ठरकी बाप ने किया मुझको जवान

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम प्रीती है मेरी उम्र 21 साल की है और मैं कॉलेज में बी.ए. के दूसरे साल में पढ़ती हूँ मेरी सहेलियाँ मुझसे अक्सर मेरे सामने औरत और मर्द के रिश्तों की बात करती थी, मैं फिर भी बेख़बर थी और जानती ही नहीं थी कि, क्यों मैं ऐसा महसूस करती हूँ और क्या कारण है कि, मैं सब लड़कियों के बब्स को और सब लड़कों की पेन्ट के उस उभरे हुए हिस्से को इतने लालच से और इतनी गौर से देखती हूँ. अब मैं आप सभी को मेरे जीवन की उस घटना के बारे में बताने जा रही हूँ जिसने मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी है।

यह बात आज से 3 साल पहले की है। उस दिन जब मेरे पापा लखनऊ से आए थे और उन्होनें आते ही मुझे पुकारा और मैं भागी-भागी उनके पास गई और बोली कि, हांजी पापा! तो फिर पापा बोले कि, अरे! बेटा तुम मुझसे इतनी दूर क्यों खड़ी हो यहाँ पर आ देख मैं तेरे लिए क्या लाया हूँ? और फिर मैं उनके पास में आकर पापा की कुर्सी के पास में खड़ी हो गई थी. पापा ने मुझे एक पैकेट दिया जिसमे दो बहुत ही सुन्दर सी बनारसी साड़ियाँ थी, और फिर उन्होनें मुझको एक और पैकेट दिया जिसमें शायद मेकअप का सामान था? और फिर मैं तो उनको पाकर जैसे खुशी से झूम उठी थी. कैसा लगा? और फिर यह कहकर पापा ने मेरे गोल-गोल कूल्हों पर अपने हाथ रख दिए और फिर वह उनको सहलाते हुए मुझसे बोले कि, इनके बारे में अपनी मम्मी से कुछ मत कहना नहीं तो वह अभी जल मरेगी. और फिर मैंने चुपचाप अपनी गर्दन हाँ करते हुए हिलाई लेकिन मेरा सारा ध्यान तो उस प्यार से सहलाते हुए उनके हाथ पर ही था।

और फिर तभी मम्मी की आवाज़ आई और पापा ने एकदम से अपना हाथ मेरे कूल्हों से दूर खींच लिया था. और मैं भी वह पैकेट लेकर वहाँ से भाग खड़ी हुई थी. अपने कमरे में आकर भी मेरे बदन पर पापा का वह प्यारा सा स्पर्श मुझे महसूस हो रहा था, और फिर ठीक उसी रात एक बहुत ही प्यारा सा हादसा मेरे साथ हुआ और तब हम लोग सब छत पर सो रहे थे. असल में हम लोग एक मध्यम वर्गीय परिवार से है और हमारा घर भी ज़्यादा बड़ा नहीं है इसलिए अक्सर गर्मी के कारण हम अक्सर ऊपर छत पर ही सो जाया करते थे. जुलाई का महीना था, सब लोग खाना खाकर सो गये थे लेकिन पता नहीं क्यों मेरी आँखों से तो जैसे नींद कहीं गायब थी, मेरे दिमाग़ में तो रह-रहकर वह अजीब सी गुदगुदी जो मुझे पिताजी के सहलाने से हुई थी गूँज रही थी. तभी मेरी मम्मी जो कि, मेरी बराबर में ही लेटी हुई थी वह धीरे से फुसफुसाई प्रीती बेटा, और फिर मैंने सोचा कि, यह ज़रूर मुझसे पानी-वानी मंगवाएगी. और फिर मैं तो एकदम चुप-चाप ही लेटी रही. और फिर मम्मी ने मुझको एक आवाज़ और लगाई और फिर वह उठकर बैठ गई थी. मैं फिर भी चुप-चाप लेटी रही. और फिर तभी मम्मी उठकर पिताजी के बिस्तर की तरफ चली गई थी।

और फिर मैंने सोचा कि, मम्मी वहाँ पर क्यों गई है? लेकिन फिर मम्मी तो पापा के पास पहुँचते ही उनसे किसी भूखे भेड़िये की तरह लिपट गई थी. और फिर वह नजारा देखते ही मेरा तो अंग-अंग ही झंझना उठा था. और फिर तभी पापा की भी आवाज़ आई और उन्होनें मम्मी से कहा कि, इतनी देर क्यों लगा दी? तो फिर मम्मी बोली कि, तुम तो कुछ भी नहीं समझते हो एक तरफ तो घर में जवान बेटी है और दूसरी तरफ तुम्हारी भूख है कि, जो उम्र के साथ बढ़ती ही जा रही है और फिर पापा बिना कुछ बोले ही मम्मी के बड़े-बड़े बब्स को दबाने लग गए थे.

और मैं चुप-चाप हड़बड़ाई सी पड़े हुए उनको देखने लगी थी. चाँदनी रात में मैं तो उनको एकदम साफ़ देख पा रही थी लेकिन मुझे नहीं पता था कि, उनको भी मेरी खुली हुई आँखें दिख भी रही थी या नहीं? पापा मम्मी के गोल-गोल बब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहे थे. और फिर मम्मी के चेहरे के भाव भी जैसे बदल से गए थे, और फिर मम्मी पापा के पजामे के ऊपर से ही पापा के लंड को सहला रही थी. और मुझको तो जैसे वह सब कुछ बर्दाश्त के बाहर लग रहा था और फिर पता नहीं क्यों मेरा हाथ भी मेरी सलवार के अन्दर सरक गया था. और फिर मैं अपनी चूत को धीरे-धीरे मसलने लग गई थी. हाय… क्या गजब का अहसास हो रहा था उस समय मुझको कसम से. और उधर फिर पापा ने मम्मी का ब्लाउज खोलकर अलग कर दिया था, और मम्मी भी पापा के लंड को उनके पजामे का नाडा खोलकर बाहर निकाल चुकी थी. और फिर तभी अचानक से मम्मी झुकी और पापा के लंड को अपने मुँह में लेकर किसी लोलीपॉप की तरह चूसने लग गई थी. और इधर मेरे हाथ की रगड़न भी मेरी चूत पर बढ़ती ही जा रही थी. और फिर अचानक से पापा मम्मी से बोले कि, ज़रा नीचे आ जाओ. और फिर मम्मी चुप-चाप नीचे लेट गई थी, और पापा उनके ऊपर आ गये थे. और फिर पापा ने मम्मी के होठों पर एक जबरदस्त किस लिया और फिर वह उनके ऊपर ही लेट गये थे. और फिर तभी पापा ने मम्मी की साड़ी को उनके पेट तक सरका दिया था, और फिर उन्होनें अपना लंड मम्मी की चूत पर सेट किया और फिर उन्होनें अपना लंड मम्मी की चूत में सरका दिया था. और उस समय मेरी तो जैसे सिसकार सी निकल गई थी. और फिर पापा के लंड के मम्मी की चूत में घुसते ही मम्मी भी कराहने सी लग गई थी. और फिर पापा धीरे-धीरे मम्मी की चूत में अपने लंड से झटके मारने लग गए थे. और उस नज़ारे को देखकर मैं तो जैसे पागल सी ही हो गई थी. और फिर पापा जो कि, पहले मम्मी की चूत में धीरे-धीरे झटके मार रहे थे वह अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लग गए थे. और फिर मम्मी ने भी अपनी दोनों टाँगों को पापा के बदन से लपेट लिया था. और फिर कुछ देर के बाद मम्मी ने उनको ज़ोर से अपनी तरफ भींच लिया था. और फिर धीरे-धीरे जैसे उनका शरीर ठंडा सा पड़ने लगा था. और फिर वह बिल्कुल बेजान सी होकर लेट गई थी. लेकिन पापा अभी भी उसी जोश से लगे हुए थे और फिर तभी मम्मी पापा से बोली कि, अब तो बस करो! अब क्या तुम मेरी जान ही निकालोगे?

और फिर पापा मम्मी से बोले कि, तू तो अब बूढी हो गई है, अगर मेरे सामने कोई 19 साल की जवान लड़की भी आ जाए तो मैं तो उसको भी नानी याद दिला दूँ. और फिर पापा की बात को सुनकर मेरे दिमाग़ में सीटियाँ सी बजने लगी, और फिर मैं सोचने लगी कि, मैं भी तो जवान ही हूँ. और हाँ एक बात और दोस्तों, जब पापा मम्मी से यह बात बोल रहे थे तो मुझे लगा कि, शायद वह मेरी ही तरफ देख रहे थे. और मैं तो उत्तेजना में आकर धीमी-धीमी आवाज में इस्सस… आहहह… कर रही थी और मेरे हाथ की ऊँगली मेरी चूत में सरक चुकी थी. और मैं हवस से भरी हुई अपनी नज़रों से अपने मस्त हो रहे पापा की तरफ देखकर ज़ोर-ज़ोर से अपनी ऊँगली को अपनी चूत के अन्दर-बाहर करने लग गई थी कि, तभी पापा जी मम्मी से बोले कि, बस प्रीती की मम्मी थोड़ी देर और बर्दाश्त कर ले और फिर मैं भी झड़ने ही वाला हूँ. और फिर यह सुनकर तो मैं और ज़ोर-ज़ोर से अपनी ऊँगली को अपनी चूत में चलाने लगी थी. और फिर तभी पापा जी जैसे अकड़ से गये थे और उन्होनें मम्मी को जोर से अपनी बाहों में भींच लिया था. और इधर मुझे भी ऐसा लगा कि, जैसे मेरा तो मूत ही निकल जाएगा और मैं अपनी ऊँगली को चाहकर भी ना रोक पाई और फिर अचनाक से मैंने देखा कि, पापा के मुहँ से एक ज़ोर की आहहह… निकली. और इधर मेरी चूत भी अपना पानी छोड़ चुकी थी मैं और पापा एक साथ ही झड़े थे और यह सोचकर मैं तो बहुत खुश थी. और फिर पापा ने मम्मी को फिर से एक बार ज़ोर से चूमा और फिर वह मम्मी से अलग होकर लेट गये थे. और फिर मैंने भी अपना हाथ अपनी सलवार से निकाला और फिर मैंने भी चुपचाप अपनी आँखे बन्द कर ली थी. और फिर मैंने मम्मी के उठने की आवाज़ सुनी और वह पापा की चारपाई से उठकर फिर से मेरे पास ही आकर लेट गई थी. उस रात को तो दोस्तों मुझको भी ऐसी नींद आई कि, मुझे अपना भी होश नहीं रहा था. और फिर अगली सुबह मम्मी ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से हिलाकर उठाया, प्रीती उठ घर का काम नहीं करना है क्या, रात को भांग खा के सोई थी क्या? और फिर मैं उठकर जब बाथरूम में गई तो वहाँ पर मैंने अपनी सलवार की तरफ देखा तो उसपर एक बड़ा सा निशान बन चुका था. मेरे अन्दर तो एक गुदगुदी सी दौड़ गई. और फिर मैंने चुप-चाप दूसरे कपड़े निकाले और उनको लेकर नहाने के लिए चली गई थी, लेकिन रात की बात मुझे जैसे कचोट रही थी।

और फिर जब मैं नहाकर बाथरूम से बाहर निकली तो पापा बाहर ही खड़े थे, और फिर उनको वहाँ देखकर मैं तो जैसे सकपका गई थी. और फिर पापा मेरे पास आए और वह मुझसे बोले कि, अरे! बेटा आज तो तू बड़ी जल्दी नहा ली? तो फिर मैंने उनको जवाब दिया कि, हाँ पापा आज गर्मी बहुत है. तो फिर पापा मुझसे बोले कि, हाँ बेटा जवानी में तो गर्मी कुछ ज़्यादा ही लगती है और फिर यह कहकर उन्होनें अपना एक हाथ मेरे गाल पर रख दिया, और वह अपने दूसरे हाथ को बड़ी बेख़बरी के साथ मेरे बब्स पर टिकाकर उनको सहलाने लग गए थे. मैं तो उस अहसास से ही जैसे मस्त सी हो गई थी, और तभी जैसे कुछ आहट सी हुई और पापा मुझसे अलग हो गये थे. और फिर मैं भी अपने कमरे की तरफ चल दी थी. और फिर तभी मम्मी किचन से बाहर आई और वह मुझे देखते हुए और चिढ़ाते हुए बोली कि, शाबाश बेटा अगर तू रोज जल्दी नहा ले तो तू कहीं अच्छी बच्ची ना बन जाए. और फिर मैं चुप-चाप अपने कमरे में चली गई थी. उस समय मुझे मेरी मम्मी मेरी सबसे बड़ी दुश्मन लग रही थी. मेरा मन तो जैसे हर समय पापा के पास जाने को ही मचलता रहता था. और फिर वो दिन भी आया जिसका मुझे बड़ी बेसब्री से इन्तजार था. और फिर करीब दस दिन के बाद मेरी मम्मी के गाँव से फ़ोन आया कि, एक हफ्ते के बाद मेरे मामाजी के लड़के की शादी है, तो मम्मी तो उस खबर से बहुत खुश हुई थी. और फिर वह मुझसे बोली कि, बेटा मैं तो मामा के यहाँ कल ही चली जाऊँगी और तू पापा के साथ शादी से दो दिन पहले पहुँच जाना, मैं तो तुझे भी अभी अपने साथ ले चलती लेकिन पीछे से तेरे पापा का खाना कौन बनाएगा. मम्मी ने उसी रात अपना जाने का सारा सामान जमा लिया था क्योंकि सुबह जल्दी ही मम्मी की ट्रेन थी. और फिर अगले दिन सुबह ही मम्मी ने मुझे जगाया और वह मुझसे बोली कि, बेटा मैं जा रही हूँ और तू अपना और अपने पापा का ख्याल रखना और मम्मी ने मुझे कुछ रुपये भी दिए, और फिर वह यह कहकर पापा के साथ निकल गई थी।

और फिर मैं घर पर अकेली ही हूँ यह सोचकर तो जैसे मेरे सारे बदन में आग सी लगी हुई थी. और फिर मैंने मन ही मन सोच लिया था कि, आज तो मैं कुछ करके ही मानूँगी. और फिर मैं उठी और नहाकर तैयार हो गई और तभी पापा का फोन आया, और उन्होनें मुझको कहा कि, बेटा प्रीती मैं रेल्वे स्टेशन से ही अपने काम पर जा रहा हूँ और मैं शाम को जल्दी आ जाऊँगा. तब तक तू घर का ख्याल रखना. दोस्तों उस समय मुझको इतना गुस्सा आया वह सारा दिन मैंने कैसे गुज़रा वह मुझे ही पता है. क्योंकि मैंने इतने प्यार से पापा की लाई हुई साड़ी पहनी थी लेकिन गुस्से मैं आकर मैंने वह साड़ी भी उतारकर फैंक दी थी. और मैं पेटीकोट और ब्लाउज में आ गई थी. मेरा दिमाग़ तो जैसे खराब ही हो चुका था और फिर मैं जाकर अपने बिस्तर पर लेट गई थी, और फिर पता नहीं कब मुझको नींद भी आ गई थी।

और फिर रात को दरवाजे की घन्टी की आवाज़ से मेरी नींद खुली और फिर मैंने देखा कि, 8 बज चुके है और फिर मैं उठी और जाकर दरवाजा खोला तो देखा कि, पापा आ गए थे. और फिर पापा ने मेरी तरफ प्यार से देखा और फिर वह मुझसे बोले कि, क्या बात है तुमने साड़ी नहीं पहनी? और फिर मुझे होश आया और मैं अन्दर की तरफ भागकर छुप गई थी. और फिर पापा मुझसे बोले कि, अरे!! शर्मा क्यों रही है, मैं तो तेरा बाप हूँ तुझे तब से देखता आ रहा हूँ जब से तू नंगी ही सारे घर में घूमती थी. और फिर मैं धीरे से उनसे बोली कि, खाना लगा दूँ? तो फिर पापा बोले कि, नहीं मैं तो खाकर आया हूँ, तू तो बिस्तर लगा दे मैं आराम करना चाहता हूँ. तो फिर मैं बोली कि, जी अच्छा. और फिर मैं खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई थी. तो फिर पापा मुझसे बोले कि, क्या हुआ? और वह मेरे पास आकर खड़े हो गये थे। और फिर मैंने खिड़की की तरफ मुँह कर लिया और झुककर बाहर देखते हुए उनसे बोली कि, पापा! बाहर तो बादल से हो रहे है लगता है कि, बारिश होगी. और फिर पापा मेरे करीब आ गये और उन्होने मेरे कूल्हों पर अपना हाथ रख दिया था. और फिर वह मुझसे बोले कि, हाँ लगता तो है कि, आज जमकर बारिश होगी! और फिर इतना कहकर पापा मेरे कूल्हों को धीरे-धीरे दबाने लग गए थे. और फिर मैं तो जैसे सारे दिन का गुस्सा भूलकर एकदम मदमस्त सी हो गई थी. और तभी पापा ने मेरे दोनों कूल्हों के बीच में अपना हाथ रखते हुए अपनी एक ऊँगली ठीक मेरी गांड के छेद पर दबाई तो मेरे तो सारे बदन में एक आग सी दौड़ गई थी।

और फिर पापा मेरे कूल्हों पर अपना हाथ फेरते हुए बोले कि, बेटा तेरी मम्मी कहती है कि, तू अब जवान हो गई है और तेरे लिए मैं एक लड़का देख लूँ. इसलिये आज मैं भी देखूँगा कि, तू कितनी जवान हो गई है? और फिर यह कहकर उन्होनें मेरे ब्लाउज के ऊपर की खुली हुई पीठ पर धीरे से एक किस किया, और फिर वह मुझे छोड़कर दूसरे कमरे की तरफ बढ़ गये. और फिर मैं भी आकर उनके बिस्तर को लगाने लगी, और फिर मैं जैसे ही दूसरा बिस्तर लगा ही रही थी कि, पापा आ गये और वह मुझसे बोले कि, अरे! यह दूसरा बिस्तर किसके लिए? तू जब छोटी थी तो मेरे ही पास सोती थी, क्या आज तुझको अपने पापा के साथ सोने में डर लग रहा है? और फिर मैंने भी चुप-चाप अपने बिस्तर को समेटकर रख दिया. और फिर पापा मुझसे बोले कि, बेटा तू लेट जा मैं अभी ज़रा हाथ मुहँ धोकर आता हूँ? और फिर मैं अकेली ही बेड पर लेट गई और फिर मैंने मन ही मन सोचा कि, आज तो ज़रूर कुछ करना है. और फिर यह सोचकर मैंने अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन खोल लिए, और अपना पेटीकोट भी अपने घुटनों तक चढ़ाकर लेट गई थी. और फिर तभी पापा कमरे में आए और फिर वह मुझे देखकर मुस्कुराए, मैं उनकी आँखों में आ रही चमक को साफ़ देख सकती थी. और फिर वह मेरे पास आकर बैठ गये थे, और फिर वह मुझसे बोले कि, बेटा! ज़रा ऊपर को सरको।

और फिर मैं जानबूझकर अपने पैरों को मोड़कर उठी, मेरा पेटीकोट ऊपर था इसलिए शायद पापा को मेरी मदमस्त चूत की एक झलक तो मिल ही गई होगी. और फिर तभी पापा ने अपना हाथ मेरी टाँगों पर रख दिया, और फिर वह मुझसे बोले कि, प्रीती तू तो सच में काफ़ी बड़ी हो गई है. और फिर मैंने शरम से अपनी आँखें बंद कर ली थी. और फिर पापा ने धीरे-धीरे मेरी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया था. और उनके ऐसा करने से मैं तो जैसे एकदम मस्त सी हो गई थी. और फिर मेरी जाँघों को सहलाते-सहलाते ही पापा ने अपना हाथ मेरी चूत की तरफ बढ़ा दिया था. दोस्तों मेरी मस्त जाँघों को देखकर वह भी एकदम मस्त से लग रहे थे. और फिर तभी पापा ने अपना एक हाथ बढ़ाकर मेरी चूत के ऊपर रख दिया, जिससे मुझे ज़ोर से करंट सा लगा था. और फिर पापा मेरी चूत को धीरे-धीरे सहलाने लगे. मैंने भी अपनी आँखें बन्द कर ली थी. और फिर तभी पापा ने मेरे पेटीकोट का नाडा खोल दिया था, और फिर उन्होनें मेरे पेटीकोट को नीचे से सरकाकर मेरे बदन से अलग कर दिया था. दोस्तों अब मैं नीचे से बिल्कुल नंगी अपने पापा के सामने थी. और फिर पापा मुझसे बोले कि, प्रीती अपनी आँखें खोल. और फिर मैंने अपनी आँखें खोली और फिर अपने पापा की तरफ देखा तो पापा ने झुककर मेरे होठों को चूम लिया था. और फिर पापा ने मेरे ब्लाउज को भी खोलना शुरू किया और फिर उसे भी उतारने के बाद तो जैसे वह पागल से हो गये थे. और फिर तो वह मुझे पागलों की तरह चूमने लगे थे, और फिर उन्होनें मेरे बब्स को अपने हाथों में भर लिया था और फिर वह उनको ज़ोर-ज़ोर से दबाने लग गए थे. उनके ऐसा करने से मुझको दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था. और तभी पापा नीचे की और सरके और उन्होनें मेरी चूत पर अपने होंठ रख दिए थे. पहले तो धीरे-धीरे और फिर तेज-तेज वह मेरी चूत को चूसने लगे. और फिर मैंने भी धीरे से अपनी टाँगें चौड़ी कर ली थी और मस्ती के मारे अपनी आँखे बन्द कर ली थी. और फिर तभी पापा उठे और फिर वह मुझसे बोले कि, प्रीती ज़रा उठ जा. तो फिर मैं उठकर बैठ गई थी. और फिर पापा मुझसे बोले कि, ले ज़रा इसे सहला दे. और फिर मैंने अपने हाथों से पापा का लंड सहलाना शुरू कर दिया था. और फिर पापा ने अपने पजामे का नाडा खोल दिया था और फिर उन्होनें पजामे के साथ ही अपने अंडरवियर को भी उतार दिया था. दोस्तों अब मेरे सामने कम से कम 7” का तना हुआ लंड था. और फिर उसको देखकर मैं मन ही मन सोचने लगी कि, क्या अपनी मम्मी की तरह मैं भी इसे अपनी चूत के अन्दर ले पाऊँगी? और फिर तभी पापा बोले कि, बेटा प्रीती! इसे थोड़ा सा चूस दे ना।

दोस्तों मैं तो चाहती ही यही थी, और फिर मैंने अपने पापा के उस प्यारे से लंड को अपने मुहँ में बड़े ही प्यार से भर लिया था. और फिर मैं धीरे-धीरे आइसक्रीम की तरह उसको चूसने लगी थी, और मेरे ऐसा करने से पापा के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी. और फिर तभी पापा मुझसे बोले कि, बेटा और ज़ोर-ज़ोर से चूस, इसको अपने मुहँ में पूरा अन्दर तक ले ले. दोस्तों मैं कोशिश करने के बाद भी उसे सिर्फ़ 4-5 इंच ही अपने मुहँ के अन्दर ले पा रही थी. और फिर मेरा मुहँ दर्द करने लगा तो मैंने अपने पापा की तरफ देखा तो फिर पापा मुझसे बोले कि, चल अब तू लेट जा बेटा. और फिर मैं लेट गई, और फिर वह भी मेरे बगल में अपनी बनियान उतारकर लेट गये थे. और फिर उनका नंगा बदन जैसे ही मेरे नंगे बदन से टकराया तो मैं तो जैसे काँप उठी थी. और फिर पापा ने पहले तो मेरे बब्स को को बारी-बारी से चूसा, और फिर वह मेरे होठों को भी चूसने लगे. और फिर अचानक से ही पापा मेरे ऊपर आकर लेट गये थे. और फिर वह अपने लंड को मेरी चूत के मुहँ पर सेट करने लग गए थे. और फिर उनके उस अचानक से हुए हमले की वजह से मैं डर गई थी, और फिर मैं उनसे बोली कि, पापा यह तो काफ़ी बड़ा है? तो फिर पापा मुझसे बोले कि, अरे! मेरा बच्चा तू रुक मैं अभी आया। और फिर वह मुझसे यह कहकर उठकर पास वाले कमरे में गये और फिर जब वह वहाँ से वापस आए तो उनके हाथ में एक तेल की शीशी थी, और फिर वह उस तेल को पहले मेरी चूत पर लगाकर मसलने लगे और फिर उन्होनें अपनी एक ऊँगली भी मेरी चूत के अन्दर सरका दी थी, पहले एक, और फिर दो ऊँगलियों को वह मेरी चूत में अन्दर-बाहर करने लगे थे. और मैं तो उस अहसास से जैसे पागल सी हो गई थी. और फिर तभी पापा ने मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख लिया और फिर वह मुझसे बोले कि, बेटा ले जरा इसपर भी तेल लगा दे।

और फिर मैं भी उनके रोड जैसे सख़्त लंड पर तेल लगाने लगी थी. और फिर करीब 5-7 मिनट के बाद पापा फिर से मेरे ऊपर आ गये थे और उन्होनें फिर से अपने लंड को मेरी चूत के मुहँ से लगाया, और फिर धीरे से उन्होनें मेरी चूत में अपना लंड सरका दिया था और उस पल मैं तो इतनी हैरान थी कि, इतना बड़ा लंड इतने प्यार से मेरी चूत में घुसा जा रहा है. और फिर पापा ने मेरी चूत में धक्के मारने शुरु किए. पहले तो धीरे और फिर तेज. मेरी तो जैसे अब जान ही निकल गई थी, पापा ने अपने धक्कों की स्पीड थोड़ी और बढ़ा दी थी. और फिर कुछ ही देर के बाद मैं भी मस्त होकर पापा से चिपक गई थी. और फिर करीब 30 मिनट के बाद मैं और पापा एक साथ ही झड़ गए थे. और पापा के गरम गरम माल ने मेरी चूत को भरकर रख दिया था. और उसके बाद मैं तो जैसे बेहोश सी हो गई थी. झड़ते समय तो मुझको ऐसा लग रहा था कि, जैसे चूत से पानी नहीं मेरी जान निकल रही थी. दोस्तों उस रात को पापा ने मुझे पता नहीं कितने तरीकों से चोदा था, और मैंने भी उनका भरपूर साथ दिया था. और फिर अगले दिन पापा ने उनके काम पर से छुट्टी ले ली थी. और उन्होनें फिर से मेरी जमकर चुदाई करी थी. दोस्तों मम्मी के आने तक तो लगभग रोज़ ये सिलसिला चलता रहा. और फिर मम्मी आ गई तो भी मौका मिलते ही हम एक-दूसरे को पूरा-पूरा सुख देते रहे थे।

दोस्तों अब मेरी शादी हो गई है और मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूँ मेरा पति भी मुझको खुब जमकर चोदता है. और वह मेरी हर इच्छा को भी पूरा करता है।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!