मेरा लंड था परेशान तो मामी की चूत

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम अतुल है और मैं पिछले कुछ सालों से लगातार ही कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों के मज़े लेता आ रहा हूँ। मैंने ऐसा बहुत बार किया और आज मैंने मेरे साथ एक दिन घटी अपनी भी एक सच्ची सेक्स घटना को आप लोगों को बताने के बारे में विचार बनाया तो आज मैं उस घटना को आपके सामने लेकर हाजिर हूँ। यह घटना उस समय की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था, गर्मी की छुट्टियाँ में मेरे मामाजी ने मुझे अपने पास बुला लिया था. दोस्तों मेरी मामी जी उदयपुर में काम करती थी और मुझे उन्हें लेते हुए सूरत जाना था. मामाजी ने हम दोनों के लिए एसी स्लीपर बस में दो टिकिट बुक करवा दिये थे।

मैं घर से रवाना हो गया और बस उदयपुर पहुँच गई थी. और फिर मैंने मामी का सामान रखवा दिया था और वह स्लीपर में आकर लेट गई थी, साथ में उनकी 1 साल की बेटी भी थी. रात बहुत हो चुकी थी और हम लोग सोने लगे थे. और फिर जैसे ही मामी ने अपनी बेटी को दूध पिलाने के लिए अपना एक बब्स बाहर निकाला तो मेरा मन डोलने लगा और मैं छुप-छुपकर तिरछी निगाहों से उनके बब्स को देखने लगा. उसको देखकर मेरा मन तो कर रहा था कि, उनकी बच्ची को हटाकर खुद उनके बब्स को चूसने लग जाऊँ, पर ऐसा करना मुमकिन नहीं था. और फिर रात बढ़ी और ए.सी. की वजह से ठण्ड भी बढ़ गई थी, ए.सी. और मामी की जवानी दोनों मेरे शरीर को और ठंडा किए जा रही थी. लेकिन मेरा लंड तो आग उगल रहा था. मैं कुछ देर तक ठण्ड से ठिठुरता रहा. और फिर मामी को भी ठण्ड लगने लगी और फिर उन्होंने अपने बैग से एक चादर ले लिया और मैं भी उनके साथ चादर में घुस गया था, फिर भी ठण्ड कम होने का नाम नहीं ले रही थी. मेरे मन में गुदगुदी हो रही थी. और फिर मैंने मामी से जब ज़्यादा ठण्ड होने की बात कही तो वह मेरे और भी करीब आ गई थी. उनके जिस्म की गर्मी से मेरी ठण्ड कुछ कम हुई और फिर मामीज़ी सो गई थी. इस सफ़र से पहले मेरे उनके बब्स को देखने से मेरे अन्दर की वासना तो पहले से ही जाग चुकी थी। और फिर मामी सो गई थी और मैंने मौके का फायदा उठाकर उनके बब्स और गांड को सहला दिया था और उनको कुछ पता भी नहीं चला था. और फिर मैंने मूठ मारकर अपने लंड को शान्त किया और सो गया था। और फिर सुबह हम मामाजी के घर पहुँच गये।

मामाजी एक दवाई की कम्पनी में काम करते थे इसलिये वह सुबह करीब 9 बजे कम्पनी में चले गये थे और घर पर सिर्फ़ मामी, मैं और उनकी एक साल की बेटी थे. मामी घर की साफ़-सफाई कर रही थी और मैं नहाकर पलंग पर बैठा था. उनके झुककर पौछा लगाने की वजह से मामी के बड़े-बड़े बब्स मुझको साफ दिखाई दे रहे थे. मेरा मन उन रसीले आमो का रस पीने के लिए बैचेन हो उठा था, पर मैं उनकी नज़र में एक दुबला पतला शरीफ बच्चा था इसलिए कोई प्रयास करना मैंने ठीक नहीं समझा और किसी तरह खुद को रोक लिया. और फिर कुछ देर के बाद मामी नहाने चली गई थी और मैं बाथरूम के दरवाज़े के छेद में से उनको नहाते हुए देखने लगा. मामी ने अपने कपड़े उतारे और साबुन से रगड़कर नहाने लगी. क्या हसीन नज़ारा था दोस्तों मुझे उम्मीद नहीं थी की छुट्टियों में मुझे किसी ज़बरदस्त माल के दर्शन होंगे. उनकी उम्र 29 साल थी उनका गोरा रंग, दिलकश चेहरा और उनके मादक जिस्म का उतार चढ़ाव तो लाजवाब था फिगर यही कोई 34-28-34 का होगा. उस समय तो इतना मालूम नहीं था पर आज याद करता हूँ तो लगता है कुछ इतना ही रहा होगा. शाम को मामा जी आए और हमने खूब बातें और मस्ती की. और फिर रात को हम छत पर बिस्तर लगाकर सो गये थे. मैं मामा और मामी के बीच में सोया हुआ था। थोड़ी देर में मामा ने मुझसे कहा कि, उन्हें यहाँ पर नींद नहीं आ रही है और वह अन्दर कमरे में जाकर कूलर चलाकर सो गये थे. और कुछ देर में मामी भी सो गई थी, पर मैं उनका नंगा बदन याद करके उत्तेजित हुआ जा रहा था. और फिर कुछ हिम्मत जुटाकर मैं उनके करीब गया और नींद में होने का नाटक करते हुए उनके बब्स पर अपना हाथ रख दिया. कुछ देर हाथ वैसे ही रखा रहा और फिर हल्का-हल्का दबाना शुरू किया. मैं तो मदहोश हुए जा रहा था लेकिन अचानक से मामी उठ गई थी और उसने मेरा हाथ हटाकर दूर कर दिया था. उस समय मुझे बहुत डर लगा कि, कहीं उन्होंने माँ से कुछ कह दिया तो बहुत बेज़्ज़ती होगी. पर सब कुछ ठीक रहा. और फिर कुछ दिन मैंने ऐसे ही उनकी गांड और बब्स को देखते हुए निकाल दिए थे. और अब तो शायद उन्हें भी मेरे इरादे समझ में आने लगे थे. मेरी छुट्टियाँ खत्म हो गई थी और मुझे अपने अधूरे सपने को लेकर अपने घर वापस जाना पड़ा. मैं घर पर अक्सर सोते समय मामी की हसीन जवानी को याद करता और इससे मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं कई बार मामी को अपने सपनों में भी चोद दिया करता था, जिससे मेरी अंडरवियर गीली हो जाती थी. और फिर दिन ऐसे ही बीतते गये और मेरी प्यास और बढ़ने लगी. लेकिन मैंने पढाई में कभी कोताही नहीं बरती, इसका परिणाम यह हुआ की मेरा एडमिशन दिल्ली में हो गया था।

मेरा नाम पूरे परिवार में हो गया और मैं बहुत खुश था. और फिर मैं छुट्टियों में नानीजी के घर गया. वहां बड़ो की बातें सुनकर मुझे यह पता चला कि, मेरी मामी का उनके ऑफीस के किसी आदमी के साथ नाजायज संबंध हो गया था. और फिर यह सुनते ही मुझे उम्मीद की किरण नज़र आई. मामा जी हर महीने 2-3 बार ही मामी से मिलने जाते थे. शायद इसलिए सेक्स की प्यास ने मामी को किसी और से चुदवाने को मज़बूर किया था. मैं अब दिन-रात मामी की चूत फाड़ने के सपने देखने लगा. कॉलेज में एक साल पलक झपकते ही बीत गया और साल के अंत तक मैंने एक गर्लफ्रेंड भी बना ली थी. मैं पिछले 4 महीनों से उसके साथ था। हम दोनों को एक-दूसरे का साथ बहुत पसन्द था. लेकिन वो मुझे किस के अलावा और कुछ नहीं करने देती थी, वो थोड़ी शर्मीले स्वभाव की थी. एक लड़की के इतने करीब होकर भी मैं कुछ नहीं कर पा रहा था. हॉस्टल में रहकर मैंने बहुत सारी सेक्सी फिल्म देखी और सेक्स कहानियां भी पढ़ी. इससे मेरी प्यास और बढ़ गई थी और मैं अक्सर मूठ मारकर अपनी प्यास बुझाने लगा. कभी-कभी तो दिन में 2-3 बार मूठ मार लेता था. मैंने अपना खुद का लैपटॉप भी ले लिया था और उसमें खूब सारी सेक्सी फिल्म डाल रखी थी. एक साल पूरा हुआ और फिर छुट्टियाँ हो गई. में लैपटॉप को लेकर घर चला गया और वहाँ पर भी छुप-छुपकर बैठकर सेक्सी फिल्में देखता रहा। और फिर एक दिन मुझे मामाजी का फोन आया की उन्हें भी लैपटॉप खरीदना है. इसलिए वो मेरा लैपटॉप चलाकर के देखना चाहते थे. वैसे भी पढ़ाई की व्यस्तता के कारण मैं पिछले 3 सालों से उनसे मिल नहीं पाया था तो उन्होंने मुझे अपने पास सूरत आने को कहा तो मैं तुरन्त ही मान गया और सूरत जाने की तैयारी करने लगा. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे. मामा से मिलने से ज़्यादा मैं मामी की चूत फाड़ने को बेताब था. क्यूंकी मामी का तबादला भी अब सूरत में ही हो गया था. मैं अपना लैपटॉप लेकर मामा के घर पहुँच गया और फिर वहाँ पर पहुँचकर मैंने कपड़े बदलने की सोची और मैंने मामी के सामने ही अपनी जीन्स को उतार दिया. ताकि उन्हें अंडरवियर में मेरे बड़े मोटे लंड का साइज़ पता चल सके. मेरी चाल कुछ हद तक कामयाब भी हुई. और फिर मैंने अपनी तिरछी निगाहों से पता लगा लिया था कि, मामी मेरे लंड को निहार रही है और वह क्यों ना देखती. मेरा शरीर अब तो बहुत अच्छा हो चुका था. जवानी मुझ पर पूरी तरह मेहरबान चुकी थी. मेरी अच्छी कद-काठी निकल आई थी और इससे मेरा विश्वास भी काफ़ी बढ़ चुका था. और फिर रात हो गई और हम सब सो गये. मुझे अलग कमरे में सुलाकर मामा-मामी अपने कमरे में चले गये. रात को जब मैं पेशाब करने के लिए उठा तो उनके कमरे से मामी की सिसकारियां सुनाई दे रही थी. आह्ह्ह… आह्हह… और… फाड़ डालो… ज़ोर से डालो… आहह…

मैं कान लगाकर सुन रहा था. इतने में आवाजें आनी बन्द हो गई थी और फिर कुछ देर में मामी मामा को गालियाँ देने लगी. मामा बोले इसमें मेरी क्या ग़लती है पिछले आधे घंटे से मैं तुम्हारे बदन को गर्मी दे रहा हूँ फिर भी तेरी प्यास नहीं बुझती है. मामी गालियाँ देती रही और फिर मैं चुप-चाप आकर अपने कमरे में सो गया और सोचने लगा कि, किस तरह मैं मामी को चोदूं. और फिर सुबह हो गई थी और मामा-मामी दोनों ऑफीस चले गये थे. मामी दोपहर में जल्दी आ गई थी क्यूंकी वह सरकारी नौकरी में थी. और फिर हमनें बैठकर काफ़ी बातें की, बातों ही बातों में उन्होंने मुझसे पूछ ही लिया की तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? मैंने उन्हें बता दिया हाँ है. पिछले 4 महीनों से मैं एक लड़की से बातें कर रहा हूँ. मुझे थोड़ा अंदाज़ा हो गया था कि, मामी को मुझमें दिलचस्पी आने लगी है. और फिर में फ़िल्म देखने लगा. फ़िल्म में खूब सारे किस सीन थे. मामी भी मेरे पास बैठकर फ़िल्म देखने लगी. इतने में एक सेक्सी सीन आ गया और मामी ने मुझसे कहा तू तो बिगड़ गया है. कैसी-कैसी फिल्मे देखता है. इस पर मैंने कहा इसमें शर्माने वाली क्या बात है यह सब तो चलता है और मेरे पास तो इससे भी अच्छी फिल्मे है।

मामी बोली :– अच्छा. तो दिखाओ.. तुम किन-किन फिल्मों की बातें कर रहे हो?

मामी की दिलचस्पी देखकर मुझे लगा कि, अगर मैं उन्हें सेक्सी फ़िल्म दिखा दूँ. तो शायद मेरा काम बन जाए. और फिर मैंने एक कुँवारी लड़की वाली फिल्म चालू कर दी. जैसे ही फिल्म शुरू हुई लड़का-लड़की एक-दूसरे को चूमने लगे और मामी भी उसको बड़े ध्यान से देखने लगी. और फिर कुछ देर में फिल्म में दोनों ने कपड़े उतारना शुरू कर दिए और मामी ने कहा कि, मुझे शरम आ रही है. इससे बन्द कर दो. मैं बोला मामी क्यों मुझे बेवकूफ़ बना रही हो तुमने भी तो अपने कॉलेज के समय में ऐसी फिल्मे देखी होगी तो मामी ने कहा हमारे ज़माने में ऐसी फ़िल्में बड़ी मुश्किल से मिलती थी. इसलिए कभी देखने का मौका ही नहीं मिला. और फिर हम दोनों वापस देखने लगे. लड़की की ‘आहे’ सुनकर और मामी के बड़े बब्स देखकर मैं तो मचल रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया और मामी की साँसे भी तेज़ हो गई थी. उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था. और उनकी चुदाई की इच्छा भी बढ़ती जा रही थी. और फिर कुछ देर तक देखने के बाद में मूठ मारने के लिए बाथरूम चला गया. जल्दी से मूठ मारकर वापस आ गया, क्यूंकी मुझे उम्मीद थी कि, अकेले में मामी भी अपनी खुजली मिटाने की कोशिश करेगी. और फिर वही हुआ मामी को चूत रगड़ते देखकर मुझे जोश आ गया और मैंने जल्दी ही मामी को पीछे से जकड़ लिया और उनकी सलवार में अपना हाथ घुसा दिया, उनकी चूत को मसलने लगा. चूत की गर्मी देखकर ऐसा लगा कि, मामी चुदाने को बेताब है. बस फिर क्या था मैंने मामी के बब्स मसलने शुरू कर दिए और मामी मदहोश होने लगी. उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़कर फिर से अपनी सलवार में डाल लिया मामी का जोश देखकर मेरा फिर से लंड खड़ा हो गया. मैंने ज़ोर से मामी की चूत को रगड़ा तो वो झड़ गयी. झड़ने के बाद मामी उठकर बाथरूम में चली गई और साफ होकर वापस आ गई थी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उनके कमरे में आते ही मैंने मामी के होठों को चूम लिया पर मामी ने मुझे हटाते हुए कहा कि, थोड़ा सब्र करो गुड़िया ने देख लिया तो तुम्हारे मामा से कह देगी अकेले में जो चाहे करना. मुझे मन मारकर उसकी बात माननी पड़ी और मामी के एक बब्स को एक हाथ से पकड़कर दूसरे हाथ से मूठ मारने लगा फिर जल्द ही झड़ भी गया. फिर ना जाने मामी को क्या सूझी उन्होंने मेरे खड़े हुए लंड को पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगी. मैंने कहा मामी झड़ जाएगा तो वह बोली मैं तो चेक कर रही थी की तू मेरी चूत को भी शान्त कर पाएगा या नहीं. और फिर यह सुनकर मुझे जोश आ गया और मैं खुद को मजबूत बनाने की कोशिश करने लगा, मामी 10 मिनट तक ज़ोर से रगड़ती रही पर मेरा माल नहीं निकला. और फिर उसने मुहँ से लेकर बहुत चूसा आहहह… वह क्या एहसास था उनके मुहँ की गर्मी और चूसने के स्टाइल ने मुझे मदहोश कर दिया था. और फिर लगभग 10 मिनट के बाद मेरा माल निकल गया. और फिर मैंने मामी के बब्स को चूसा और चूत में ऊँगली डाली और उनको भी झाड़ दिया। मैंने इतने जोश से ऊँगली की थी कि, मामी थोड़ी ही देर में झड़ गई थी. मामा के आने का और गुड़िया के उठने का समय हो चला था लेकिन उस दिन चुदाई नहीं की लेकिन अगले एक हफ्ते जो मैं वहाँ पर रहा तो मामी ने जमकर अपनी चूत का रस पिलाया और मैंने भी अपने लंड से उनकी चूत को ठण्डा किया, कभी-कभी तो मामी भी मुझसे खूब चुदाई करवाती थी अलग-अलग तरीके से चुदती थी। मामी की यह चूत का अहसान में ज़िंदगी भर नहीं भुल पाऊंगा।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!