ट्रेन की धड़क-धड़क में चूत करे फड़क-फड़क

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम शालिनी है और मेरी उम्र 27 साल की है. मैं इन्दौर की रहने वाली हूँ, और मैं एक शादीशुदा औरत हूँ. दोस्तों हम सभी की जिन्दगी में कभी कभार कुछ ऐसा घट जाता है जिसको हम कभी भी नहीं भूल सकते है. उसी तरह मेरे साथ भी पिछले साल एक ऐसी ही सेक्सी घटना घट गई थी. जिसको मैं आज कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से आप सभी के साथ बाँट रही हूँ।

हाँ तो दोस्तों यह बात पिछली गर्मियों की है और मैं बहुत खुश भी थी और थोड़ी दुखी भी थी. खुश इसलिए थी क्योंकि मेरे ससुराल में मुझको मेरे देवर की शादी में जाना था और दुखी इसलिए क्योंकि मुझे मेरे पति के बिना ही इस शादी में जाना पड़ रहा था. दोस्तों मुझको मेरे पति का काम बिल्कुल भी पसन्द नहीं है क्योंकि काम के कारण वह मेरे साथ बहुत कम वक़्त बिता पाते है. शादी में जाने के लए मैंने सभी ज़रूरी पैकिंग कर ली थी और रात की ट्रेन से मेरा रिज़र्वेशन भी हो चुक्का था. दोस्तों ट्रेन में रिज़र्वेशन तो आज कल ऐसा हो गया है कि, जैसे मुफ़्त में टिकट बंट रहे हो, हर समय सीटें फुल ही चलती है. दोस्तों मुझको ए.सी. कोच में रिज़र्वेशन नहीं मिला पर फिर भी में बहुत खुश थी कि, कम से कम मुझे स्लीपर की तो कनफर्म सीट मिल गई है. दोस्तों मेरी ट्रेन रात को 11 बजे थी और मुझको मेरे ससुराल जाना था तो मैंने एक ढीली फिटिंग की साड़ी पहन ली थी जिससे रात को गर्मी से मुझको कोई दिक्कत ना हो. और फिर मैंने अपने घर को अच्छे से ताला लगाकर और सब कुछ चेक करके टाइम पर स्टेशन पहुँच गई थी और फिर मुझको वहाँ जाकर पता चला कि, ट्रेन 1 घंटा लेट हो गई थी. और फिर मैंने वेटिंग रूम देखा तो वह एकदम फुल था और फिर मैंने सोचा कि, मैं प्लेटफॉर्म पर ही बैठकर इन्तजार करती हूँ. रात का समय था पर गर्मी बहुत लग रही थी. मेरे पसीने से मेरे ब्लाउज की बगलें पूरी गीली हो गई थी।

प्लेटफार्म पर आते-जाते हुए लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कि, मैं अभी-अभी बाथरूम से नहाकर निकली हूँ. लेकिन दोस्तों लड़कियों को इस चीज की आदत हो जाती है, इसलिए मैंने उस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था. गर्मी बहुत ज्यादा होने के कारण मेरी पीठ भी बहुत गीली हो गई थी. पसीने से गीले ब्लाउज के कारण मेरी ब्रा का हुक और स्ट्रेप बहुत ही साफ़-साफ़ दिखने लग गए थे और हर कोई उन्हें देखकर मजे ले रहा था. और फिर मैंने गौर किया कि, मेरे गाल से पसीने की एक बूँद शुरू हुई और नीचे की तरफ चलने लगी. और मैं भी उसी के बारे में सोच रही थी कि, यह पसीने की बूँद भी वहीँ जाना चाहती है जहाँ इस प्लेटफॉर्म का हर मर्द देख रहा है. वह पसीने की बूँद मेरे सीने से होते हुए मेरे दोनों बब्स के बीच में पहुँच गई थी. और फिर जब मुझे यकीन हुआ कि, इस पसीने की बूँद की किस्मत यहाँ पर मौजूद मर्दों की किस्मत से कुछ ज्यादा ही अच्छी है. और फिर कुछ ही देर में वह पसीने की बूँद मेरे दोनों बब्स के बीच में से होते हुए मेरे ब्लाउज के अन्दर समा गई थी. और फिर कुछ ही देर में मेरे बब्स के बीच का हिस्सा पूरा गीला हो गया था और मेरा ब्लाउज आगे और पीछे से गीला दिखने लग गया था। और फिर गर्मी तेज होने के कारण मैंने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे किया तो मेरे सामने के उभार सभी को दिखना शुरू हो गये थे. और फिर मुझको यह भी पता था कि, लोग अब मुझे और भी ज्यादा अच्छे तरीके से घूर रहे है पर मैं तो इस गर्मी से छुटकारा पाना चाहती थी इसलिए मैंने अपना पल्लू ठीक नहीं किया था।

और फिर इसी बीच में मैंने ध्यान दिया कि, मेरे ठीक सामने की बैंच पर एक 25-26 साल का लड़का बैठा हुआ था और वह मुझे ही देखे जा रहा था. उसकी नज़र ऐसी थी कि, जैसे वह मेरे सारे कपड़े अपनी नज़रों से ही उतार रहा है. दोस्तों मैंने उस समय एक हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी जिसका पल्लू पारदर्शी था. और साड़ी से मॅचिंग ब्रा भी पहनी हुई थी लेकिन फ़र्क यह था कि, मेरी ब्रा चमकीले कपड़े की थी. और फिर मैंने यह भी गौर किया कि, वह सामने वाला लड़का बार-बार मेरे बब्स को देख रहा है. ट्रेन को आने में अभी 15 मिनट और थे और गर्मी से परेशान होते हुए मैं बहुत बोर भी हो रही थी. और फिर इसलिए मैंने सोचा कि, क्यों ना तब तक इस लड़के के ही मजे लूँ. और फिर मैंने थोड़ा इधर-उधर देखते हुए अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और नीचे कर दिया ताकि उसको मेरे दोनों बब्स के बीच की गहराई और भी अच्छे से दिख जाए. और फिर जब उसकी आँखें मेरे बब्स के बीच की गहराई को ही देख रही थी कि, तभी मैंने उसकी तरफ देखा. तो वह मुझको देखकर घबरा गया था और फिर वह इधर-उधर देखने लग गया था. लेकिन मैं उसी को देखने रही थी, और फिर उसने मुझे देखा और हमारी आँखें कुछ देर के लिए आपस में लड़ती रही और फिर उसने अपनी नज़रें हटा ली थी. और फिर कुछ देर के बाद ट्रेन के आने की घोषणा हुई कि, कुछ ही देर में ट्रेन आने वाली है. और तभी मैंने सोचा कि, अब कुछ ही देर में ट्रेन आ जाएगी क्यों ना तब तक इस बैचारे को इसकी मेहनत का थोड़ा सा फल तो दे दूँ। और फिर मैं अपने पास ही के एक बुक स्टॉल को देखने लगी और मैं यह भी ध्यान दे रही थी की वह मेरी तरफ अच्छे से देख भी रहा है या नहीं।

और फिर मैं जब उस बुक स्टॉल की तरफ देखते हुए उठी और सामने रखे अपने बैग में से पानी की बोतल निकालने के लिए झुकी. और फिर मेरे झुकते ही मेरा पल्लू थोड़ा सा और नीचे हो गया था और उससे उसको मेरे बब्स अब और भी अच्छे से दिखने लग गए थे. और फिर अपने बैग में से बोतल निकालते समय मैंने अपनी नज़रें ऊपर करी और फिर मैं भी उसकी तरफ देखने लग गई थी. और उसकी आँखें मेरे गोरे जिस्म का पूरा मज़ा लूट रही थी और उसको बेहाल बना रही थी. और फिर मैं जैसे ही अपने बैग में से पानी की बोतल निकालकर खड़ी हुई तो मेरे बब्स के बीच की दरार अब उसको दिखना बन्द हो गई थी. और फिर वह होश में आया और वह मेरी आँखों में देखने लग गया था। और फिर मैंने अपना पल्लू ठीक करते हुए उसको यह लगने दिया कि, मैंने उसकी चोरी पकड़ ली है. और फिर वह भी समझ गया था कि, मैंने उसको मेरे बब्स को देखते हुए पकड़ लिया है. और फिर कुछ ही देर में ट्रेन की आवाज़ आई और फिर मैंने देखा कि, मेरी ट्रेन आ रही है और फिर कुछ ही देर में ट्रेन आकर स्टेशन पर खड़ी हो गई थी. और फिर मैंने उसकी तरफ देखा और उसने मेरी तरफ, और फिर मैं उसको खुश करने के लिए उसकी तरफ मुस्कुराई, तो वह बहुत खुश हो गया था. और फिर मैं अपना सामान लेकर खड़ी हुई. और फिर मैंने मन ही मन सोचा कि, चलो अब इस आशिक़ से तो पीछा छूटा. और फिर तभी मैंने देखा कि, वह भी अपना सामान लेकर उसी ट्रेन में अपना डिब्बा देखने के लिए खड़ा हो गया था. और फिर मैंने सोचा. अरे, यह भी इसी ट्रेन में ही सफर करेगा. अरे यार, यह तो मैंने सोचा ही नहीं था. और फिर हम दोनों एक ही डिब्बे में अलग-अलग दरवाजे से चढ़ने लग गए थे। और फिर मैं अपनी सीट पर गई और फिर मैं यह देखकर खुश हुई कि, चलो उसकी सीट मेरी सीट के आस-पास नहीं है. और फिर मैंने अपना सामान सेट किया और फिर मैं बाथरूम की तरफ जाने लग गई थी। और फिर मैं बाथरूम के पास लास्ट वाली सीट के पास आई तो मैंने देखा कि, वह बाथरूम से आ रहा था. और फिर उसको निकलने की जगह देने के लिये सीट के एक साइड में खड़ी हो गई थी. और उसको साइड देने लगी. और फिर वह आया और वह मेरी तरफ अपना चेहरा करता हुआ आगे जाने लग गया था।

और फिर आगे जाते समय उसका सीना मेरे बब्स से पूरी तरह से रगड़ गया था. और फिर वह जाते हुए मेरी तरफ मुस्कुराया. लेकिन मैं चौंक गई थी उसकी चालाकी को देखकर. दोस्तों मैं तो यह सब देखती ही रह गई कि, उसने कितनी चालाकी से उसने सबके सामने मेरे बब्स से अपने सीने को रगड़ दिया था, और उस समय मैं कुछ भी नहीं कर पाई थी। और फिर मैं बाथरूम में आई और फिर मैं वहाँ पर सोचने लगी और फिर उसकी हिम्मत ने सिर्फ़ मुझको उसकी तरफ आकर्षित ही नहीं किया बल्कि मेरे सोए हुए अरमानों को भी जगा दिया था. दोस्तों गर्मी की वजह से जो मेरे बब्स के बीच में पसीना आया था वह मुझे बहुत परेशान कर रहा था, इसलिए मैंने अपने ब्लाउज के हुक को खोलकर अपनी ब्रा से अपने दोनों गुलामों को आज़ाद करवा दिया था. और फिर जब ट्रेन चली तो उसकी स्पीड के कारण हवा और तेज़ लग रही थी और फिर मेरे पसीने से गीले बब्स जल्द ही फिर से सूख गये थे. और फिर मैंने देखा कि, मेरे बब्स से उसके टकराने के बारे में सोचकर मेरे बब्स के निप्पल एकदम से टाइट हो गये थे. और फिर मैं उनको देखकर और भी पागल सी होने लग गई थी. और फिर मैं अपने दोनों हाथों के अँगूठे और एक ऊँगली से अपने दोनों बब्स के निप्पल को दबाने लग गई थी. और उससे मैं खुद ही मज़े लेने लग गई थी. और फिर कुछ देर के बाद मैंने अपने कपड़े ठीक किए और फिर मैं उस बाथरूम से बाहर निकल गई थी।

और फिर जैसे ही मैं वहाँ पर आई थी जहाँ पर मेरे बब्स उसके सीने से रगड़ खाए थे, तो मैंने देखा कि, वह लड़का वहीँ पर ऊपर वाली बर्थ के पास ही खड़ा हुआ था. और फिर तो मैं पक्का समझ गई थी कि, यह इसबार भी अपना सीना मेरे बब्स से रगड़वाना चाहता है और इसलिए मैं इसबार अपने बब्स ऊपर करके उसके पास से निकलने लगी। और फिर जैसे ही मैं उसके पास से निकल रही थी तब मैंने अपने कूल्हे पर नीचे कुछ महसूस किया तो मैं एकदम से चौंक गई थी और मैं कुछ पल के लिए वहीं पर रुक गई थी. और फिर उसने मेरे पीछे से अपना दबाब और बढ़ाया और मुझे उसका लंड मेरी गांड की दरार पर महसूस होने लग गया था. और फिर मैं उसको नजर अंदाज करते हुए वहाँ से चली आई थी. और फिर मैं बिना पीछे देखे ही अपनी सीट पर जाकर लेट गई थी. दोस्तों अब तो मेरे अरमानों में बहुत बुरी तरह से आग लग गई थी, और मुझको पूरी नंगी होने का मन होने लगा था. और मेरी साँसें भी यह सब सोच-सोचकर तेज़ होने लग गई थी. और फिर मेरा दिल भी बड़ी तेज़-तेज़ धड़कने लग गया था. और फिर मैं खुद के ही होठों को काटने लग गई थी. और फिर मैं अपनी ही जीभ से अपने होठों को भेदने लग गई थी। और फिर धीरे-धीरे ट्रेन में सभी लोग सोने लग गए थे, और मैं भी अपनी ऊपर वाली बर्थ पर जाकर लेट गई थी. और फिर धीरे-धीरे उस पूरे डिब्बे में अँधेरा हो गया था. और मैं लेटे-लेटे ही अपने बब्स को दबा रही थी और फिर मैंने अपने ऊपर एक चादर भी डाल ली थी। और फिर मैं उस लड़के के साथ अपनी चुदाई के बारे में सोचती रही और अपने बब्स को दबाने के साथ-साथ अपनी चूत में ऊँगली भी करती रही. और फिर मैं यह सब करती-करती एकबार झड़ गई थी. और फिर मैं चुप-चाप लेट गई थी, और मेरा पानी निकलने के बाद मुझको थकान की वजह से नींद भी आ गई थी।

और फिर रात के करीब 1.45 बजे मुझको मेरे बब्स पर किसी का हाथ महसूस हुआ, और फिर मेरी नींद खुल गई थी और फिर अँधेरे में मैंने उसको देखने की कोशिश करी तो वह मेरे मुहँ पर अपना हाथ रखकर वहाँ से चुप-चाप जाने लगा तो फिर मैंने अपनी बर्थ से नीचे उतरकर देखा तो वह वही लड़का था. और फिर वह दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया था. और फिर मैं भी ट्रेन के उस डिब्बे में सभी देखते हुए चुप-चाप उसके पास गई तो उसने झट से मुझको अपनी बाहों में भर लिया था. और फिर वह मुझसे कहने लगा कि, तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही हो?

तो मैंने उससे अनजान बनते हुए पूछा कि, मैंने तुम्हारे साथ ऐसा क्या कर दिया। तो फिर वह मुझसे कहने लगा कि, आप मुझको सेक्स के लिए उकसा रही हो। तो फिर मैंने भी उससे कहा कि, तुमने भी तो मेरे साथ ट्रेन में वह हरकत करी थी अब हमारा हिसाब बराबर हो गया है. और फिर मैं वहाँ से वापस आने लगी तो उसने जबरदस्ती मुझको ट्रेन की गैलेरी से एक तरफ लेकर चूमना शुरू कर दिया था और वह अपने एक हाथ से मेरे बब्स को भी दबा रहा था. और उसके ऐसा करने से मेरा विरोध भी धीरे-धीरे अब उसके सहयोग में बदल रहा था. और फिर हम दोनों ही एकदूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे. और फिर ट्रेन की स्पीड कुछ कम हुई तो मैंने उसको बोला कि, यहाँ पर तो कोई आ जाएगा चलो बाथरूम में चलते है. तो फिर हम दोनों ही ट्रेन के बाथरूम में एकदूसरे को किस करते हुए आ गए थे। और फिर अन्दर जाते ही हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने-अपने कपड़े खोलने शुरू कर दिए थे. और फिर उसने मुझको टॉयलेट के कमोड पर बैठा दिया था और उस समय हम दोनों एकदम नंगे थे और वह मेरे सामने आकर खड़ा हो गया था और उसका लगभग 7” लम्बा और 3” मोटा लंड मेरे मुहँ के सामने सलामी दे रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर वह अपने लंड को मेरे मुहँ में घुसाने लग गया था, पहले तो मैंने उसको मना कर दिया था और फिर उसके बहुत जोर देने पर मैं मान भी गई थी. और फिर मैं उसके लंड को धीरे-धीरे अपने मुहँ में आगे-पीछे करने लग गई थी. और फिर 10 मिनट तक उसका लंड चूसने के बाद उसने मुझको उठाकर खड़ा कर दिया था और फिर वह मेरे दोनों टाँगों के बीच में बैठकर मेरी चूत को अपने मुहँ में लेकर चूसने और चाटने लग गया था और बीच-बीच में वह मुझसे कहता भी जा रहा था कि, तुम्हारी चूत बहुत प्यारी और एकदम रसीली है और इसका स्वाद एकदम मक्खन की तरह आ रहा है। और फिर वह एकदम से खड़ा हुआ और फिर उसने मुझको टॉयलेट के कमोड पर मेरे हाथ रखकर झुकाया और फिर वह मेरे पीछे आया और फिर उसने अपने लंड को मेरे पीछे से मेरी चूत के मुहँ पर लगाया और कुछ देर के लिये अपने लंड से मेरी चूत को सहलाते हुए एकदम से मेरी चूत में अपना लंड एक ही झटके से डाल दिया था. और दर्द के कारण मेरे मुहँ से निकलने वाली आवाज़ मेरे मुहँ में ही दबकर रह गई थी। और फिर वह कुछ देर तक तो वैसे ही रुका रहा और बस पीछे से अपने दोनों हाथों से मेरे बब्स को मसलता रहा, और फिर जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो अब वह धीरे-धीरे फिर से अपने लंड को मेरी चूत में आगे-पीछे करने लग गया था। और फिर कुछ ही देर के बाद मुझको भी मजा आने लग गया था. और फिर 20-25 मिनट की उस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वह झड़ने वाला था तो उसने मुझसे पूछा कि, कहाँ पर निकालूँ? तो मैंने उसको बोला कि, मेरी चूत में तो बिलकुल भी मत निकालना, तुम अपना सारा माल मेरे कूल्हों और बब्स पर ही निकाल दो। तो फिर उसने भी मेरे कहे अनुसार ही अपना आधा माल तो मेरे कूल्हों पर छोड़ दिया था और बाकी का आधा माल मेरे दोनों बब्स पर भी छोड़ दिया था।

और फिर उसने मेरे होठों को बड़े ही प्यार से चूमा और फिर मुझको आई.लव.यू. बोला और फिर हम दोनों ने ही अपने-अपने कपड़े पहन लिए थे. और फिर उसने धीरे से गेट खोलकर बाहर देखा और जब बाहर कोई भी नहीं दिखा तो उसने मुझको भी बाहर आने को बोला और फिर हम दोनों ही अपनी-अपनी बर्थ पर जाकर सो गए थे. और फिर सुबह हुई और मेरा स्टेशन भी आ गया था पर वह लड़का उस डिब्बे में नहीं था, और वह तो शायद रात को ही कहीं उतर गया था। और फिर मैं भी ट्रेन से उतरकर अपने ससुराल में आ गई थी और मेरे लिए वह ट्रेन का सफर एक प्यारी सी याद के रूप में आज भी मेरे दिल में है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!