सौतेली माँ ने दिया चुदाई

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna मेरा नाम प्रेम है और आज मैं आप सभी लोगों के सामने अपनी एक सच्ची और सेक्सी घटना को कामलीला डॉट कॉम के माध्यम से एक कहानी के रूप में आप सभी के लिये लेकर आया हूँ जो कि मेरी सौतेली माँ और मेरे बीच हुई चुदाई के बारे में है और मैं आशा करता हूँ कि, यह कहानी आप सबको जरूर पसन्द आएगी. कहानी लिखने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मेरा नाम तो आपको पहले ही पता चल गया होगा।

दोस्तों यह कहानी जब कि है जब मेरी उम्र 20 साल की थी और मेरी सौतेली माँ की उम्र 33 साल की थी उस समय मेरे ऊपर नई-नई जवानी चढ़ना शुरू ही हुई थी और मेरी जवानी के शोले अन्दर ही अन्दर भड़कते थे और मेरी सौतेली माँ बहुत ही सेक्सी और खूबसूरत है। और उसका फिगर बड़ा ही कमाल का है और उसके फिगर का आकार 34-30-36 का है। उनके बब्स और गांड बहुत बड़े आकार के थे और उनका वह सुडोल और गोरा बदन मुझको तो बहुत ही हसीन लगता है. दोस्तों मैं जब भी अपनी सौतेली माँ को देखता हूँ तो मुझको उनका सेक्सी गोरा बदन देखकर मन में गुदगुदी सी होती है और मैं उनको एक दो बार पूरा नंगा नहाते हुए भी देख चुका था, और मुझको ऐसा करने में बड़ा मज़ा आया था। हाँ तो दोस्तों चलिए अब बिना देर किए आपको मैं मेरी जिन्दगी की असली कहानी बताता हूँ।

दोस्तों यह बात तब की है जब मैं 12वीं में पढ़ता था और उस समय मेरी सगी माँ की दिल के दौरे से मौत हो चुकी थी और उसके बाद मेरे पापा ने दूसरी शादी कर ली थी घर की देखरेख करने के लिये. मेरा कॉलेज घर से दूर था इसलिए मैं कॉलेज के पास ही कमरा किराये पर लेकर रहता था. मेरे साथ में मेरे कमरे में रहने वाले लड़के का नाम नवीन नाम था. दोस्तों उसको सेक्स की किताबे पढ़ने की आदत थी और वह सेक्सी फिल्म भी देखा करता था. उसी वजह से मुझे भी इसकी आदत लग गई थी. और फिर एक दिन मैंने एक किताब में माँ बेटे की सेक्स की कहानी पढ़ी और उस कहानी को पढ़ने के बाद मैं भी मेरी सौतेली मम्मी के साथ सेक्स करने के लिये इतना उत्तेजित हुआ था कि मुझको 2 बार मूठ मारना पड़ा था। और फिर तो मुझको भी सेक्सी वीडियो और सेक्सी कहानियाँ पढ़ने का चस्का लग गया था. और फिर मेरी परीक्षा खत्म होने के बाद मैं छुट्टियों में अपने घर चला गया था. पिताजी ऑफिस के काम से ज्यादातर बाहर ही रहते थे। तो वह माँ को संतुष्ट नहीं कर पाते थे इस बात का मुझे पता चल गया था. एकबार मेरे पिताजी सूरत 10-15 दीनों के लिए अपने ऑफिस के काम से चले गये थे। दोस्तों उस समय मैं मन ही मन बहुत खुश था और मैं अपनी सौतेली माँ को अपनी तरफ आकर्षित करके चोदने का ख्वाब देखने लगा था. और फिर अगले दिन मैंने सुबह नींद से उठकर देखा तो माँ नहाने की तैयारी कर रही थी. और फिर माँ जैसे ही बाथरूम में गई तो मैं भी बाथरूम की साइड की खिड़की की ग्रिल पर चढ़ गया था और अन्दर का नज़ारा देखने लगा था. और फिर अन्दर का नज़ारा देखकर तो मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा था और मेरे शरीर के अन्दर एक अजीब सा करंट सा दौड़ गया था. लेकिन मुझको डर भी बहुत लग रहा था. और मैंने देखा कि, माँ ने सबसे पहले अपनी पीले रंग की साड़ी उतार दी थी. उसके बाद उन्होंने अपना काले रंग का ब्लाउज भी उतार दिया था. अब वह सिर्फ़ अपने पेटीकोट और ब्रा में ही थी. और फिर उसने सबसे पहले बाथरूम को साफ किया, उसके बाद उसने अपनी ब्रा को उतार दिया था. कसम से दोस्तों माँ के बब्स को देखकर मेरा तो लंड तनकर खड़ा हो गया था। और फिर उसने जैसे ही अपना पेटीकोट खोला तो मैं एकदम से उसकी चूत को देखकर दंग रह गया था, क्योंकि उसने उसके अन्दर पैन्टी पहनी ही नहीं थी. और फिर वह जैसे ही रगड़-रगड़कर के अपनी चूत और गांड को धो रही थी तो मैं भी उनको देखकर अपनी पेन्ट के अन्दर ही अपने लंड को रगड़ रहा था. और फिर जब माँ नहाकर के बाहर निकलने ही वाली थी तो मैं भी नीचे उतर गया था और फिर मैं अपने कमरे में चला गया था. और फिर वह अपने कपड़े पहनकर मुझको नहाने के लिए आवाज़ देने लग गई थी. और फिर मैंने झट से बाथरूम के अन्दर जाकर अन्दर से बाथरूम का दरवाजा बन्द कर दिया था और फिर मैं अपनी माँ की ब्रा को उठाकर उसको सूंघने लगा. और फिर मैंने उनका पेटीकोट भी सूंघ लिया था. और फिर मैंने उन दोनों को पहन भी लिया था. और फिर उनको पहनकर अपनी सौतेली माँ का अहसास करने का यह रोमांचकारी अनुभव था. और फिर मैंने उसमें ही मूठ मार दी थी. और फिर मैंने अपना सारा माल उनकी ब्रा पर ही छोड़ दिया था. और फिर मैं नहाकर वापस आ गया था. और फिर अगले 4-5 दिन तक यही सिलसिला चलता रहा।

और अब मेरी जिन्दगी की वह हसीन रात का आना बाकी थी. और फिर मैं एक रात को अपनी माँ को चोरी से देखने के बहाने से अपने घुटनों पर घसीटता हुआ उनके कमरे में जा पहुँचा था. और फिर वहाँ पर सामने जो नज़ारा था उसे देखकर मैं एकदम से दंग रह गया था. माँ की साड़ी नींद में उनके घुटनों तक आ गई थी और उनका पल्लू भी उनके सीने से हटकर नीचे जा चुका था जिसकी वजह से उसके बड़े-बड़े रसीले आम साफ़-साफ़ दिख रहे थे. दोस्तों मुझसे तो वह नज़ारा देखकर बिल्कुल भी सब्र ही नहीं हो रहा था. और फिर मैंने धीरे से माँ के पेटीकोट को ऊपर उठाया जो कि, उनके पैरों में फंसा हुआ था उसको मैंने हल्का सा दूर किया. और फिर मैं उनकी चूत को देखकर धीरे से उसमें अपनी ऊँगली को अन्दर-बाहर करने लगा था. और फिर शायद माँ गहरी नींद में थी तो यह देखकर मेरा हौसला और बढ़ गया था. और फिर मैंने अपनी नाक को सीधे उनकी चूत पर ले जाकर उसको सूंघने लगा. दोस्तों कसम से उसमें से क्या खुशबू आ रही थी, उसको सूंघकर मैं तो पागल सा हो गया था. और फिर मैं अपनी जीभ को बाहर निकालकर उसको चाटने लग गया था. और फिर धीरे-धीरे माँ के पैर अकड़ने लगे और उसका हाथ मेरे बालों में घूमने लगा. और अब मैं समझ गया था कि, माँ को मेरा यह सब करना अच्छा लग रहा है, पर मैं चाहता था कि, वह भी मेरा पूरा साथ दे. तो फिर मैंने उठकर हिम्मत करके आवाज़ लगाई और कहा कि, माँ, आई.लव.यू. और फिर मेरी आवाज़ को सुनकर के माँ ने अपनी आँखें खोल दी थी और फिर उसने भी मुझसे कहा कि, आई.लव.यू.टू. बेटा, मैं तो यह सब कितने दिनों से चाहती थी. तुम्हारे पिताजी बूढ़े होने की वजह से मुझे खुश नहीं कर पाते है. आजा मेरी चूत के राजा और चोद डाल तेरी रंडी माँ को. फाड़ दे उसकी चूत, और बुझा दे जिस्म की आग को. चोदो मुझे, चोदो…

और फिर माँ के मुहँ से यह सब बातें सुनकर मैं भी पूरी तरह से जोश में आ गया था. और फिर मैंने उसके रसीले होठों को चूसना शुरु किया. दोस्तों शायद ही दुनिया में उसके होठों के जैसा कोई दूसरा स्वाद हो. और फिर पूरे 15 मिनट तक किस करने के बाद मैंने उसके बब्स को दबाना शुरू किया तो वह भी मस्त होकर सिसकारियां लेने लगी थी. और फिर मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया था और उसकी ब्रा भी फाड़ दी थी. और फिर वह मुस्कुराई और बोली कि, आराम से मेरी जान यह रंडी तो अब तुम्हारी ही गुलाम है. और फिर मैंने उसकी साड़ी भी निकालकर फैंक दी थी, और फिर उनके पेटीकोट को भी झट से ऊपर उठाकर उनकी चूत को सहलाने लगा. दोस्तों उसका मखमली शरीर मुझको तो ऐसा लग रहा था कि, जैसे मैं किसी अप्सरा के साथ में हूँ. और फिर उसने मुझे बेड पर लेटा दिया और फिर उसने मेरे भी कपड़े उतार दिए थे. और फिर उसने मेरे लंड को अपने मुहँ में ले लिया था. और फिर उस पल मुझको तो सातवें आसमान में होने का सुख मिल रहा था. और फिर मैंने भी उसको कहा कि, चूस शीला, मेरी सौतेली माँ और जोरों से चूस, रंडी आज तो तेरी चूत की प्यास बुझाकर ही रहूँगा. दोस्तों मेरे लंड को मानों वह जैसे कोई बच्चा लोलीपॉप चूस रहा हो वैसे अपने मुहँ में लेकर लबा-लब चूस रही थी. और उससे मेरी हालत बिगड़ रही थी पर वह रंडी मुझपर हावी थी और वह जानती थी कि, आज उसको मेरे लंड से पहलीबार रस निकालना है. और फिर मैं उसके मुहँ में ही झड़ गया था. और फिर उसने भी मेरा सारा वीर्य पी लिया था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और फिर उसने अपनी चूत को मेरे मुहँ पर रगड़ा तो फिर मैं भी झट से उसको चाटने लगा उसकी चूत एक पके हुए आम के जैसी रसीली थी, और उसकी चूत बेहतहाशा पानी छोड़ रही थी जिससे साफ पता चल रहा था कि, वह कितनी गरम हो चुकी है. वह मेरे मुहँ पर जोर-जोर से अपनी चूत को रगड़ रही थी जिससे मुझको सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी, पर मैं भी क्या करता क्योंकि मुझको भी तो चूत की गंगा में बहना था. दोस्तों उसकी चूत झील जैसी गहरी थी। उसमें मैं जितना अन्दर तक जीभ डालकर के चूसता था वह उतनी ही ज्यादा गरम होकर पानी की धार छोड़ रही थी और मैं जितना गहराई में जाता था वह उतनी ही रसीली हो रही थी. और मैं उस पल अपने चरम आनन्द पर था मैंने कभी सोच भी नहीं था की चुदाई में इतना मज़ा आता होगा। मैं चूत के रस की गंगा में नहा रहा था और साथ में ही मेरी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद को भी टटोल रही थी. और वह अपने दोनों भारी कूल्हों को आगे-पीछे करके मुझे अपनी गांड में ऊँगली डालने का न्योता दे रही थी और साथ में वह अपनी चूत को भी मेरे मुहँ पर मार रही थी. दोस्तों उस कमरे का माहोल बड़ा ही मादक हो चुका था और ऐसा लग रहा था कि, जैसे जन्म-जन्म से बिछड़े साथी आज चुदाई के लिए मिले हो और कोई भी एक दूसरे के किसी भी अंग को छोड़ना नहीं चाहता था. वह मेरे लंड को अपने मुहँ में भरे हुए थी और साथ में मेरे दोनों लंड के बॉल को सहला भी रही थी और मैं भी उसकी चूत को चाट रहा था और एक ऊँगली से उसकी गांड की चुदाई भी कर रहा था. और फिर वह थोड़ी देर के बाद खड़ी हो गई थी. और फिर वह नीचे लेट गई थी और फिर वह अपने दोनों पैरों को फैलाकर मुझे चुदाई का न्योता दे रही थी. दोस्तों उस पल तो वह मुझको एक पेशेवर रखैल लग रही थी जो की चुदाई को तरस रही थी और साथ में, मैं एक नया खिलाडी था जिसने कभी किसी चूत में लंड नहीं डाला था. और फिर मैं भी झट से उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बब्स की निप्पल को चूसने लगा और फिर उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और कहा कि, साले तू तो बड़ा चालू निकला अभी और कितनी देर तक तडपाएगा मुझे, तू चोदेगा भी मेरी प्यासी चूत को, या फिर तेरा बाप आएगा मेरी चुदाई के वास्ते? और फिर वह अपने कूल्हों को उछाल-उछालकर के मेरे लंड को अपनी चूत में कैद करने के लिए मरी जा रही थी उसकी चिकनी चूत पर एक भी बाल नहीं था चूत का पानी पूरी चूत के ऊपर फैला हुआ था. उसकी चूत का पानी नीचे उसकी गांड के छेद से होकर बेड पर गिर रहा था और फिर उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया और फिर एक ही झटके में उसने मुझे कमर से पकड़कर अपनी और खींच लिया जिससे मेरा लंड उसकी चूत में समा गया था।

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उसके बाद मैं उठकर माँ की चूत के दाने को सहलाने लगा. उसने मुझे बाँहों में खींचकर कहा कि, “बस भी करो जानू अब और मत तड़पाओ, अब मुझसे और रहा नहीं जाता, मेरी यह चूत तुम्हारे लंड को पाने के लिए मछली की तरह तड़प रही है. चोदो इसको जमकर ताकि इसकी तड़प फिर ना उठे” और फिर जैसे ही मैं उसको चोदने लगा तो वह मुझसे कहने लगी कि, मादरचोद, आराम से डाल यह तेरी माँ की चूत है, तेरी बीवी की नहीं है. अब मैंने भी जोश में कहा कि, शीला तुझको तो मैं दिन रात चोदूंगा छीनाल और तेरी चूत में से मैं मेरा बेटा पैदा करूँगा. और फिर मैं अपने सारे दोस्तों के साथ मिलकर तुझको चोदूंगा, और तब कहीं जाकर तेरी अकल ठिकाने पर आएगी. और फिर मैंने एक जोर का धक्का दिया और मैंने अपना लंड पूरा उसकी चूत में पेल दिया था और मैंने उसको कसकर पकड़ लिया था. और फिर थोड़ी देर तक तो उसको दर्द महसूस हुआ पर बाद में वह चिल्लाने लगी और आहहह… उह्ह्ह… इस्सस… आहह… की आवाज़े करने लगी थी. अब मैं भी अपने पूरे जोश में उसकी चुदाई कर रहा था और वह अपनी दोनों आँखें बन्द करके मेरी कमर से मुझे नीचे खींच रही थी और साथ में वह अपने कूल्हों को भी ऊपर उछाल रही थी जिससे मेरा लंड भी उसकी चूत की उन गहराइयों में जा रहा था जहाँ वह पहले कभी नहीं पहुँच पाया था. और वह भी चुदाई के नशे में बड़बड़ा रही थी और कह रही थी कि, ज़ोर से चोद मेरे प्रेम राजा और जोर से चोद मुझे फाड़ दे मेरी चूत को कब से यह किसी नये कच्चे लंड की तलाश में थी, और तू तो कई दिनों से मेरे ध्यान में था चोद मुझे मादरचोद चोद और फिर यह कहते हुए उसकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया था, और फिर मैंने भी 20 मिनट तक अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर किया उसके बाद मैं भी उसके ऊपर ही ढेर हो गया था और फिर वह भी मुझसे चिपक गई थी और फिर मेरा लंड धीरे-धीरे सिकुड रहा था और वह अभी भी उसकी चूत में ही था।

उसकी चूत मेरे लंड को खा जाना चाहती थी उसकी चूत से मेरे पानी के साथ उसके पानी की धारा बह रही थी फिर मैं ऐसे ही सो गया और फिर जब मैं उठा तो मैंने देखा कि, शीला रंडी उठ चुकी थी और वह दोपहर का खाना बना चुकी थी और साथ में वह चुदाई के दूसरे दौरे की तैयारी भी कर चुकी थी। पर मेरी प्यास अभी भी नहीं बुझी थी. मुझे तो उसकी गांड मारनी थी. और फिर मैंने उसे घोड़ी बना दिया तो फिर वह मुझसे कहने लगी कि, मैंने कभी गांड नहीं मरवाई इसलिए तुम मेरी गांड प्लीज मत मारो. लेकिन मैं उसकी कहाँ सुनने वाला था, और फिर मैंने मेरे लंड को सहलाकर उसकी गांड के छेद पर निशाना लगाया पर वह सच में बहुत टाइट थी तो मेरा लंड फिसल गया और फिर मैंने तेल की शीशी से तेल निकालकर अपने लंड पर लगाया और बचा हुआ उसकी गांड के छेद पर भी लगाया। और फिर अगले ही झटके में निशाना आर-पार लग गया था और फिर वह गिड़गिडाने लगी और कहने लगी कि, “नहीं, ऐसा मत करो बहुत दर्द हो रहा है” लेकिन मैंने 10 मिनट तक बिना रुके उसकी गांड मारी और फिर मैंने उसकी गांड में ही अपना दोबारा से पानी छोड़ दिया था और फिर माँ ने खुश होकर मुझसे रोज चुदवाने का वादा किया था।

दोस्तों मेरी कहानी कैसी लगी ज़रूर बताए. मेरा पहला प्रयास था, ग़लती हो तो माफ़ कीजिएगा।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!