भाभी चुद गई झूमकर, और मैंने मारी घूमकर

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम Aantarvsna अखिल है मेरी उम्र 26 साल की है. और मैं मुरादाबाद का रहने वाला हूँ. और मैं आप लोगों के लिए मेरे साथ घटी एक सेक्सी घटना को एक कहानी के रूप में लेकर हाजिर हुआ और मैं आप लोगों को बता दूँ कि, यह एक सच्ची घटना है. दोस्तों यह कहानी मेरे गाँव में रहने वाली मेरी एक चचेरी भाभी के बारे में है. अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

हाँ तो दोस्तों मैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता हूँ। एक बार मैं अपने गाँव में गर्मियों की छुट्टियों में गया हुआ था. वहाँ पर हमारे घर में मेरे 2 चचेरे भाई और दोनों भाभियाँ रहते है। जब मैं गाँव में पहुँचा तो घर पर जाकर सबसे पहले तो मैंने खाना पीना खाया और फिर दिनभर अपनी प्यारी भाभियों से बातों में लगा रहा और फिर शाम को गाँव में घूमने निकल गया था. दोस्तों मैं रास्ते में जाते समय अपनी चचेरी भाभी के बारे में सोच रहा था उनका पिछवाड़ा मेरी आँखों में घूम रहा था. और फिर मैं घूम फिरकर घर आया और फिर हम सब ने मिलकर रात का खाना खाया और फिर मैं सोने के लिए आँगन में बिछाई गई खाट पर आ गया था. एक खाट पर तो छोटी भाभी और उनका बेटा और एक पर बड़ी भाभी और एक पर मैं लेट गया था. दोस्तों गाँव में सभी जल्दी सो जाते है लेकिन मुझे शहर की आदत थी तो मैं लेटा-लेटा ही जाग रहा था. छोटे भैया बाहर सोए हुए थे और बड़े भैया खलिहान में सोने चले गए थे।

और मैं लेटा-लेटा भाभी के बारे में सोचते-सोचते अपने लंड से खेल रहा था. उजली रात में सब कुछ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था. मैंने बीच में लेटी हुई छोटी भाभी को ही देखना चाहा लेकिन वह तो एक पतली सी चादर ओढ़कर सो रही थी. और फिर मैं भी मायूस होकर दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गया था और जिस तरफ मेरा चेहरा था उसी तरफ एक कामचलाऊँ बाथरूम था जिसको पत्थर की 2 बड़ी पट्टियाँ रखकर बनाया गया था जिसकी कोई छत नहीं थी. मैं लेटा हुआ जाग रहा था. और फिर मैंने मेरे मोबाईल में टाइम देखा तो रात के 11:40 हो रहे थे और फिर मैंने अपने मोबाईल को अपने तकिये के नीचे रखा और फिर मैं आराम से लेटा था कि, तभी मुझको कुछ आवाज़ सुनाई दी जो कि, चूड़ियों के खनकने की थी. और फिर मैंने महसूस किया कि, कोई मेरी तरफ आ रहा है और मैंने अपनी आँखें थोड़ी अधखुली सी रखी और तभी मैंने देखा कि, मेरी बड़ी भाभी मेरे सामने आई और उन्होनें मेरी तरफ मुड़कर देखा और फिर मुझको सोता हुआ देखकर वह इतमीनान से आगे चली गई और फिर वह मुझसे करीब 6-7 फीट की दूरी पर बाथरूम में जाकर खड़ी हुई और फिर उन्होंने अपनी साड़ी ऊपर करी तो मुझको उनकी जाँघें जो केले के तने की तरह चिकनी थी वह दिख गई थी और फिर वह बैठकर पैशाब करने लग गई थी. और फिर जब वह ऊपर को उठी तो उस चाँदनी रात में उनका पूरा पिछवाड़ा एक पल के लिए मेरी आँखों के सामने चमक गया था. और फिर वह आराम से वहाँ से चली गई थी. और फिर मैं तो अपना लंड पकड़कर रह गया था।

मेरी तो नींद ही गायब हो गई थी और मेरे दिमाग में तो भाभी ही भाभी छा गई थी. और मैं वैसे ही लेटा हुआ जागता रहा और मैंने बहुत देर तक सोने की कोशिश करी लेकिन मुझको नींद नहीं आई. और फिर मैंने फिर से अपना मोबाईल देखा तो 2:15 बज रहे थे और फिर मैं सोने ही वाला था कि, तभी मुझे फिर से वही आहट सुनाई दी तो मैंने सोचा कि, भाभी ही होगी? और फिर हुआ भी वही वह भाभी ही थी. वह फिर से आई और उसी तरह से पैशाब करने बैठ गई थी और उनके पैशाब करने से निकलने वाली सीटी की आवाज़ मुझे बहुत बेचैन कर रही थी. और फिर मैंने अपना आप खोया और चुपके से उठा और उनके पीछे से जाकर नीचे बैठी हुई भाभी को अपनी बाहों में भर लिया था. और मेरे उस अचानक से हुए हमले से वह हड़बड़ाकर उठने को हुई और कहने लगी कि, कौन है? और फिर वह मुझको देखकर बोली कि, अखिल तुम? तो मैंने उनसे कहा कि, हाँ भाभी. तो वह मुझसे बोली कि, दूर हटो, और यह तुम क्या कर रहे हो? और फिर मैंने उनका हाथ पकड़ा और फिर मैं उनको दूसरी तरफ बने कमरे में जहाँ पर घांस फूस रखा था उस कच्चे कमरे की तरफ ले जाने लगा वह मुझसे कहती रही कि, मुझको तुम कहाँ ले जा रहे हो, बताओ तो क्या है? और फिर मैंने उनको उस कच्चे कमरे में ले जाकर खड़ा कर दिया था. और फिर उनकी कमर के दोनों तरफ से हाथ ले जाकर दीवार के सहारे टिका दिए थे और वह उस समय बीच में ही थी. और फिर मैंने उनसे कहा कि, भाभी तुम मुझको अच्छी लगती हो तुम बहुत सुंदर हो जबकि हक़ीकत में उनका फिगर जबरदस्त था पर वह ज़्यादा खूबसूरत नहीं थी. और फिर मैंने उनसे कहा कि, भाभी आपको देखकर मैं बहुत बेचैन हो रहा हूँ भाभी प्लीज़ आओ मेरे साथ सो जाओ भाभी मेरी अच्छी भाभी. तो फिर वह भी मुझसे बोली कि, अरे! तो इसमें क्या बड़ी बात है, चलो लो अभी सो जाती हूँ, लेकिन फिर तुम कुछ ऐसा वैसा मत करने लग जाना. और फिर वह जाने को हुई तो मैंने उनका हाथ पकड़कर खीँच लिया और फिर उनको अपने सीने से चिपकाकर दबा लिया और कहा कि, भाभी ऐसा वैसा ही तो करना है. तो फिर वो मुझसे बोली कि, छोड़ो यह क्या कर रहे हो कोई देख लेगा. तो मैंने उनसे कहा कि, कोई नहीं देखेगा सब सो रहे है. तो फिर वह भाभी मुझसे बोली कि, अरे तुम मरवाओगे जाने दो मुझको तो, तो फिर मैंने उनकी साड़ी को झट से ऊपर कर दिया और फिर वह कुछ समझ पाती उसके पहले ही मैंने उनकी चूत में अपनी 2 ऊँगलियाँ डाल दी थी।

और फिर वह मेरा हाथ पकड़कर हटाने लगी तब तक मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बब्स को दबा दिया था. मैं लगातार ही उनकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ चलाता रहा. भाभी भी पहले तो जाने दो जाने दो कहती रही, लेकिन शायद फिर मेरी ऊँगलियों का जादू उनपर चलने लगा था तो फिर वह भी विरोध करने की जगह इसस्स… आहहह… करने लग गई थी. और फिर मैंने तभी उनसे कहा कि, भाभी तुम्हारी चूत तो पानी छोड़ रही है, क्या इसमें अब मैं अपना लंड डाल दूँ? तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, हाँ, डालो ना. तो फिर मैंने अपना अंडरवियर नीचे खिसकाया और फिर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला तो भाभी ने उसको बिना कुछ कहे ही पकड़ लिया और फिर वह बोली कि, बड़ा ही अच्छा लंड है तुम्हारा तो।

और फिर मैंने फिर से उनकी साड़ी को ऊपर किया और फिर उनको नीचे झुकाकर अपना लंड पीछे से उनकी चूत में लगाया और फिर हल्का सा धक्का मारा तो चूत तो पहले से चिकनी थी तो मेरा लंड सर्ररर… से उनकी चूत के अन्दर जाने लगा, भाभी की चूत पूरी तरह से खुली हुई थी तो मैंने जब अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया था तब वह आहहह… उंहहह… करने लग गई थी. और फिर मैंने खड़े-खड़े ही उनकी चुदाई शुरू कर दी थी. और फिर मैंने उनसे कहा कि, भाभी लगता है कि, भैया ने आपकी चूत को जमकर चोदा है. तो फिर वह मुझसे बोली कि, हाँ, वह तो रोज ही चढ़ जाते है मेरे ऊपर, मेरी चूत को तो चोद-चोदकर खोल दिया है तुम्हारे भैया ने, अभी कुछ दिनों से खेत के काम में लगे हुए है इसलिये वह यहाँ नहीं रहते तो अभी मेरी चूत बची हुई है. और फिर मैंने उनको चोदते समय उनके दोनों बब्स को भी दबाना शुरू कर दिया था. और वह भी बीच-बीच में आगे को हो जाती तो मैं धक्का मारकर उनको पीछे से धकेलते हुए सटासट चोद रहा था. और वह आहहह.. और चोदो मेरी चूत में ऐसे ही डालते रहो आहहह… लेकिन मुझे चूत में ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था तो मैंने उनसे कहा कि, भाभी मुझको तुम्हारी गांड में अपना लंड डालना है तो फिर वह मुझसे बोली कि, तुम भी अपने भैया पर ही गए हो वह भी ऐसे ही करते है. और फिर यह कहकर वह थोड़ा और झुक गई तो मैंने पीछे से उनकी साड़ी को ओर ऊपर किया तो उनका वह पिछवाड़ा जो मेरी हालत खराब कर रहा था, वह अब खुलकर मेरी आँखों के सामने था। दोस्तों ये सेक्स कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

पहले तो मैंने उनके कूल्हों को जोर से दबाया और उनको पूरी तरह से मस्त कर दिया था और फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड के छेद पर लगाया और फिर धीरे-धीरे मैं आगे को होता गया और मेरा लंड आधे से ज़्यादा उनकी गांड के अन्दर चला गया था तो अब भाभी अरे! बाप रे आहहह… उहहह… करने लग गई थी. और फिर मैंने और ज़ोर लगाया और अपना पूरा लंड उनकी गांड के अन्दर डालकर मैं आगे-पीछे होने लगा था. अब मुझको कुछ मज़ा आने लगा था और फिर मैंने भाभी से भी कहा कि, तुमको गांड मरवाने में भी मज़ा आता है? तो फिर वह बोली कि, मज़ा आए ना आए चूत की गर्मी ठण्डी करवानी है तो गांड भी मरवानी पड़ती है मारो मेरी गांड और मार लो. और मैं लगातार ही उनको चोद रहा था।

उनके बब्स को दबाते हुए मैंने उनकी चुदाई की तो वह आहहह… इससस… सीईईई… करती रही और मैं ज्यो-ज्यो लंड पेलता रहा वह आहहह… आहहह… कहती रही. और फिर कुछ देर की जबरदस्त चुदाई के बाद मेरा लंड उनकी गांड में दमदार धक्कों के साथ ही ढीला पड़ गया था. और फिर मैंने अपना पूरा जोश उनकी गांड में ही हल्के-हल्के झटकों के साथ भर दिया था. और फिर मैंने उनको पीछे से जकड़ भी लिया था. और फिर कुछ पलों के बाद मेरा लंड अपने आप ही उनकी गांड से बाहर निकल आया था. और फिर वह भी मेरे आगे से हट गई थी. और फिर मैंने उनको कहा कि, भाभी मुझको तो बहुत अच्छा लगा तुम्हारी गांड मारकर आप कल भी मुझसे अपनी गांड मरवाना. तो फिर वह हाँ कहकर मुस्कुराती हुई वहाँ से चली गई थी. और फिर मैं भी अपनी खाट पर आकर सो गया था।

और फिर मैंने उसके बाद जब भी मुझको मौका मिला और मैं वहाँ जब तक रहा मैंने मेरी प्यारी भाभी की खूब जमकर चुदाई करी थी और उनकी चुदाई का वह सिलसिला आज तक भी चलता आ रहा है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!