मेरी कुँवारी मामी की चूत का उद्घाटन

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम सरफराज है, मेरी उम्र 28 साल की है और मैं दिखने में काफी अच्छा हूँ और साथ पेशे से मैं एक डॉक्टर भी हूँ. और मैं आज आप सभी को अपनी एक सच्ची चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ जिसमें मैंने मामी को उसकी चुदाई के मज़े देने के साथ-साथ जन्नत की भी सैर उसको करवाई जिसकी वजह से वो मुझसे बहुत ख़ुश हुई और उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया।

दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब मैं मेडिकल कॉलेज का स्टूडेंट था दोस्तों मेरे एक मामा है जो कि, अपनी हरकतों से कुछ ठीक नहीं है. और वह बचपन से ही कुछ ग़लत सोहबत में पड़ गये थे जिससे वह अपनी जवानी तक आते-आते तकरीबन नामर्द ही हो चुके थे. वह अपने माता-पिता के इकलोते लड़के थे इसलिये घरवालों ने जोर देकर उनकी शादी कर दी थी. दोस्तों जिस लड़की से उनकी शादी की गई थी वह उम्र में उनसे काफ़ी छोटी थी, और वह बला की खूबसूरत भी थी खैर मैं भी उन्ही दिनों अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करके प्रेक्टिस करने के लिये विदेश चला गया था और वहाँ पर अपनी प्रेक्टिस पूरी करके 3 साल के बाद वापस लौटा था. और फिर मैंने सोचा कि, अब मुझको भी अपना एक छोटा-मोटा अस्पताल खोल लेना चाहिये. इसलिये मैंने किसी अच्छी जगह की तलाश शुरू कर दी थी. और फिर इत्तेफ़ाक़ से मुझको अपने मामा के घर के पास ही एक जगह बहुत पसन्द आ गई थी और फिर मैंने अपना क्लिनिक वहीँ पर शुरू किया था. मेरे मामा का घर रास्ते में ही था इसलिये क्लिनिक पर आते-जाते उनसे अब मेरी सलाम दुआ भी होने लगी थी. मेरे मामा भी एक प्राइवेट कम्पनी में काम करते थे, और वह बहुत सी बार देर रात तक घर वापस आते थे।

एक दिन जब मैं अपने मामा के घर के आगे से गुज़र रहा था तो मैंने अपनी मामी को दरवाज़े पर खड़ा पाया. और फिर उन्होनें ही मुझको देखकर अन्दर आने का इशारा किया. और फिर मैं बिना कुछ सोचे समझे उनके घर में दाखिल हो गया था. मामी उस समय बहुत खुश नज़र आ रही थी, इसलिये वह झट से जाकर मेरे लिए चाय बनाकर ले आई थी. और फिर हम दोनों चाय के साथ इधर-उधर की बातें करने लग गए थे. और फिर बातों ही बातों में मैंने उनसे पूछा कि, आपकी शादी को तो 3 साल हो गए है और अभी तक आपको कोई बच्चा नहीं है? तो फिर वह मेरी बात को टाल गई थी, और वह मुझसे कहने लगी कि, यह तो ऊपर वाले की मर्ज़ी है इंसान इसमें क्या कर सकता है।

और फिर मैंने भी उस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. और फिर वहाँ से जाते-जाते उन्होनें मुझको अपना फोन नंबर दे दिया और कहा कि, सरफराज अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं तुमको फोन कर लिया करूँगी, क्योंकि तुम्हारे मामा तो सुबह के गए देर रात को ही घर वापस आते है, और उनके पीछे से मैं घर में अकेली परेशान हो जाती हूँ. तो फिर मैंने भी उनको कहा कि, आपका जब भी जी चाहे मुझको फोन कर लिया करना. खैर फिर उस दिन के बाद 3-4 दिन तक जब मैं अपने क्लिनिक पर कुछ ज्यादा ही मसरूफ़ था, तो अचानक से उनका फोन आया और फिर तो यह सिलसिला चल निकला था. अब तो वह मुझको अपना एक बहुत ही अच्छा दोस्त समझती थी, और वह काफ़ी-काफ़ी देर तक मुझसे फ़ोन पर बातें करती रहती थी. वैसे तो वह मेरी मामी थी पर उम्र में वह मुझसे भी 2 साल छोटी थी. फोन पर बातों का सिलसला बढ़ते-बढ़ते मिनटों से घन्टों तक चला गया था। और फिर एक दिन उन्होनें मुझसे कहा कि, सरफराज कल रविवार है और तुम्हारे मामा भी सुबह जल्दी ही अपने ऑफिस के काम से हैदराबाद जा रहे है, इसलिये क्यों ना तुम भी सुबह जल्दी ही हमारे घर पर आ जाओ और फिर हम दोनों सारा दिन बैठकर खूब सारी बातें करेगें. और फिर अगले दिन मैं भी घर पर बताए बगैर ही उनके घर पर चला गया था, उस समय हल्की-हल्की सर्दी के दिन थे. मैंने सुबह-सुबह ही उनके घर के दरवाजे की घन्टी बजा दी थी. और फिर थोड़ी देर के बाद उन्होनें दरवाज़ा खोला तो मैं तो बस उनको देखता ही रह गया था. क्योंकि वह उस समय बला की खूबसूरत लग रही थी. वह बिल्कुल किसी जन्नत की परी की तरह लग रही थी. उन्होनें उस समय एक हल्के गुलाबी रंग का जॉगिंग सूट पहन रखा था, और मैं उनको बिना अपनी पलकें झपकाए ही देखें ही जा रहा था. और फिर अचानक से मुझको होश आया तो वह मुझसे कह रही थी कि, अन्दर भी आओगे या मुझको वहीँ से घूरते रहोगे?

और फिर मैं शरमाकर अन्दर चला गया था. और फिर उन्होनें मुझको नाश्ता करवाया और फिर हम दोनों बैठक में एक ही सोफे पर बैठकर टी.वी. देखने लग गए थे. और साथ ही बातें करते-करते एकबार फिर से हमारी बात बच्चों पर आ गई थी. और मैंने फिर बातों ही बातों में उनसे पूछा कि, आप अच्छी खबर कब सुना रही हो? और फिर मेरी उस बात पर वह अचानक से उदास हो गई थी, और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, देख आज हम दोनों एक-दूसरे से एकदम सच बोलेगें और एक-दूसरे से करी गई हर बात हमारे बीच में राज़ ही रहेगी. और फिर मैंने भी उनसे वादा किया. और फिर उन्होनें बताना शुरू किया कि, तुम्हारे मामा के लंड पर बचपन में चोट लगी थी और वह अब बिल्कुल ही बेकार हो चुका है और मैं अभी तक एकदम कुँवारी ही हूँ. और फिर उनके मुहँ से यह बात सुनकर मैं बहुत हैरान हुआ था, और उनकी बात को सुनकर मुझको थोड़ी हँसी भी आ गई थी. जिसके कारण उनको मुझपर गुस्सा आ गया था, और फिर वह मुझसे कहने लगी कि, हमने एक-दूसरे को वादा किया था ना कि, हम लोग आपस में झूँठ नहीं बोलेगें, और फिर वह रोने लग गई थी. और फिर जैसे ही मैं उनको चुप करवाने के लिये आगे हुआ तो वह मेरे कन्धे पर अपना सिर रखकर फूट-फूटकर रोने लग गई थी. और फिर हमको अहसास भी नहीं हुआ और हम उस माहोल में एक-दूसरे के बहुत ही करीब आ गए थे. और फिर आहिस्ता-आहिस्ता मेरे अन्दर का शैतान जागने लगा और मैं उनके सिर पर अपना हाथ फेरते हुए उनकी कमर तक ले गया था. और फिर उनको भी शायद कुछ महसूस हुआ और वह मेरे और भी क़रीब हो गई थी. और फिर मैंने मन ही मन सोचा कि, यह सब ग़लत है और फिर मैंने पीछे हटना चाहा लेकिन उन्होनें मुझको और भी कसकर पकड़ लिया था और फिर मैं उनकी बाहों की कैद में था. और अब उनकी गर्म साँसें मेरे सीने से टकरा रही थी जिससे मुझपर अब नशा सा चढ़ना शुरू हो गया था और मैंने उनको कहा कि मामी, तो फिर उन्होनें मेरे होठों पर अपना हाथ रख दिया था और फिर उन्होनें मुझको कहा कि, मुझको तुम सिर्फ़ नाज़ ही कहो मामी नहीं, और साथ ही उन्होनें एक शायरी भी सुनाई जो कुछ इस तरह से है…

अपने अहसास से छूकर मुझे सन्दल कर दो,

मैं तो सदियों से अधूरी हूँ मुझको तुम मुकम्मल कर दो !

ना तुमको होश रहे आज और ना मुझको होश रहे,

इस तरह टूट कर चाहो आज कि, मुझे पागल कर दो !!

धूप ही धूप हूँ मैं इस तरह टूट के बरसो तुम मुझ पर,

मैं तो सहरा हूँ मुझे प्यार का बादल कर दो !!

और फिर हम एक-दूसरे में खो से गए थे और वह मुझको खींचती हुई अपने बेडरूम में ले गई थी. और मैं भी एक कटी पतंग की तरह उनके पीछे-पीछे चला गया था. और फिर वहाँ पहुँचकर हम पागलों की तरह एक-दूसरे को किस कर रहे थे. और फिर उन्होनें मेरी शर्ट उतार दी थी और फिर वह अपने होठों और ज़ुबान से मेरे सीने को चूमने और चाटने लग गई थी. दोस्तों मुझपर भी सेक्स का नशा छाया हुआ था तो मैंने भी उनको बेड पर धकेला और फिर मैंने उनके जॉगिंग सूट की चेन खोल दी थी. और फिर उसके अन्दर काले रंग की ब्रा में वह बहुत ही कमाल की लग रही थी. और फिर मैंने उसकी ब्रा को भी उतार दिया था उसके इतने खूबसूरत बब्स और उनके गुलाबी रंग के निप्पल थे जिनको देखकर तो मैं और भी पागल सा हो गया था. और फिर मैं उनको अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गया था. और मेरे ऐसा करने से नाज़ की आँखें बन्द हो गई थी और वह बड़े ही प्यार से हल्की-हल्की सी सिसकियाँ ले रही थी. और फिर मैं उसको किस करते और चूमते हुए आहिस्ता-आहिस्ता नीचे आने लगा. और फिर मैंने उनके जॉगिंग सूट का पजामा आहिस्ता से उतारा तो उफ्फ्फ… क्या खूबसूरत एकदम साफ़ बिना बालों वाली एकदम गुलाबी होठों वाली चूत थी उनकी. और फिर मैंने उनका पजामा नीचे किया पर वह उनके जूतों में फँस गया था. और फिर मैंने नीचे होकर उनके जूतों के फीते खोले और फिर मैंने उनको भी उतार दिया था. उनके जूतों में से उनके पसीने की हल्की-हल्की सी महक आ रही थी जिसे सूंघकर मेरा लंड और भी टाइट हो गया था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर मैंने उनके पैरों पर किस करते हुए उनके मोज़े भी उतार दिये थे. दोस्तों कसम से बहुत ही खूबसूरत पाँव और ऊँगलियाँ थी उनकी. और फिर मैं उनके पाँव और ऊंगलियों को अपनी ज़ुबान से चाटने और चूसने लग गया था जिससे वह और भी बेताब होने लग गई थी. और फिर काफ़ी देर तक उनके पैरों को किस और चूमने के बाद मैं उनकी कमाल की खूबसूरत चूत पर आ गया था. और अब मैं उसको भी अपनी ज़ुबान से चाटने और चूसने लग गया था. और मेरे ऐसा करने से अब तो वह इतनी बेताब हो गई थी कि, मेरी जिस्म पर वह अपने दाँतों और नाखूनों को चुभाने लग गई थी. और उसकी चूत से अब पानी भी निकल रहा था और मैं उसको चाटता जा रहा था. और फिर अब उनसे बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं हो सका और वह भी मेरे लंड को पकडकर के चूसने लगी जिससे मुझको भी बहुत मज़ा आने लगा था. और फिर उसने मुझको कहा कि, सरफराज अब आ भी जाओ प्लीज़ अब मुझसे और इन्तजार नहीं हो रहा है. और फिर मैंने उसको सीधा करके बेड पर लेटाया और फिर मैंने उसकी दोनों टाँगों को अपने कन्धों पर रखी और फिर आहिस्ता से अपना लंड उसकी चूत के मुहँ पर रखकर अन्दर दबाया, लेकिन उसकी चूत वाक़ई में बहुत टाइट थी. और फिर मैंने भी हल्का सा अपने लंड पर थूँक लगाया और फिर से अपना लंड उसकी चूत पर रखने के साथ ही एक जोर का झटका मारा जिससे उसकी एक जोर की चीख उस कमरे में गूँज गई थी और नाज़ की आँखों से आँसूं निकल आए थे, और मेरा लंड भी अब उसकी चूत में पूरा ही अन्दर जा चुका था. और फिर मैं थोड़ी देर तक वैसे ही रुक गया था और मैं नाज़ के होठों को चूमने लग गया था. और फिर मैंने अपने लंड को थोड़ा हिलाया तो मुझको नाज़ की सच्चाई पर यक़ीन हो गया था क्योंकि मेरे लंड पर उसकी चूत का खून लगा हुआ था. और फिर मैंने दुबारा अपना लंड उसकी चूत के अन्दर डाला तो अबकी बार उसका दर्द कुछ कम हो चुका था और उसको भी अब मज़ा आने लग गया था। और फिर थोड़ी ही देर में वह झड़ गई थी. और फिर मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने उसकी चूत में से अपना लंड बाहर निकालना चाहा तो उसने मुझको जोर से कसकर पकड़ लिया था. और फिर उसने मुझको कहा कि, सरफराज प्लीज़ तुमको मेरी कसम है, तुम मेरी चूत के अन्दर ही झड़ जाओ।

और फिर आख़िर में कुछ ही देर में मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया था और हम दोनों उसी हालत में एक-दूसरे की बाहों में गिर गए थे. और फिर उस दिन हमने शाम होने तक 5 दफ़ा सेक्स किया था. और फिर शाम को हम दोनों साथ में बाथरूम में नहाए और फिर हमने मिलकर खाना भी खाया था. और फिर उनसे मिलते रहने के वादे के साथ मैं वहाँ से चला आया था। दोस्तों वह दिन मेरी जिन्दगी का सबसे यादगार और सबसे खूबसूरत दिन था जिसको मैं आज तक कभी भी भुला नहीं पाया हूँ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!