जन्मदिन पर मिला ससुर जी का लौड़ा

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम अनीता है और घर में सब मुझे प्यार से अन्नु कहकर बुलाते है. मैं पटना के पास के एक कस्बे में रहती हूँ. मेरी उम्र 32 साल की है और मेरी शादी को हुए 5 साल बीत चुके है. मेरे पति के साथ मेरा झगड़ा होने की वजह से मैं अपने ससुराल में अपने ससुर जी के साथ रहती हूँ और मेरे पति दूसरे शहर में रहते है. मेरे ससुर जी मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह मुझको उनके बेटे के अलग रहने का दोषी समझते है. मैं एक स्कूल में पढ़ाती हूँ।

मेरे ससुर जी का नाम किशोरीलाल है. और उनकी उम्र लगभग 52 के आस-पास की है. मेरे ससुर जी का शरीर एकदम कसा हुआ है और उनका कद थोड़ा ठिगना है. मेरी सास मेरे पति के साथ ही रहती है. और मैं ससुर जी के साथ घर में ही रहती हूँ. मैं उनको पापा जी कहकर बुलाती थी. मेरे पति कभी-कभी ही घर पर आते है. मैं अपने बदन का ब्योरा आप सभी को दे रही हूँ जिससे आप लोगों को अपने दिमाग में मेरी एक वास्तविक छवि बनाने में मदद मिल सके. मेरी लम्बाई थोड़ी कम है यानी कि, 5.4 फुट के आसपास ही होगी. मेरे शरीर का रंग गोरा है एकदम मक्खन जैसा. और मेरा बदन एकदम भरा हुआ है. मेरे बब्स दूध से भरे हुए है और उनके निप्पल चॉकलेटी रंग के है. मेरे बब्स का साइज़ 34” का है. मेरे बाल थोड़े भूरे रंग के है. और मेरे कूल्हों का उभार तो ऐसा है कि, जो किसी भी मर्द को बैचेन करने के लिए काफ़ी है. दोस्तों जब मैं साड़ी पहनती हूँ तो और भी खूबसूरत लगती हूँ. मेरी शादी 27 साल की उम्र में हुई थी. मेरे पति का नाम संजय है और उनकी उम्र 34 साल की है. और उनकी लम्बाई भी मेरे बराबर की ही है और उनका शरीर दिखने में सामान्य है. कॉलेज में भी कई लड़कों ने मुझपर लाइन मारी थी लेकिन मैंने किसी को भी गंभीरता से नहीं लिया था क्योंकि मैं सिर्फ़ अपने पति को ही अपने शरीर का तोहफ़ा देना चाहती थी. दोस्तों जब मेरी शादी हुई थी तो मैं एकदम कुँवारी थी और मेरे पति ने ही पहली बार मुझको सुहागरात के समय छुआ था।

दोस्तों यह घटना कुछ समय पहले ही मेरे साथ घटी थी और मैं किसी को भी यह बात बता भी नहीं सकती थी. और फिर मैंने यह सोचा कि, यह बात मैं आप लोगों के साथ साझा करूं, जिससे मेरे दिल का बोझ भी कुछ कम हो सके. दोस्तों यह एक दिन की बात है गर्मी के मौसम में मैं हमारे घर के सामान्य बाथरूम में नहा रही थी क्योंकि मेरे बाथरूम का शावर खराब हो गया था. दोस्तों उस बाथरूम की कुण्डी खराब हो रही थी, और फिर मैंने सोचा कि, रात में कौन आएगा तो जिसकी वजह से मैंने ऐसे ही दरवाजा बन्द कर दिया था. और फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और फिर मैं शावर के नीचे खड़े होकर शावर ले रही थी कि, तभी अचानक से बाथरूम का दरवाजा खुला तो मैंने देखा तो मेरे ससुर जी सिर्फ़ लूँगी में ही खड़े थे. और फिर मैंने एकदम से चौंककर टावल को उठाया और लपेटने लगी लेकिन तब तक ससुर जी ने मेरे सारे अंगो को बड़े अच्छे तरीके से देख लिया था और फिर वह बाथरूम से बाहर निकल गये थे. और फिर मैं भी जल्दी से नहाकर के बाहर निकल आई थी. और फिर ससुर जी ने बाहर आने के बाद मुझे डांटा और बोला कि, तुम दरवाज़ा बन्द करके नहीं नहा सकती हो और फिर तुम कहोगी कि, मैंने तुमको इस तरह से देख लिया. और फिर मैंने ससुर जी से माफ़ी मांगी और फिर मैं अपने कमरे में चली गई थी. और फिर इस घटना के बाद मेरे ससुर जी का व्यवहार मेरी तरफ कुछ बदल सा गया था. और मैं जब भी किचन में काम करती थी तो वह मेरा हाथ बँटाने के लिये आ जाते थे और फिर वह मेरे अंगो को निहारते रहते थे और मुझे छूने का मौका तलाश करते रहते थे।

एकबार रविवार का दिन था तो मैं उठकर हाथ मुहँ धोकर नाश्ते की तैयारी कर रही थी कि, तभी ससुर जी ने मुझको आवाज़ लगाई और कहा कि, अन्नु चलो आज कहीं बाहर चलते है घूमने के लिये तुम तैयार हो जाओ जल्दी से. और फिर मैंने नाश्ता लगाया और फिर हम दोनों ने बैठकर नाश्ता किया और फिर हम दोनों ही बाजार में घूमने चले गये थे. ससुर जी ने बाजार से मुझको एक गुलाबी रंग की साड़ी दिलवाई थी तो मैं बहुत खुश हो गई थी और मन ही मन सोचने लग गई थी कि, लगता है ससुर जी ने मुझको माफ़ कर दिया है और अब मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक भी हो जाएगा पर मुझको कहाँ पता था कि, यह तो तूफान के आने से पहले की शांति है. और फिर अगले ही दिन मेरा बर्थ-डे भी था तो मुझसे यह खुशियाँ बर्दाश्त नहीं हो रही थी और मैं सोच रही थी कि, इतनी सारी ख़ुशी एक साथ मुझको कैसे मिल गई है. और फिर शाम को जब हम लोग वापस घर पर आ गये थे तो मेरे ससुर जी ने मुझसे कहा की अन्नु कल तुम यही साड़ी पहनना. और फिर मैं ससुर जी को भी निराश नहीं करना चाहती थी तो मैंने झट से उनको हाँ कर दी थी।

और फिर अगले दिन जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की मेरे फ़ोन पर मेरे पति का मैसेज आया था. और मेरे पति ने मुझको जन्मदिन की बधाई और बोला कि, अन्नु अब मैं तुमसे और कोई झगड़ा नहीं करना चाहता हूँ, और फिर उन्होनें मुझको आई.लव.यू. भी बोला तो मैं बहुत खुश हो गई थी और फिर मैंने ऊपर वाले को धन्यवाद बोला और फिर मैं नहाने के लिये चली गई थी. और फिर मैंने ससुर जी वाली साड़ी पहन ली थी और मैचिंग की ब्रा और पैन्टी भी पहनी थी. दोस्तों मैं उस साड़ी में एकदम खिली-खिली सी लग रही थी. और फिर मैं किचन में जाकर नाश्ता बना रही थी कि, तभी ससुर जी भी वहाँ पर आ गये थे और वह मेरे पीछे खड़े हो गये और फिर उन्होनें भी मुझको मेरे जन्मदिन की बधाई दी थी. और फिर ससुर जी मुझसे बोले कि, अपने जन्मदिन का तोहफ़ा नहीं लोगी क्या? तो मैंने उनसे कहा कि, हाँ ज़रूर लूँगी ना, तभी उन्होनें मुझको पीछे से पकड़ लिया और मेरे खुले पेट पर अपना हाथ फेरकर वह मुझसे बोले कि, मैं ही हूँ तुम्हारा तोहफ़ा. तो फिर मैं एकदम से चौंक गई थी. और फिर मैं ससुर जी को धक्का मारकर दूर करने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरे ससुर जी ने मुझको कसकर पकड़ लिया था. और फिर मैंने उनसे कहा कि, आपको यह क्या हो गया है. मैं आपकी बहू हूँ मैं आपकी बेटी समान हूँ प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए और फिर मैं रोने लगी. तो फिर वह मुझसे बोले कि, अन्नु जब से मैंने तुम्हारे नंगे बदन को देखा है तभी से मेरे मन में उसे पाने की चाहत हो गई है मैं इस बदन को लेकर ही मानूँगा. मैं रो रही थी और अपने आपको उनसे छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मेरे ससुर जी के मर्दाने जिस्म के आगे मेरी सारी कोशिश बेकार साबित हो रही थी. मेरे ससुर जी ने मुझको अपनी बाहों में क़ैद कर रखा था और मैं अपने उभरे हुए कूल्हों पर कुछ चुभता हुआ महसूस कर रही थी. और फिर ससुर जी मेरी गर्दन को चूम रहे थे और उनके हाथ मेरे पेट को सहला रहे थे, मैं रोए जा रही थी और उनसे छूटने का प्रयास कर रही थी. पर काफ़ी दिनों से पति के साथ सेक्स ना करने से मेरा सब्र भी मुझसे छूटता जा रहा था और फिर धीरे-धीरे मेरा विरोध भी कम होने लग गया था।

और फिर ससुर जी ने मेरा चेहरा अपने सामने किया और फिर वह अपने घुटनों के बल बैठकर मेरे पेट पर अपनी जीभ से चाटने लग गए थे. मैं नहाकर आई थी और शायद मेरी डियो की खुशबू ने उनको और भी मदहोश कर दिया था. और फिर ससुर जी के मुहँ की लार से मेरा पूरा पेट एकदम गीला हो चुका था. और फिर वह अपने दाँतों से मेरे पेट को काटने की कोशिश कर रहे थे. उनके दाँतों से मेरे पेट पर लाल निशान पड़ गये थे. और फिर मेरे ससुर जी अपने हाथों से मेरे कूल्हों को मेरी साड़ी के ऊपर से ही मसल रहे थे और वह मुझको अपने वश में करने की कोशिश कर रहे थे. मैं इतनी जल्दी हार नहीं मानना चाहती थी तो मैं उनको धक्का देकर अपने कमरे की तरफ भागने लगी लेकिन इसी बीच मेरी साड़ी खुल गई थी और मेरा पैर फंस गया था जिससे मैं नीचे गिर गई थी. और फिर ससुर जी मुझसे बोले कि, अन्नु प्लीज़ मान जाओ, ज़िद मत करो, मैं तुम्हारी जिंदगी बदल दूँगा तुम्हारी सारी खुशियाँ भी वापस आ जाएँगी. और फिर ससुर जी ने ज़मीन पर ही मेरी टाँगों को अपने हाथों में पकड़ लिया था और फिर वह मेरे पैर के अंगूठे को अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गए थे. मेरी टाँगे ऊपर उठने की वजह से मेरा पेटीकोट मेरी जाँघों के ऊपर चढ़ गया था. जिससे मेरे ससुर जी को मेरी गोरी और मखमली जाँघों के दर्शन होने लग गए थे. और फिर वह जल्दी से नीचे बैठ गये थे. और फिर वह मेरी जाँघों को भी अपने दाँतों से काटने और अपनी जीभ से चाटने लग गए थे. दोस्तों उनकी इस हरकत से मैं मदहोश हुई जा रही थी और सेक्स का खुमार मेरे सिर पर चढ़ता ही जा रहा था. और फिर उन्होनें मेरे गुलाबी रंग के पेटीकोट को भी ऊपर कर दिया था और मैं जो गुलाबी रंग की पैन्टी पहने हुए थी अब वही मेरी सुनी चूत को छुपाए हुई थी. मेरी मखमली और चिकनी जाँघें और टाँगे उनके सामने थी और वह उनको सहला रहे थे. दोस्तों मैंने भी बहुत दिनों के बाद किसी मर्द का हाथ अपने बदन पर महसूस किया था जिससे मेरा विरोध अब खत्म सा ही हो चुका था और सेक्स की खुमारी पूरे जोरों पर चढ़ रही थी. और फिर ससुर जी ने मुझको अपनी गोद में उठाकर मेरे कमरे में लाकर बेड पर लिटा दिया था. और फिर वह मुझसे बोले कि, अन्नु वाह… क्या खूबसूरत जिस्म पाया है तुमने, संजय को ठीक से इसका मज़ा लेने भी दिया है या नहीं? चलो कोई बात नहीं वो ना सही तो उसके पापा तो है तुम्हारे इस खूबसूरत जिस्म की मज़ा लेने के लिए. आज तो मैं तुमको जी भर के प्यार करूँगा, तुम्हारे बर्थ-डे के लिए इससे अच्छा गिफ्ट कोई नहीं हो सकता है।

और फिर ससुर जी भी मेरे पास ही लेट गये थे. और फिर वह मेरे होठों को चूमने लग गए थे और उन्होनें मेरे होठों को अपने दाँतों से काटकर बिल्कुल लाल कर दिया था. और अब वह मेरे गालों पर अपने दाँत से काट रहे थे. और मैं उनका विरोध कर रही थी लेकिन मेरा विरोध कुछ कम था. और फिर ससुर जी ने मेरे ब्लाउज के अन्दर हाथ डाला और फिर वह मेरे बब्स को दबा रहे थे. वह अपनी ऊँगली और अँगूठे से मेरे बब्स के निप्पल को दबा-दबाकर उनसे खेल रहे थे. और फिर मैं अपना होश खो चुकी थी. सेक्स का जादू मेरे सिर पर पूरी तरह से चढ़ गया था और मैं गरम-गरम आहें भर रही थी और गरम-गरम साँसे छोड़ रही थी. और फिर मेरे ससुर जी ने अपने एक हाथ से मेरे ब्लाऊज के हुक खोलकर मेरा ब्लाउज भी मेरे बदन से अलग कर दिया था और फिर मैंने अपने बब्स को छिपाने की कोशिश करी तो उन्होनें मेरे बब्स पर से मेरा हाथ हटा दिया था. और फिर उन्होनें मेरी ब्रा को नीचे खिसकाकर मेरे बब्स को बाहर निकाल लिया था. और फिर वह मेरे बब्स को भी चूसने लग गए थे और अपने दाँतों से मेरे निप्पल को भी काट रहे थे. दोस्तों उस समय मुझको थोड़े दर्द के साथ-साथ एक अलग ही आनन्द भी मिल रहा था, और मेरी आँखें अपने-आप ही बन्द हो चुकी थी. और मैं उनके तने हुए लंड को अपनी जाँघों पर महसूस कर रही थी. और फिर मेरे ससुर जी ने मेरी नाभि में अपनी जीभ फेरना शुरू कर दिया था, और अपने हाथों से मेरे दोनों बब्स को मसल भी रहे थे. दोस्तों तब मुझको बहुत दर्द हो रहा था पर मेरी सुनने वाला वहाँ पर उस समय कोई भी नहीं था. मेरे गोरे बब्स एकदम लाल हो चुके थे. मेरे बब्स को खूब चूसने के बाद ही उन्होनें मुझको कुछ आराम लेने दिया था. मैं अब उनके सामने अपने पेटीकोट में ही थी और मेरे ऊपर के जिस्म पर मेरी ब्रा ही थी जो भी उन्होनें मेरे पेट पर खिसका दी थी।

और फिर ससुर जी ने मेरे पेटीकोट को ऊपर उठा दिया और फिर उन्होनें मेरी पैन्टी में हाथ डाला तो जैसे ही मेरी चूत पर उनकी ऊँगली का स्पर्श हुआ तो मुझको एकदम से झटका सा लग गया था मैंने एकदम से उनका हाथ पकड़ लिया था और फिर मैंने अपनी जाँघें बन्द कर ली थी. दोस्तों मैं अपनी चूत को एकदम साफ़ करके रखती थी और उस दिन भी मैंने उसको अच्छी तरह से साफ किया था जिससे एक भी बाल मेरी चूत पर नहीं था. मैं बेड पर एकदम सीधा होकर लेटी हुई थी और मेरे ससुर जी का मुहँ एकदम मेरी दोनों जाँघों के बीच में था. और फिर मेरे ससुर जी ने मेरी पैन्टी को भी मेरी टाँगों से नीचे खिसकाकर अलग कर दिया था और फिर वह अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटने लग गए थे, और वह ऐसे कर रहे थे जैसे कि, वह मेरी चूत को खा जाना चाहते हो. मेरा तो दोस्तों उस समय बहुत ही बुरा हाल हो चुका था, और मैं सही ग़लत सब कुछ भूल चुकी थी. मेरी चूत भी उनके मुहँ की लार से पूरी भीगकर एकदम गीली हो चुकी थी और अब वह भी अपना रस उगल रही थी. मेरे ससुर जी अपनी जीभ को मेरी चूत के अन्दर तक ले जा रहे थे और मैं उनके सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी. और मेरी हालत तो बिल्कुल ही खराब हो चुकी थी. मेरी मोटी जाँघें उनके हाथों में नहीं आ रही थी. और वह बस मेरी चिकनी जाँघों को सहला रहे थे।

और फिर मेरे ससुर जी थोड़ा उठकर बैठे और फिर उन्होनें मुझको घुमाया जिससे मेरे गोल-गोल उभरे हुए कूल्हे अब उनके मुहँ के सामने आ गये थे, और मेरे ससुर जी फिर मेरे कूल्हों को अपने हाथों से तेज़ी से दबाने लग गए थे. और फिर कुछ ही देर के बाद अपनी जीभ से उनको चाटने लग गए थे. और मेरी चूत से भी रस निकल रहा था. मैं कसमसा रही थी. उस समय घर के सन्नाटे को मेरी सिसकारियाँ चीर रही थी. और एक बहू अपने ससुर के सामने अब अपना समर्पण कर चुकी थी. मैं मेरे कूल्हों में उनका मुहँ दबा रही थी और फिर वह मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से छेड़ने लग गए थे, और मैं आहहह… उह्ह्ह… कर रही थी. मेरे ससुर जी के काटने की वजह से मेरी जाँघें और कूल्हे एकदम लाल होकर खिलने लगे थे. और फिर ससुर जी ने बारी-बारी से मेरे दोनों कूल्हों को खूब चूमा और चाटा भी. और फिर वह अपने हाथों से मेरे बब्स को दबाने लग गए थे. और साथ ही मेरे ससुर जी ने मेरी चूत के ऊपरी भाग को अपनी ऊँगली से छेड़ना भी शुरू कर दिया था. और मैं आहें भर रही थी और मेरे मुहँ से आहहह… इस्सस… की आवाजें निकल रही थी।

ससुर जी भी सिर्फ़ पायजामा और बनियान ही पहने थे. और फिर उन्होनें अपना पायजामा उतार दिया और उन्होनें उसके नीचे कुछ भी नहीं पहना हुआ था. उनका काला लंड मेरी आँखो के सामने था. उनका लंड मेरे पति के लंड से थोड़ा छोटा था पर मोटा ज्यादा था. ससुर जी के लंड के चारों तरफ काले बालों का गुच्छा बना हुआ था. और उनकी जाँघों पर भी बहुत बाल थे. और मैं अपने ससुर जी के लंड को शरमाकर देख रही थी और मैं सोच रही थी कि, अब यह काला लंड मेरी चूत में कैसे घुसेगा बहुत दर्द होगा इससे तो. और फिर मेरे ससुर जी ने मेरे गोरे-गोरे हाथों में अपना काला लंड पकड़ा दिया और फिर उसको सहलाने को कहा तो मेरे हाथ खुद ब खुद ही उनके काले मोटे लंड को छूने लग गए थे. मैंने उसकी मोटाई को छुआ तो उनका लंड मेरे हाथों में नहीं आ पा रहा था. उसका टोपा भी एकदम फूला हुआ था और तपते लोहे जैसा गरम था. जहाँ एक तरफ मेरे बब्स और जाँघें ठंडी थी वहीँ दूसरी तरफ ससुर जी का लंड एकदम आग उगल रहा था. और फिर थोड़ी देर तक सहलाने के बाद ससुर जी ने अपने लंड को मेरे मुहँ में घुसेड़ने की कोशिश करी मैंने मना किया तो उन्होनें ज़बरदस्ती मेरे बाल पकड़कर मेरे मुहँ में अपना लंड डाल दिया था और फिर मेरा दम घुटने की वजह से मेरी आँखों में आँसू आ गये थे. और फिर वह मेरे बालों को पकड़कर मेरे मुहँ में धक्के लगाने लग गए थे. और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि, इसको लोलीपॉप की तरह चूसो. और फिर थोड़ी देर तक वैसे ही चूसने के बाद ससुर जी ने अपना लंड मुहँ से हटा लिया था।

और फिर ससुर जी ने मुझको बेड पर सीधा लिटाया. और मेरे बदन पर पेटीकोट अभी भी था. और फिर ससुर जी ने मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. उनके लंड का टोपा मेरी चूत के मुहँ में ठीक से नहीं आ पा रहा था. मैं उनके धक्कों को झेलने के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी. मेरी चूत बहुत दिनों से सूनी पड़ी हुई थी जिससे वह एकदम टाइट थी. मैंने उन्हें रोकना चाहा पर उनके जबरदस्त धक्कों के सामने मेरा विरोध फीका पड़ गया था. और फिर जैसे ही उनका लंड पहली बार मेरी चूत में घुसा तो मेरी तो साँसे ही रुक गई थी और मैं एकदम से चीख पड़ी थी. उनके दोनों घुटने बेड पर थे और मेरे घुटने उनके कन्धे के पास थे. मेरी टाँगें हवा में लहरा रही थी. और फिर ससुर जी ने थोड़ा रुक कर अपने लंड को धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया और मुझको तब जाकर कहीं साँस आई. और फिर ससुर जी भी मुझसे बोले कि, आह… कितनी टाइट चूत है तुम्हारी. ससुर जी का मुहँ मेरे मुहँ के बिल्कुल ऊपर था और उनके मुहँ से गर्म साँसे निकल रही थी. वो जब भी मेरी आँखो में देखते तो तेज़ धक्का भी लगा रहे थे. और ससुर जी के धक्के के कारण उनकी दोनों गोलियाँ मेरी गांड पर टकरा रही थी. और उससे पट-पट की आवाज़ आ रही थी. और फिर ससुर जी ने अपने धक्के बड़ा दिए थे. और मैं बस उन धक्कों का आनंद उठाने लगी थी मेरा पूरा शरीर उनके तेज धक्कों से आगे-पीछे हो रहा था. और ससुर जी मेरी सुनी पड़ी हुई चूत की जबरदस्त चुदाई कर रहे थे उनके हाथ मेरे बब्स को मसल रहे थे और मैं एकदम से जन्नत में पहुँच चुकी थी. ससुर जी के हर धक्के के साथ मेरा आनन्द बढ़ता ही जा रहा था. तभी ससुर जी रुक गये और उन्होनें अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और उनका तना हुआ लंड मेरी चूत के पानी से चमक रहा था।

और फिर ससुर जी ने अपनी पोजीशन को बदला और मुझको उल्टा करके घोड़ी की तरह झुका दिया और फिर वह मेरे ऊपर पीछे से चढ़कर मेरी चूत में अपना लंड घुसाने लगे. उनकी जाँघें मेरी जाँघों को स्पर्श कर रही थी और उनकी जाँघों के बाल मेरी जाँघों से रगड़कर सेक्स की गर्मी पैदा कर रहे थे. ससुर जी पीछे से पकड़कर अपने हाथों से मेरे बब्स को भी दबा रहे थे. और अब मेरे ससुर जी के धक्के तेज-तेज शुरू हो चुके थे और पच-पच की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी. और फिर ससुर जी रुक-रुककर मुझको चोदने लग गए थे. मैं भी अपनी कमर को पीछे करके उनका पूरा साथ दे रही थी. ससुर जी पीछे से मेरी नरम पीठ पर अपनी जीभ से चाट रहे थे. और फिर थोड़ी देर में ही मेरा पहला पानी निकल आया था और मैं एक जनन्त के अहसास को महसूस करने लग गई थी. लेकिन मेरे ससुर जी नहीं रुक रहे थे. और फिर एकदम से ससुर जी ने भी अपनी स्पीड बड़ा दी थी, तो फिर अब मैं समझ गई थी कि, ससुर जी का पानी भी निकलने वाला है. तो मैंने एकदम से उनको दूर करने की कोशिश की तो उन्होनें मुझको कसकर पकड़ लिया था और फिर उन्होनें अपना बीज मेरे सुनी चूत में छोड़ दिया था. ससुर जी की उस जबरदस्त चुदाई से मेरी चूत एकदम लाल पड़ चुकी थी. अपना पूरा बीज मेरी चूत में छोड़ने के बाद ससुर जी वहीं मेरे ऊपर ही लेट गये थे. और मैं भी एकदम थक चुकी थी।

जब उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से नहीं निकाला तो मैंने ही धक्का देकर उन्हें अपने से अलग किया और उनके लंड को चूत से निकाला. मैं उठकर सीधे अपने बाथरूम में गई, मुझको चलने में थोड़ी परेशानी हो रही थी. और फिर मैं अपनी चूत को पानी से धोने लगी जिससे कि, ससुर जी के लंड का पानी साफ़ हो जाए. ससुर जी का रस पानी के साथ मेरी चूत और जाँघों से नीचे बह रहा था. और फिर मैंने तुरन्त ही अपने आप को साबुन से साफ़ किया. और फिर बाथटब में लेटकर अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी. और फिर जब मैं बाथरूम से लौटकर आई तो मैंने देखा की ससुर जी अभी भी बेड पर लेटे हुए है. और फिर मैंने देखा कि, ससुर जी का लंड सिकुड़कर छोटा हो गया था. मुझको अपने पति की याद आ रही थी. और मैं अपने आपको कोस भी रही थी कि, मैंने इसका विरोध क्यो नहीं किया. और फिर मैं डर गई थी और फिर मैं अपने कमरे को अन्दर से बन्द करके रोने लगी कि, मैंने यह क्या करवा लिया।

और फिर तभी ससुर जी उठे और उन्होंने मेरा टावल खोल दिया और मैं पूरी नंगी उनके सामने खड़ी थी. और फिर ससुर जी मुझसे लिपट गये थे और फिर वह मुझको बाथरूम में ले गये थे. बाथरूम में शावर के नीचे खड़े होकर मेरे दोनों बब्स को चूसने लगे और अपने हाथों से मेरे कूल्हों को भी दबाने लग गए थे. और फिर मैंने उनसे कहा कि, अब प्लीज़ छोड़ दो और मुझको जाने दो. तो उन्होनें मेरी एक ना सुनी और उन्होनें मुझको वॉशबेसिन के सहारे खड़ा कर दिया और मेरी एक टाँग को ऊपर उठाकर अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दिया. दर्द के मारे मेरा तो बुरा हाल था. ससुर जी के हाथ में मेरी एक टांग थी और वह मेरी चूत में धक्के मारे चले जा रहे थे. मैंने शर्म से अपनी आँखें बंद कर रखी थी. ससुर जी के धक्कों की स्पीड बढ़ती ही चली जा रही थी. और वह अपने छोटे पर मोटे लंड को अन्दर तक घुसेड रहे थे. जिससे उनकी झांटे मेरी चूत को रगड़ रही थी. और फिर थोड़ी देर के बाद उनका पानी छूटने लगा और मेरा भी पानी उनके साथ ही छूटने लगा. और फिर वह शावर में नहाने लगे और मेरे टावल से अपने लंड को साफ़ करके बाहर चले गये थे।

उन्होनें पहले मुझको मेरे पति के बेड पर चोदा और बाद में मेरे बाथरूम में जहाँ कई बार मेरे पति ने भी मुझको चोदा था. मुझको उस समय बहुत शरम आ रही थी. दोस्तों इस घटना के बाद मैं अपनी नज़रे नहीं मिला पा रही थी. मैंने अपने आपको साफ़ किया और बेडरूम की चादर बदल दी. और फिर नाश्ता करने के बाद सीधे स्कूल चली गई. स्कूल में सभी लोग मुझको मेरे जन्मदिन की बधाई दे रहे थे. पर मेरी आँखों के सामने तो बार-बार मेरे ससुर की चुदाई का सीन आ रहा था।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!