भाभी की सहेली की चूत की पहेली

हैल्लो दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम हरीश है और मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। मैं आज आप सभी कामलीला डॉट कॉम के पढ़ने वालों के साथ मेरा एक सच्चा सेक्स अनुभव और मेरी पहली चुदाई के वो कुछ पल बाँटना चाहता हूँ जिसको मैं बहुत समय से आप तक पहुँचाने के बारे में सोच रहा था। फिर एक दिन मुझे मेरे दोस्त ने मुझे कामलीला डॉट कॉम के बारे में बताया जिसकी बहुत सारी सेक्सी कहानियों को पढ़कर मुझे बहुत मज़ा आया और मुझे बहुत ख़ुशी हुई और आज मैं अपनी भी उस चुदाई की कहानी को लिखकर भेज रहा हूँ और मैं उम्मीद करता हूँ कि यह सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी और अब मैं अपना परिचय देकर कहानी को शुरू करता हूँ।

हमारे घर में मैं मेरे भैया और भाभी रहते है और मेरी भाभी मुझसे करीब 3 साल छोटी है, भैया और भाभी की शादी को करीब 6 साल हो गये हैं. और मेरे लिए भाभी माँ के समान हैं, जबकि, हम दोनों की खूब जमती है। काफ़ी समय पहले की बात है कि, एक बार भाभी की एक दोस्त निकिता घर पर आई, मैं उस समय मैं ऑफीस में काम करता था. और वह किसी दूसरे शहर से 3-4 दिन के लिए हमारे घर पर किसी काम से आई हुई थी।

शाम को जब मैं घर आया, और घन्टी बजाई तो, भाभी की उस फ्रेंड निकिता ने दरवाजा खोला, उसे देखकर मैं दंग रह गया. वो देखने में बहुत ही गोरी, सुंदर और सेक्सी थी. मेरे अन्दर घुसते ही, मैंने उससे पूछा कि, आप कौन? तभी मेरी भाभी अन्दर से बाहर आ गयी, और बोली कि, यह उसकी दोस्त है, और उन दोनों ने एक साथ पढ़ाई करी थी। शाम करीब 8:30 बजे खाने की टेबल पर सब, जैसे- भैया, भाभी, मैं और निकिता बैठे बातें कर रहे थे. खाना ख़त्म करके हमने आइसक्रीम खाई, और समय कब बीत गया और 10:30 बज गये. भैया और भाभी दोनों थके हुए थे और दूसरी बात यह कि, भाभी को सुबह जल्दी उठना भी था, तो वह दोनों तो सोने चले गये थे। अब मैं और निकिता, दोनों बैठे बातें करने लगे, एक दूसरे के बारे में पूछने लगे. और फिर रात के कब 12 बजे हमें पता ही नहीं लगा, लेकिन हम दोनों को एक दूसरे से बात करना बहुत अच्छा लगा था. और फिर हम दोनों अब अपने-अपने कमरे में सोने चले गये थे. लेकिन मैं सो नहीं सका, और फिर भी सुबह उठा तो मैं क्या देखता हूँ कि, निकिता मुझसे पहले उठ कर नाश्ता बना रही थी. और फिर हम लोगों ने नाश्ता किया और अपने-अपने ऑफीस चले गये. लेकिन मुझको रह-रहकर निकिता का वह मासूम, सेक्सी, और आकर्षक चेहरा याद आ रहा था. और फिर शाम को मेरे वापस आने पर निकिता का दरवाजा खोलना मुझे बहुत अच्छा लगा था. शायद भैया आज जल्दी आ चुके थे, और भैया भाभी को कहीं जाना था, तो निकिता से यह कहकर गए थे कि, वह दोनों रात को देर से आएगें. दोस्तों भाभी की दोस्त ने उस दिन वह कपड़े पहने हुए थे, जिसने मेरे मन को उसकी तरफ आकर्षित कर दिया था. वह गुलाबी टॉप और पीली शॉर्ट स्कर्ट में घर पर थी।

अब मैं और निकिता घर में अकेले ही थे. और फिर मैं अपने आप को फ्रेश करके, बैठक में बैठकर टीवी देखने लग गया था, तो फिर मैं क्या देखता हूँ कि, निकिता मेरे लिए ठण्डा शरबत बनाकर ले आई थी और बड़े ही प्यार से उसने मुझसे कहा कि, “यह आप के लिए है” तो फिर मैंने उसको थैंक्स कहा और फिर से टीवी देखने लगा. उसे थोड़ा अजीब लगा कि, मैंने उसे कोई भाव नहीं दिया है. तो फिर वह मेरे करीब आकर बैठ गई थी, और फिर वह बोली कि, मैं उसे कैसी लगती हूँ? तो फिर मैंने उसको जवाब दिया कि, बहुत सुंदर, तो फिर वह अपनी तारीफ़ सुनकर जैसे शरमा सी गई थी. और फिर मेरे पूछने पर कि, आज उसने इस तरह के कपड़े क्यूँ पहने हैं? तो उसने कहा कि, तुमको आकर्षित करने के लिए. तो फिर यह सुनते ही मेरे तो मानो होश ही उड़ गये थे। और फिर मैंने निकिता को डांट दिया, तो वह मुस्कुराकर दूसरे कमरे में चली गई थी और फिर थोड़ी देर के बाद वह वापस आई तो मैं क्या देखता हूँ कि, वह एक जीन्स के ऊपर टॉप पहने हुए मेरे सामने आ गई थी. मुझे अब वह अच्छी लग रही थी. लेकिन उसके गहरे गले वाले टॉप को देखकर मैं उसकी आँखों में आँखें डालकर देखने लगा, और फिर मुझको तो ऐसा लगा कि, जैसे भाभी की दोस्त निकिता आज किसी और ही मूड में थी. और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा, और उसके करीब गया, और उसको उसकी कमर से कसके पकड़कर गले लगा लिया था. तो उसकी साँसे बढ़ने लगी थी, और मेरा भी वही हाल था. और फिर मेरे पूछने पर कि, वो यह सब क्यूँ कर रही है? तो उसने कहा कि, मैं उसको बहुत अच्छा लगता हूँ. और फिर इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए थे और फिर अब हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग गए थे. उसके बदन की खुश्बू मुझे और रिझा रही थी, मेरा एक हाथ अब उसके कपड़ों के अन्दर चलने लगा था. और उसने भी मेरी शर्ट को ऊपर कर दिया था. और अब मेरे बदन पर भी उसके हाथ चलने लग गए थे।

और फिर मैंने उसे अपने दोनों हाथों में उठाया और फिर उसको मैं अपने कमरे में ले आया था, और अपने बिस्तर पर सुला दिया था और फिर धीरे-धीरे मैं उसके कपड़े उतारने लगा. उसका फिगर देखकर मैं तो पागल हो गया था, उसका गोरा चिकना बदन, जिसपर कोई बाल नहीं थे, उठे हुए बब्स, उनका साइज़ और आकार देखकर, अच्छे से अच्छा इंसान भी पागल हो जाए. और फिर मैंने अब उसके बब्स को किस करना शुरू किया तो वह एकदम से तिलमिला गई थी और उसकी सिसकियाँ मुझे पागल बना रही थी, मेरे हाथ उसके पूरे शरीर पर दौड़ रहे थे. उसका अपने एक हाथ को, मेरे सिर पर फेरना, और दूसरे हाथ से मेरे गाल पर हल्का सा फेरना मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. और फिर मैंने उसे 15-20 मिनट तक किस किया, तो वह तो जैसे पागल सी हो चुकी हो, और फिर उससे रहा नहीं जा रहा था तो, उसने एक पलटी खाई, और अब वह मेरे ऊपर आ गई थी. और फिर उसने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया था. हम दोनों अब इतने गर्म हो चुके थे कि, बस हम दोनों के बीच एक आख़री पड़ाव रह गया था. जिसको हम दोनों पार करना चाहते थे. अब हम दोनों अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहे थे, और आखिर में मुझे उसमें समाना ही पड़ा. और फिर हम दोनों करीब 5-10 मिनट तक एक दूसरे में समाए हुए, एक दूसरे से चिपके हुए और 2 बदन एक जान का आनंद ले रहे थे. और जब पहली बार वह झड़ी तो उसने मुझे कसके अपने गले से लगा लिया था. और फिर अब वह मुझसे बोली कि, अब तुम्हारी बारी है. और फिर मैं भी यही चाहता था कि, और अगले 10-15 मिनट में मैं भी उसकी चूत की गर्मी के आगे नहीं टिक पाया, और मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया था।

हम दोनों का हमारा यह पहला सेक्स अनुभव हम दोनों को बहुत अच्छा लगा था. और फिर 3-4 दिन के बाद वह अपने घर दूसरे शहर चली गई थी. और फिर उसके 6 महीने के बाद मुझको पता चला कि, उसकी शादी हो चुकी थी।

हाँ तो दोस्तों यह था मेरा पहला यादगार सेक्स अनुभव।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!