्तजार कर रहा है, आजा और शुरू हो जा, नहीं तो मैं किसी और के पास चला जाऊँगा।

मैं :– अभी आई जीजू।

जीजू :– मुझको जीजू मत बुला साली रांड़, मैं तो तुम्हारा आधा घरवाला हूँ।

मैं :– ठीक है मेरे पतिदेव।

जीजू :– जान, आज खाने में क्या है?

मैं :– क्या चाहिए आपको?

जीजू :– मुझे तू चाहिए, छीनाल, मैं कब से तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ।

और फिर उसने मुझे एक पैकेट दिया और कहा कि, यह पहनकर सोने आ जाना बेडरूम में।

मैं :– लेकिन यह तो खाली पैकेट है।

जीजू :– हाँ तो इसका मतलब कुछ मत पहनकर आना, और वैसे भी हमारी नई-नई शादी हुई है, और अभी तो हमने हमारी सुहगरात भी नहीं मनाई है।

मैं :– लेकिन अगर दीदी को पता चला तो?

और फिर जीजू ने मुझे कस के एक थप्पड़ मारा और कहा कि, तू उसको बताएगी क्या साली? पालतू कुत्तिया है तू मेरी, जो मैं कहूँ वही कर, बस।

उस समय मैं थोड़ी डर सी गई थी, पर फिर भी बहुत दिनों के बाद मुझको चुदवाने का मौका मिल रहा था और मैं भी उसको ऐसे ही थोड़े जाने दे सकती थी. और फिर मैं बेडरूम में पूरी नंगी होकर उसके पास सोने चली गई थी. और फिर जीजू भी टी.वी. बन्द करके आ गए थे, और फिर आते ही वह मुझपर टूट पड़ा था, और वह मेरे बब्स को काटने लगा था।

जीजू :– साली क्या माल है तू, मेरी शादी के वक़्त तू सामने क्यों नहीं आई, तेरी बहन से शादी करके मैं तो फँस गया हूँ, उसकी जगह तू होती तो जिन्दगी ही रंगीन हो जाती।

मैं :– सॉरी जीजू, अब आ गई हूँ ना।

जीजू :– फिर से बोल जीजू, मैं तेरा पति हूँ. जीजू जीजू मत कर भोसडी की।

और फिर उसने मेरे बाल खीँचकर एक चांटा मारा।

मैं :– सॉरी, मुझको माफ़ कर दो।

और फिर से एक थप्पड़ मारा.

मैं :– साले अपनी बीवी पर हाथ उठाता है, चुपचाप लंड डाल वरना छूने तक नहीं दूँगी।

और फिर जीजू ने अपनी पूरी ताक़त से एक ही धक्के में अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया, आहहह… इतना मोटा.

जीजू :– (थप्पड़ मार के) अब बोल रंडी, अब तो रोज़ यही होगा तेरा हाल. रंडी साली, ऑफिस में मेरे प्रमोशन की बात चल रही है, अगर मिल गया ना तो गोआ में हमारा हनीमून होगा, रंडी साली, लंड लेने के अलावा भी कुछ करती है क्या?

मैं :– हाँ, आप जो कहोगे मैं वह सब करूँगी।

जीजू :– यह हुई ना बात, इसे ही पतिव्रता नारी कहते है, जो पति के हर इशारे पर नाचनी चाहिए।

मैं :- आहहह… उहहह… आमम्म मर गइइ रेरेरे….

जीजू – बोल, अब तो रोज़ चुदेगी ना रंडी? तब ही मैं अभी तेरी गर्मी शांत करूँगा।

मैं :– हाँ पतिदेव, अब मैं तुम्हारी पत्नी बनने को भी तैयार हूँ, अब आप जो कहो, पर अभी तुम मेरी इस चूत को फाड़ दो, कसम से, मुझको तो पता नहीं क्या हो रहा है।

जीजू :– तो फिर यह ले, छीनाल, रंडी कहीं की, ले पूरा लंड ले, अपनी चूत की गुफा में, तेरे जैसी बीवी हो तो रंडी का क्या काम, आहहह… यह ले और ले।

मैं :– आहहह… उहहह… माआअ…..

और मेरा जीजू मेरी चूत में धना-धन लंड पेलता जा रहा था और इसी के साथ मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया था। और थोड़ी देर बाद के बाद जीजू ने भी अपना पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया। और मेरे ऊपर निढाल होकर पड़ा रहा।

और फिर तो पूरे 1 महीने तक रोज़ ही यही सब होने लगा था, रोज़ की चुदाई से मेरी चूत में भी सूजन होने लग गई थी. जीजू रोज़ ही अलग-अलग तरीके से मुझको चोदने लग गए थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!