भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट ७

अब आगे भाभी: हा antarvasna मैं तो हरदम आपकी ख़ुशी के लिए… आप थक जाओ तब तक मुझे किसी चीज़ की परवाह नहीं… भाई: तेरी इसी अदा में तो मैं मरा जा रहा हूँ… आज तो तेरी और खैर नहीं… देखती जा…
भाभी: आओ पहले क्या करने का इरादा है? मेरे हुस्न के मालिक?
भाभी: तू लंड तो मुह में ले पहले? तू बस देखती जा….

भाभी ने अब लंड खड़ा करने की पूरी ताकत लगा दी…

भैया: चल ६९ करते है आजा…
भाभी: हा ओके… मुझे भी तो गरम करना पड़ेगा न आपको…
भैया: तभी तो… चल बेड पर….

भाभी अपने जिस्म को अच्छे से मुझे दिखवा सके इसलिए भाभी ने ये पोज़िशन को पसंद किया…

भाभी हलकी नज़र से मुझे भी सिड्यूस कर ही रहे थे.. वो देख कर मेरा लंड और भी टाइट हो गया था… और भाभी को देखे मैं कुछ मज़े इस तरह ले रहा था…

मैं सातवे आसमान मैं था… भाभी और भैया भी… और भैया का लंड जैसे ही कड़क हुआ के भैया ने भाभी को उठा कर पलंग पर पटक के रख्खा के भाभी के मम्मे उछल पड़े और वो कुछ अलग ही आनंद दे गए… भैया ने अब मिसनरी पोज़िशन पर हलके से लंड को भाभी की चूत पर रख्खा होगा… वो मुझे दिखाई नहीं दे रहा था… क्योकि मुझे भैया की गांड वाला हिस्सा दिखाई दे रहा था… पर भाभी बोली की ‘आह… प्लीज़ मत तड़पाओ न’ पर से लगा के भैया कुछ ऐसा कर रहे थे…

अंदर भी नहीं डाल रहे थे और बस चूत को छु के निकाल रहे थे… भाभी की प्लीज़ वाली आवाज़ कुछ ऐसा ही बयां कर रही थी…. भैया ने धीमे धीमे उस चूत को चरते हुए सिर्फ एक ही धक्के में अपना लंड पूरा अंदर समा दिया… और घबघब पैल ने लगे… भाभी हर एक धक्के पर आह आह कर के साथ देने लगे… भैया भाभी के ऊपर चढ़ कर जो बूब्स हिल रहे थे उनको देख कर अपने आपको बरदास्त नहीं कर पाये और निप्पल को खीच कर एक चाटा मारा… और ऊपर सो कर बूब्स को चूस ने लगे, दूसरे को मसल ने लगे.. भाभी लाऊड हो कर और उनको उकसाए जा रही थी… के भाभी पर भैया ऐसे १० मिनिट तक खूब चोद कर बोले…

भाई: मेरा निकलने वाला है, पर आज चूत में नहीं बूब्स को फक करते हुए निकाल ना है… दबाओ अपने स्तनों को…

भाभी में ठीक वैसे ही किया और भाभी पर भाई आगे बढ़कर स्तन को चोदते हुए वीर्य उगल ने लगे, ये भी मुझे नही दिखा पर शायद नज़ारा ऐसा ही होगा

और भाई थक के भाभी पर पड़े रहे… तब तक मैंने भी अपना वीर्य निकाल लिया था… भाभी भी जड़े ही होंगे… उनकी चूत की चमक देखकर लग ही रहा था… क्या चिकनी भाभी है… शरीर पर सिर्फ आइब्रो और माथे पर ही बाल? मज़ा आ गया ये देखकर…

भाभी: एक और राउंड करेगे?
भाई: हा बिलकुल करेंगे, क्यों नहिं करेंगे? पर अब ३० मिनिट के बाद, मैं तेरे मखमली बदन पर पड़े रहना चाहता हूँ…
भाभी: ओके…

पर अब मैं थक गया था… खड़े खड़े मास्टरबेट करके… तो मैं सोने चला गया… क्योकि दूसरी बार भी मुझे तो देखना ही है… वो भी दूर से… सिर्फ देख पाउँगा और कुछ नहीं… भाभी पेंटी और ब्रा से मैंने अपना लंड पोछ कर अच्छे से साफ़ किया और फिर ब्रा वही पर रखके निकल लिया….

मुझे नींद नही आ रही थी… सामने भाभी की सेक्सी बॉडी को देखने के बाद वो भी उन्ही की मंजूरी के बाद… पर अब कल कैसे बात करू? भाभी का क्या क्या रिएक्शन आयेगा… वो सोचता रहा… मैंने कुछ कुछ निकाले पॉइंट्स जो वैसे तो कुछ कहने योग्य नहीं थे… पर कुछ तो चाहिए? बात आगे बढ़ानी ही थी…. देर रात को नींद तो आ गई… मुझे अब भाभी को चोदना ही था… देखने में कोई मज़ा नहीं था… ये मैंने मन बना ही लिया था…

दूसरे दिन… सामने सामने ही बाते हुई…

भाभी: क्यों देवर जी जल्दी में थे क्या? जो निकल लिए थे?
मैं: अरे आप जैसे हुश्न की परी हो तो क्यों भला जल्दी हो? पर मेरे पास आप के ब्रा पेंटी के अलावा कुछ था।नहीं तो मैं वहा अकेला अकेला थक गया…
भाभी: वही तो… अब बताओ मेरा क्या हाल होता होगा?
मैं: हा… वो तो है… वैसे वो लिंगरी ली कहा से थी?
भाभी: अरे वो तो भैया ने ही दी थी…
मैं: अच्छा… भाभी एक बात पुछु?
भाभी: हा बोल….
मैं: आप… सॉरी तू अपना बदन दिखाने के लिए और सेक्स दिखाने के लिए तैयार क्यों हो गई?
भाभी: देख ये तेरे मेरे बीच की बात है… (वो सोच समजकर बोली) देख…. तू वैसे भी मुझे इसी नज़रो से देखता है… कभी कबार तुजे मैंने बाल्कनी में देखा है… माँ बाप है नहीं और मेरी कुछ कम्प्लेंट कर देने पर आप दोनों भाई अलग हो जाओगे तो फिर दुनिया मुझे ही कोसेगी… अब मुझे ही ये डिसीज़न लेना पड़ा… की चलो यही करते है… तो तू अपना दिमाग अपने तक रख्खेगा… कभी कबार अगर तू बाल्कनी मैं आए और भाई देख लेता तेरा तो? उससे अच्छा है की मुझे पता है… मैं संभाल सकती हूँ…

भाभी काफी कुछ बोल गई… और इसमें परिवार की भावना छलकाइ दी… मुझे अच्छा भी महसूस हुआ और एक औरत पर तरस भी आया.. पर इससे मेरा प्यार कम थोड़ी हो जाता? मुझे करना है तो करना ही था…

मैं: भाभी प्लीज़ एक बार मुझे गले लगाओ न?
भाभी: उहू… पहले रेटिंग्स तो सजेशन दो तभी… वो भी कुछ अच्छी लगेगी तो…
मैं: हमारी दोस्ती में मैं एक और छूट लेने जा रहा हूँ के मुझे साफ साफ़ बोलना पड़ेगा ठीक है? छूट है?
भाभी: मममम ओके… पर तू.. तू बोल भूल क्यों जाता है?
मैं: ठीक है भाभी… पहले तो तूने लिंगरी क्यों पहनी? तुजे टॉवेल ओढ़े आना था.. ऐसे (मैंने पिक्स दिखाई मोबाईल में) कुछ ऐसे बहार आना था तुजे..

भाभी: ह्म्म्म ये ज्यादा सेक्सी लग रहा है… सही है और?
मैं: दूसरा ये के भाई के लंड को ही चूसती रही…
भाभी: तो और क्या करू?
मैं: अरे बुद्धू गोटे भी तो चूस लेती… कुछ ऐसे… (मैंने फिर मोबाईल दिखाया)

भाभी: ह्म्म्म ये भी सही है… और?
मैं: ओके तूजे गांड भी चाटनी चाहिए। भैया तेरी चाटते है की नहीं?
भाभी: हा, मेरी मारते वख्त चाटते है…
मैं: हा तो तुजे भी तो चाटनी चाहिए के नहीं?
भाभी: ये दिमाग में कभी नहीं आया… तेरे भाई को पसंद आएगा क्या?
मैं: हा हा क्यों नहीं देख ये…

भाभी के चहेरे पर लाली तो छा गई थी और मेरा यहीतो काम था…

भाभी: और?
मैं: आपने ना कभी ये ट्राय नहीं किया होगा… (ऐसा बोल के मैंने एक मस्त चौका मारा)

मैंने जट से दिखाकर मोबाईल ले लिया…

भाभी: है… दिखा दिखा दिखा… क्या था वो?
मैं: (शरारती स्माइल देते हुए) हा हा… सजेशन…
भाभी: बताना प्लीज़…
मैं: ठीक है…

मैंने भाभी को दिया… भाभी इतना ही बोली…

भाभी: है भगवान… इतना एकसाथ?
मैं: हां तो डर गई?
भाभी: ये सब ग्राफिक्स का कमाल है.. ऐसा हो ही नहीं सकता…

भाभी भले ही बोली थी पर उसकी आँख तो इसी फोटो पर टिकी थी…

मैं: अरे ये सब रियल है… तू पोर्न नहीं देखती या पहले नहीं देखि?
भाभी: ना बाबा नहीं देखि…
मैं: तो चल दिखाऊ?

थोड़ी आनाकानी की पर फिर वो दोपहर के खाने के बाद के लिये मान गई पर शर्त ये रख्खी गई की दोनों अलग अलग सोफे पर जगह बना कर बैठेगे… पास नहीं… मैं मान गया… वो दुरिया मैं मिटा दूंगा उतना मुझे विश्वास था…