विधवा भाभी ने दिया सेक्स का गुरुमंत्र

हाय फ्रेंड्स, मैं Antarvasna रजनीश एकबार फिर से आप सभी के सामने हाज़िर हूँ अपनी एक और नई कहानी के साथ. दोस्तों कोई भी शादीशुदा जोड़ा जब भी बच्चों के बारे में सोचता है, तो वह कोशिश करता है कि, दो बच्चों के बीच में कुछ सालों का अन्तर हो जाए, ताकि वो उन बच्चों को अच्छी परवरिश दे सके और उनको संभालने का मौका भी मिल जाए, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है, जो बिस्तर में अपनी हवस की हवा में बहते हुए, किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं लेते है और उनको अनचाहे बच्चे को जन्म देना ही पड़ जाता है. और उन सभी अनचाही औलादों में से मैं भी एक हूँ. दोस्तों, मेरा नाम रजनीश है और मैं भी इस वेबसाइट पर आप सबकी कहानियों से प्रेरित होकर अपनी कहानी लिख रहा हूँ. दोस्तों अब तो मैं 36 साल का सेक्सी पुरुष हूँ, लेकिन दोस्तों यह बात उस समय की है, जब मैं 22 साल का था और मेरी शादी होने वाली थी. गाँव में तो शादी जल्दी ही हो जाती है, क्यूकी कमाई का ज़रिया खेती ही होता है, और जिसके पास खेती ज़्यादा होती थी, उसको उतनी ही अच्छी लड़की मिलती है।

दोस्तों, उस समय मैं अपने घर में एक अकेला ही मर्द रह गया था और घर में सिर्फ़ मेरी भाभी और उनके दो बच्चे ही थे. मेरे माँ-बाप और मेरे बड़े भाई की मौत कुछ समय पहले एक सड़क हादसे में हो गई थी. और फिर सारे रिश्तेदारों ने मेरी भाभी को बोला कि, अब इसकी भी शादी कर दो. दोस्तों मेरी भाभी और मेरे बीच में करीब 7-8 साल का अन्तर था, तो वह मुझसे शादी नहीं कर सकती थी, और मेरे साथ भी वही हुआ जो अमुमन इस तरह की परिस्थिति में होता है। मेरी शादी की बात हो गई थी और फिर एक बार घर में एक रात को मैं और भाभी ही थे और बच्चे सो चुके थे. और मैं भी अपने कमरे में सो रहा था. और फिर भाभी दूध लेकर आई और फिर वह मेरे पलंग पर आकर बैठ गई थी और फिर वह मुझसे बात करने लगी, और भाभी को पता था कि, मैं बहुत ही सीधा हूँ और मुझे शायद सेक्स के बारे में कुछ भी पता नहीं होगा।

भाभी :– देवर जी, खुश हो ना? बीवी के आने के बाद हमको ना भूल जाना।

मैं -: भाभी, आप यह क्या बात कर रही हो, और ऐसा भी कभी हो सकता है क्या?

भाभी –: हाँ, सब यही बोलते तो है, लेकिन बीवी के हुस्न के आगे, किसी का भी बस नहीं चलता है।

मैं :- अच्छा जी।

भाभी –: हाँ, और नहीं तो क्या, तुमसे एक बात पूछूँ… शादी के बाद के बारे में तुम्हारे दोस्तों ने तुमको कुछ बताया या अभी तक कोरे ही हो?

मैं –: भाभी क्या मतलब?

और फिर भाभी सब कुछ समझ गई थी कि, मुझको कुछ भी नहीं मालूम है. और फिर, भाभी ने मुझे दूध पीने को कहा और ग्लास लेकर वापस चली गई थी. और फिर कुछ मिनटों के बाद भाभी वापस आ गई, तो उन्होनें उस समय एक मस्त सा दिखने वाला जालीदार गाऊन पहना हुआ था और उसमें से मैं उनके गोरे और गरम बदन को देख सकता था और उसमें से दिखती हुई उनकी काले रंग की ब्रा और पैन्टी को भी।

और फिर मैं चौंककर भाभी, यह सब क्या है?

भाभी –: आज मैं तुम्हरी टीचर हूँ… और जो तुमको तुम्हारे भैया या दोस्तों को सिखाना चाहिए था, वह आज मैं तुमको सिखाऊँगी और इस बहाने से मेरी भी तड़प को तुम्हारा कुछ तो सहारा मिल जाएगा।

और फिर भाभी मेरे कमरे का दरवाजा बन्द करके मेरे पास आ गई थी, और फिर वह मेरे पास बैठ गई थी और फिर वह मुझसे बिल्कुल चिपक गई थी. और उनके अहसास से मेरी साँसें तेज हो गई थी. और फिर मेरी साँसे बहुत तेज चलने लगी थी और मेरा दिल भी बड़े जोरों से धड़क रहा था और मैं उसकी आवाज़ सुन सकता था. दोस्तों मेरा ही नहीं, मेरी भाभी का भी यही हाल था. और फिर उन्होनें अपने दिल की धड़कन को मुझको महसूस करवाने के लिए मेरे हाथ को अपने दिल पर, (अपने बब्स पर) रख दिया था। दोस्तों उनके बदन की तपिश को महसूस करके मैंने अपना हाथ उनके बब्स पर से हटा लिया था, तो फिर भाभी ने अपना गाऊन भी खोल दिया था, और फिर उन्होंने अपनी ब्रा-पैन्टी भी उतार दी थी. और फिर भाभी का नंगा बदन देखते ही, मेरे लौड़े की शराफ़त छू-मंतर हो गई थी और मेरे पजामे में तंबू तन गया था. और फिर भाभी को यह देखकर हँसी आ गई थी. और फिर उन्होनें मेरे पजामे का नाडा खोल दिया था और उन्होनें मुझको भी नंगा कर दिया था. और फिर वह मेरे लौड़े को पकड़कर मेरी छाती को चूमने लग गई थी. और फिर वह अपने हर चुंबन के साथ गरम आहें भर रही थी, आहहह… इस्सस…

और फिर तो मेरा बदन भी गरम होने लग गया था. और मुझे मेरे लंड के अन्दर एक अजीब सी झुरझुराहट सी हो रही थी, और बदन के अन्दर मानो कोई बिजली सी दौड़ रही थी. और फिर भाभी से भी अब रुका नहीं गया और उसने अपने टांगें मेरे दोनों तरफ़ डाल दी थी, और फिर वह मेरे ऊपर बैठ गई थी, और मेरी पीठ पलंग के किनारे से लगी हुई थी. वह मेरे लंड पर बैठी और मेरा लंड उसकी गांड के छेद पर टक्कर मार रहा था. और फिर उसने मेरे चेहरे को पकड़ा और फिर उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए थे. दोस्तों बहुत गरम थे उनके होंठ और वह मेरे होठों को चूमती जा रही थी और चूस भी रही थी. और फिर मुझको अपने लंड से कुछ-कुछ निकलता हुआ सा महसूस हो रहा था. और फिर भाभी थोड़ी सी ऊपर उठी और उन्होनें अपने हाथ से मेरे लंड को सीधा किया और फिर वह उसको अपनी चूत पर घिसने लग गई थी. दोस्तों वह बहुत ही गरम और मादक सा अहसास था और मेरे मुहँ में से आहहह… ऊहहह… ह्म्‍म्म्मम… जैसी आवाजें निकल रही थी।

और फिर भाभी ने मेरे लंड को सीधा करके अपनी चूत के दरवाजे पर रखा और धम्म्म् से नीचे बैठ गई थी. और फिर मेरे लंड को उनकी चूत ने पूरा का पूरा निगल लिया था. मेरा लंड उनकी चूत में फंसा हुआ था, और मैं चिल्ला रहा था, आहहह… और भाभी भी आहहह… इस्सस… करती हुई अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर घुमा रही थी. और फिर धीरे से उसने अपनी गांड को ऊपर किया तो मेरा लंड जो भाभी की चूत के साथ चिपका हुआ था उससे मुझको ऐसा लगा कि, मेरे लंड की पूरी की पूरी खाल खिंचकर बाहर आ जाएगी. और फिर भाभी ने एक ही बार में मेरा लंड अपनी चूत से पूरा बाहर निकाल लिया था. और फिर मैंने झुककर देखा तो, मेरे लंड के टोपे की पूरी खाल उतर चुकी थी और उसमें से कुछ गीला-गीला निकल रहा था, और थोड़ा-थोड़ा सा खून भी निकल रहा था. और फिर भाभी ने मेरे लंड पर थूंका और उसको पूरा चिकना किया और फिर उन्होंने अपनी चूत को अपने थूँक से पूरा मसल दिया था और फिर उन्होनें फिर से मेरे लंड को अपनी चूत के दरवाजे पर लगा दिया और वह फिर से बैठ गई थी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

अब भाभी की चूत मेरे लंड को सेट कर चुकी थी और फिर धीरे-धीरे भाभी ने अपनी चूत को उठाना शुरू किया ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे भाभी मेरे घुटनों को पकड़कर उछल रही थी. और फिर मुझे लगा कि, मेरे लंड से कुछ बहुत तेज बाहर आने वाला है. और फिर जब मैंने भाभी को यह बताया, तो भाभी मुझसे बोली कि, कोई बात नहीं और फिर उसने अपने झटके और भी तेज कर दिए थे और फिर वह एक ज़ोरदार झटका देने के बाद नीचे धम्म्म्म से बैठ गई थी. और फिर मुझे मेरे लंड से किसी बंदूक की गोली की तरह तेज और बहुत गरम धार बाहर आती हुई महसूस हुई और फिर मेरे मुहँ से बहुत गरम तेज आहें निकलने लगी थी, आहहह… इस्सस… और फिर मेरी पूरी धार भाभी की चूत में गिर गई थी. और फिर मेरा वह माल चूत से बाहर आकर मेरे और भाभी के शरीर पर फेल रहा था. और फिर हम दोनों ही नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए थे। और तो और यह चुदाई का काम अब हर रोज ही चलने लगा था और भाभी भी मुझसे चुदकर बहुत खुश थी।

हाँ तो दोस्तों यह था मेरा पहला सेक्स अनुभव जो मेरी भाभी ने मुझे मेरी शादी से पहले सिखाया था, और उसके लिए मैंने भाभी को उनकी चूत पर किस करके धन्यवाद भी दिया था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!