पड़ोसी आंटी ने दी लंड खड़ा

हैल्लो दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम जय है और मैं दिल्ली से हूँ मेरी उम्र 26 साल कि है और मैं कामलीला डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ। और मैंने अब तक बहुत सारी कहानियों को पढ़कर उनके खूब मज़े लिए है जो मुझे बहुत मजेदार लगी और आज मैं अपना भी एक सच्चा सेक्स अनुभव आप सभी को सुनाने के लिए कामलीला डॉट कॉम के मंच पर आया हूँ।

दोस्तों मैं बहुत ज्यादा हैण्डसम तो नहीं हूँ लेकिन मेरे लंड का साइज़ बहुत बड़ा है अगर कोई भी लड़की या आंटी मेरे उपरी चेहरे या पर्सनालिटी को देखकर अगर मुझे रिजेक्ट करती है तो ये उसका बैड लक है जिसके नसीब में मेरा लंड नहीं और जो मुझसे पट गई और मुझसे चुदवा लिया उसे पता होगा दमदार चुदाई किसे कहते है। यह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाली एक बहुत ही हॉट सेक्सी आंटी कि है जिन्हें पहली नज़र में ही देखने के बाद उनको चोदने का ख्याल मेरे मन में आने लगा था। अभी के ज़माने में सेक्सी रिश्तों की कोई कमी नहीं होती है और चूत लंड कभी रिश्ते नहीं देखते है।

तो दोस्तों अब में आंटी का परिचय आप से करवा देता हूँ उनके फिगर का साइज़ 36-28-34 है. और वो बहुत ही सेक्सी लगती है. जब वो चलती है तो साड़ी के अन्दर से उनके मोटे बब्स जंप करते है. गांड हिला के चलना उनकी आदत है. उनकी गांड फुटबॉल की तरह बड़ी है. जब वो बैठती है तो साड़ी उनकी गांड की दरार में घुस जाती है और खड़ी होकर उसे निकालती है. ये देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है. वो हमारे परिवार में मिलती जुलती रहती है, हम लोगों में बहुत प्यार है. वो मेरी आंटी है लेकिन आंटी मज़ाक में मुझे गालियां देती रहती है।

मैं उनसे कहता की आंटी मैं तुम्हारे बेटे के जैसा हूँ आप मुझे गाली नहीं दे सकती हो तो वो कहती कि कितने प्यार से मैं तुझे गाली देती हूँ इसमें बुरा क्या है. मम्मी भी उनका साथ देती थी. मेरी तो आदत हो गयी थी उनकी गाली सुनने की. आजकल आंटी कही भी मिलती तो मुस्कुरा देती थी और गालियां भी दूसरे तरह से देती थी. जैसे मादरचोद बोलना, ‘माँ’ पर ज़्यादा ज़ोर लगाकर के बोलती थी. इसका मतलब आंटी मेरे पर लाइन मार रही थी. एक दिन कि बात है हमारे एक रिस्तेदार के यहाँ पर शादी थी तो मम्मी और पापा शादी में चले गये. दोपहर का समय था दादी माँ कही गयी थी. मैं घर पर अकेला था मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया. अपने कपड़े उतारे और सेक्सी मूवी देखना शुरु कर दी. सेक्सी मूवी देखकर के मैं अपने लंड से मुठ मारने लगा इतने में ही आंटी जोर से चिल्लाई दरवाजा खोलो. मैंने जल्दी से कपड़े पहने और दरवाजा खोला. उन्होंने कहा चल खाना खा ले. मेरे खाना खाने के बाद वो मेरा हाथ पकड़कर मुझे मेरे कमरे में ले गयी. मैं जब 20 साल का था पर आंटी मुझसे ज़्यादा ताकतवर थी।

आंटी :- क्या कर रहा था अन्दर?

मैं :- पढ़ रहा था।

आंटी :- मैंने खिड़की से तेरी पढ़ाई देखी है।

मैं :- पर आंटी इसमें ग़लत क्या है?

आंटी :- ग़लत कुछ नहीं है मैं भी मूठ मारती हूँ।

मैं :- पर आप ये क्यो करती है? अंकल आपको नहीं चोदते क्या?

आंटी :- दो बच्चे किसी तरह पैदा कर दिये बस।

मैं :- तो मैं क्या कर सकता हूँ।

आंटी :- तू मुझे सेक्स विडियो दिखाएगा?

मैं :- क्यो नहीं. चलो हम दोनों साथ मैं देख के मूठ मारते है।

आंटी :- ठीक है।

फिर मैंने एक विडियो शुरु किया. जिसको देखकर के हम लोग अपने-अपने कपड़े उतारने को मजबूर हो गये फिर हम दोनों नंगे हो गये. क्या बॉडी थी आंटी जी की. बड़े-बड़े सुन्दर बब्स उस पर काली-काली चुचियां. जी कर रहा था की चूसकर दूध पी लूँ. मुलायम चिकनी जाँघो के बीच फूल जैसी चूत कुछ गीली थी. जी तो कर रहा था की उनकी चूत में अपना 7.5″ का लंड अन्दर कर दूँ. मैं उनको देख रहा था और वो वीडियो देख रही थी।

आंटी :- मैं तुझे कैसी दिखती हूँ।

मैं :- आप बहुत खूबसूरत और चुदासी है।

आंटी :- तू भी मुझे ठीक लगता है।

मैं :- आंटी जी क्या मैं आपको चोद सकता हूँ?

आंटी :- जय चुदाने ही तो आई हूँ।

आंटी जी का जवाब सुनकर मैं घुटनो के बल बैठकर उनकी चूत को कसकर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उनकी चूत को फैलाकर उनकी चूत के दानों से खेलने लगा. आंटी जी आह्ह्ह… अहह… की आवाज़ निकालने लगी। और उत्तेजित होकर मेरा सर अपनी चूत में दबाने लगी।

आंटी :- मादरचोद क्या कर रहा है?

मैं :- चुप कर रंडी साली अभी तुझे वो मज़ा दूँगा की जिंदगी भर याद रखेगी।

फिर मैं उनके होठों पर किस करने लगा और उनके मुहँ मैं जीभ डालकर के उनकी जीभ को चूसने लगा. हम दोनों की लार मुहँ से निकलकर बह रही थी. मैंने कहा भोसड़ी कि मुहँ तो खोल पूरा. उसने मुहँ खोला और मैंने अपना थूक उसके मुहँ में डाल दिया. साली सब निगल गयी हम लोग फिर से किस करने लगे. इसके बाद मैं बेड पर बैठ गया और आंटी मेरा लंड चूसने लगी. इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था मुझे। मैं जोश ही जोश मैं आंटी के मुहँ को ही चोदने लगा था. आंटी लंड निकालना चाहती थी लेकिन मैंने उनका सिर अपने लंड पर दबा लिया था. 7.5″ का पूरा लंड आंटी के मुहँ में था. आंटी बोल भी नहीं पा रही थी।

मैं :- चूस, साली रंडी चूस मेरा लंड. पता नहीं कितने लोगों से अपनी चूत मरवाई है साली तूने. कुत्तिया साली चूस मेरा लंड. खा जा साली इसे।

आंटी :- जय अब मेरी चूत से नहीं रहा जाता. चोद दे मुझे जय. अपनी इस रंडी की चूत में डाल दे अपना लौड़ा।

फिर मैंने उनकी चूत के मुहँ पर अपना लंड रखकर के एक जोरदार धक्का मारा पर लंड फिसल गया।

आंटी :- जय, मेरी टाइट चूत में लंड घुस नहीं पा रहा है. पहले अपनी माँ की चूत मारके आ मादरचोद. इसके पहले कभी भोसड़ा नहीं मारा क्या?

मैं :- साली तुझ जैसे रंडी मिली ही नहीं।

इसके बाद मैंने आंटी कि टाँगे फैलाई और उनकी चूत को हाथ से खोला फिर मैंने अपना लंड तोड़ा सा अन्दर डाला।

आंटी :- पूरा डाल साले मैं लंड लेने को तड़प रही हूँ. चोद जय चोद।

फिर मैंने एक ज़ोर का झटका मारा और लंड चूत को चीरते हुए एकदम अन्दर घुस गया।

मैं :- बहुत मज़ा आ रहा है रंडी तुझे चोदने में तेरी चूत बहुत मस्त है, कमाल कि है।

आंटी :- कुत्ते तुझसे चुदकर के मुझे ज़्यादा मज़ा आ रहा है. तेरा लम्बा लंड अन्दर तक जा रहा है. जी करता है की तुझसे ही शादी कर लूँ। वाह मेरे राजा वाह क्या मस्त चुदाई करता है। चोद साले मेरी चूत का मोटा भोसड़ा बना दे, आहह… और जोर से दे अपने लंड से झटके भोसड़ी के।

दोस्तों आंटी कि चूत की चुदाई करके मैं तो जन्नत में था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और आंटी और मैं पसीने से लतपत हो चुके थे।

आंटी :- आह्ह्ह…. बहुत मज़ा आ रहा है जय, मैं आज से तुम्हारी ही हूँ।

मैं :- तू शादी कर या ना कर अब तो तेरी चूत का मालिक मेरा लंड ही है।

तुझे चोद-चोदकर तेरी चाल बदल दूँगा जानेमन और 9 महीने में एक बच्चा भी दूँगा. इसके बाद 20 मिनट तक आंटी कि चूत को चोदने के बाद मैंने अपना गरम वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया। जो कि उसकी चूत में गहराई तक पहुँच गया और आंटी को देखा तो वो भी मेरे लंड से निकली हर एक बूंद को अपनी चूत में महसूस कर रही थी। और बहुत खुश नज़र आ रही थी, आंटी भी 2 बार झड़ चुकी थी और मैं उनकी चुदाई करके अब बिल्कुल शांत हो गया था। मुझे थकान हो रही थी. तो मैं उसके बाजु होकर लेट गया। फिर आंटी पूरी तरह से संतुष्ट होकर मुझे चूमने लगी।

आंटी :- जय आज तो तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया है मैं आज से तुम्हारी ही हूँ। जब भी दिल करे बस मज़े करने आ जाना।

वो फिर से मुझे चूमने लगी, और बोली…

आंटी :- जय अपनी माँ को चोदेगा?

मैं :- क्या चाल है उसकी. गांड हिला-हिला के चलती है. दिल तो करता है की गांड मार लूँ रंडी की पर उसे पटाएगा कौन?

आंटी :- तू आने दे उसे, हम दोनों तेरे लंड को यादकर के मूठ मारते थे।

मैं :- यानी माँ भी रंडी है।

आंटी :- मुझसे ज़्यादा चुदासी तो वो है।

मैं तुझे पटाने के लिए ही गालियां देती थी. आख़िर मैं पटा ही लिया।

मैं :- मैं भी तो तुम दोनों को चोदना चाहता था. पर डरता था।

फिर मुस्कुरा के अपने कपड़े पहनकर आंटी मुझे एक किस देते हुए अपने घर को चली गई. दोस्तों अब तो मैं आंटी कि रोज़ ही गांड और चूत मारता हूँ। और गांड को मार-मारकर के मोटा होल कर दिया है। जिसमें एक साथ दो-दो लंड घुस जाये और उसकी प्यासी चूत को उसकी गांड तक फैला दिया है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!