भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट ९

अब आगे जैसे तैसे antarvasna एक दूसरे को kamukta तके हुए हमने अपने आप को संभाले वो प्रसंग पूरा किया… दोनों के मन में कार मैं क्या होगा वो अजीब सी और अलग सी फिलिंग्स थी… भाभी का तो ये जैसे भी हो दूसरी बार का था… पर मेरे लिए तो जो भी था पहेली बार था…

एक औरत आज मुझे प्यार कर रही थी, वो समाज के बंधनो से जकड़ी हुई थी… क्या अजीब बंधन था… और क्या बंधन होने जा रहा था… अनजान मैं एक अजीब सी फिलिंग मन में भर के पार्किंग की और गाडी लेने चला गया… मेरी साँसे और धक् धक् कर रही थी… शायद भाभी का वहा मेरी राह देखे वही होना चाहिए… मैं मन ही मन मान रहा था…

मैं गाडी पार्किंग से लेकर जैसे ही दरवाजे पर आया भाभी ने खोला ही होगा के भैया का फोन आया मुज पर…

भैया: अरे छोटे… तेरी भाभी किधर है…
मैं: यही है क्यों? हम निकल ही रहे है… १ घंटे में पहोच जायेगे… (मेरा मन टूट रहा था)
भैया: ठीक है जल्दी आना… मैं घर पे इंतज़ार कर रहा हूँ…
मैं: ओके भैया…

फोन रखा तब तक भाभी गाडी में बैठ चुकी थी और हमे सुन रही थी…

भाभी: शीट… तेरे भैया के ६ मिसकॉल है…
मैं: ह्म्म्म तभी तो मुझे कोल आया…
भाभी: तो चलो जल्दी घर अब…
मैं: हम्म चलते है… पर तूने फोन कैप नहीं उठाया?
भाभी: अरे तू मेसेज पे मेसेज करे जा रहा था तो मैंने साइलेंट किया था…
मैं: ह्म्म्म चले?
भाभी: (धीमी आवाज़ से) पहोचना ही पड़ेगा ना..?
मैं: पंचर भी तो पड़ सकता है…
भाभी: ह्म्म्म पर वो सब मेइन हाइवे पर ही हो सकता है न?

हम दोनों एकदूसरे को वासना भरी आँखों से देख रहे थे… आँखे पलकाये बिना देखे जा रहे थे…

भाभी: यहाँ से जब तक चलोगे नहीं पंचर भी कैसे पड़ेगा?
मैं: हा हा हा सही बात है….

मैंने गाडी स्टार्ट की, मेरा दिल ज़ोरो से धड़क रहा था… गाड़ी हाइवे पर सिर्फ १० मिनिट में पहोच जाती है… पर मेरे लिए १० घंटे समान हो रहा था… वहा मैं रुकना चाहता था… पर मेरे हाथ रुक नहीं रहे थे… मैं भाभी की और देखने की कोशिश कर तो रहा था… पर… जो चाहिए था वो मुझे मिलने वाला था शायद, उसके लिए मैं इतना एक्साइट हो रहा था के कुछ समज नहीं आ रहा था… क्या करूँ? रूकू? या कल कॉलेज में और एक बंक मार के पूरा दिन घर पे रहूँ? मैं ये पहला मिलन यादगार बनाना चाहता था… हर कोई चाहेगा… मैं भी चाहता था….

क्या करू…?

भाभी: समीर?
मैं: हम? कल घर पे? मेरी फटी पड़ी है…

हम दोनों हँसने लगे…

भाभी: जैसी इच्छा, वरना यहाँ इन सुमसाम वीराने में कोई है नहीं…
मैं: आर यू स्योर?
भाभी: तुजे क्या पसंद है…?

मेरा हाथ गाड़ी के गियर पर था… भाभी ने हलके से छुआ और मेरी इच्छा पूछी थी… मेरी धड़कने जवाब दे रही थी… मैं भाभी के ठन्डे हाथ को महसूस कर रहा था… मेरा पेंट भी…. करू ना करू सोचते हुए मैंने अचानक से गाडी को ब्रेक मारी, और रुक दी… मैंने भाभी की और देखा उसने मेरे सामने… उसकी नज़रे जुकी… और मैंने भाभी के हाथ को पकडे उसको सहलाने लगा… दबा ने लगे… भाभी ने खुद से साड़ी का पल्लू गिरा दिया… मुझे साडी का पल्लू हटते ही… क्लिविज के दर्शन हुए… मैं मस्ती में था… भाभी भी… मुझे समज ही नहीं आ रहा था के कल तक जो भाभी नंगी दिख रही थी, आज वो मेरे पास है… मैं बस हाथ को पकडे रख्खा था… भाभी मेरा अब तक पूरा साथ दे रही थी… पल्लू गिरने से जो मम्मे का भाग था वो साँसों के कारन फूलता तो बहार आते साफ़ दिख रहा था… अब दोनों में से किसीको गलत नहीं लग रहा था… धीमे धीमे मैंने भाभी का हाथ छोड़ा और भाभी की बाहो पर ऊपर हाथ चलाना स्टार्ट किया… भाभी के हाथो पर जहा ब्लाउज़ स्टार्ट होता है वह जगह तक मैं अपना हाथ ऊपर निचे रगड़ ने लगा.. भाभी की वासना जागती रही और मैं मखमल के चादर पर जैसे अपना हाथ चला रहा हूँ वैसा लग रहा था… पूरा अँधेरा था रस्ते पर, उर हलकी हलकी दूर दूर रही लाइट्स कुछ मज़ा दे रही थी… भाभी वो लाइट्स में भी बहोत खूबसूरत दिख रही थी… मैंने वासना से भाभी को पहली बार नहीं छुआ था पर हा… एक अधिकार से जरूर पहेली बार छुआ था…

मैं ये अँधेरे को और महसूस करना चाहता था… मैं ये भी तो चाहता था के कुछ भाभी भी करे… ऐसे ही पड़ी न रहे… और इतने में ही एक ट्रक वह जगह से निकला और उनकी लाइट्स हम पर पड़ी… हमने अपने आप को ठीक किया पर ट्रक तो वहा से चला गया… ये डर भी मीठा लगा… हम दोनों एक दूसरे को देख के हँसने लगे और भाभी ने अपनी बाहे फैला कर मुझे गले लगाने के लिए न्योता दिया हँसते हुए… जो मैंने हस्ते हुए स्वीकार कर के उसके हाथो पर अपनी उंगलिया को चलाते हुए आगे बढ़ कर स्वीकार किया… और उसे गले लगा लिया… बिच में गियर बॉक्स था जो मुझे अच्छे से गले लगने में ग्रहण दे रहा था… मैंने गले लगा के भाभी की धड़कनो को महसूस किया, उसके मम्मे जो मेरी छाती पर दस्तक दे रहे थे वो अजीब महसूस हुआ… और मेरे हाथ भाभी की पीठ पर ब्लाउज़ पर घूमते घूमते निचे जा रहे थे की मैंने उसको अपनी और ठीक से खीचा, वो एक और तो हुई पर परेशानी तो उसे भी हो रही थी… और मैंने उनकी और देखा… वो निचे जुकी आँखों से मुस्कुरा रही थी और उसका चहेरा ऊपर करके कुछ भी और नहीं सोचा, अपने आप को रोक नहीं पाया और भाभी के गुलाबी होठो पर मेरे होठ रख दिये… ये मेरा पहला अनुभव था चुम्बन का… कितना मधुर और स्वादिस्ट लग रहा था… मैंने भाभी के सर को और जोर देकर उसे जोर जोर से किस किये जा रहा था, मुझमे पागलपन बढ़ते ही जा रहा था… मैं अपने आपको रोकने में असमर्थ था… और अचानक भाभी के हाथ मुझे अपनी और खिचे जा रहे थे… मुझमे उस पर चढ़ने को आमंत्रण दे रहे थे…. मैं उसे गाल पर, होठ पर, माथे पर, गले पर किस किये जा रहा था… वो मुझे खीच रही थी… पर गाड़ी में बहुत छोटी जगह थी… तो मैं खुद से कुछ अच्छे से कर नहीं पा रहा था… गले पर किस कर के जैसे मैं निचे और गया के भाभी ने मुझे रोक दिया… “ज़रा सबर करो राजा” कहके उसने मेरे हाथ को उसके मम्मे पर टिका दिए…

भाभी: इसे फिल करो समीर… सहलाओ इसे कैसा लग रहा है…

मैं आखे बंध करके सहलाये जा रहा था… ब्लाउज़ के ऊपर तो वे कड़क नज़र आ रहे थे… पर उठी हुई निप्पल मुझे और दीवाना कर रही थी… मैंने थोडा दबाया तो भाभी ने “आह…” करके स्वागत किया…

मैं: उतारू क्या?
भाभी: (मेरा हाथ दूर करते हुए) यहाँ? बिलकुल नहीं… यहाँ कोई भी आ सकता है, और कुछ भी हो सकता है… सुमसान इलाका है… थोड़े पल के मज़े ख़राब हो जायेगे ज़िन्दगी भर… चलो गाडी स्टार्ट करो… घर चले जाते है…

बात भाभी की थी तो बिलकुल आसान और समझने के लायक… पर मेरे गले वो थोड़ी उतरेगी? मेरा लंड जो कड़क हो चूका था उसका हिसाब तो करना पड़ेगा ना… पहेली बार जब किस करके भाभी को मैं भीच रहा था तब… मेरा ऑलमोस्ट हो जाने वाला था… पर मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोक के रखा… तो आप समज ही सकते है की मेरा क्या हाल हो रहा होगा? पर भाभी की बात मुझे सही तो लगी… मम्मे एक बार भले ऊपर से ही दबा लो तो फिर जो सुख मिलता है वो कुछ अलग ही होता है… इसीलिए भैया घर पर आते ही सबसे पहले भाभी के मम्मे जरूर दबाते है.. जैसे पहले मैंने बताया था…

भाभी के बाल बिखर गए थे वो उसने बंधना चाह रहे थे की मैंने रोके, क्योकि खुले बाल में क्या गज़ब ढा रही थी वो… मैं और वो एकदूसरे तो तके जा रहे थे.. पर किसी के आ जाने का डर भी था… आसपास खेत थे कोई जानवर भी आ सकते है…

मैं: अब क्या करे?
भाभी: चलो घर ही चलते है… तेरे भैया को देती हूँ… उससे मेरा काम तो हो जायेगा… हा हा हा…
मैं: याद रहे कल तू घर ही है…
भाभी: हा। अभी पता चल गया के कितना आता है तुजे… सब सिखाना पड़ेगा तुजे…
मैं: पर एक बार सिख गया तो फिर खैर नहीं तेरी…
भाभी: हा हा… अभी तो सबर करो तुम…

मैंने गाडी चला दी… मैं और भाभी का ये पहला था… भाभी भी पहली बार बहार आई थी… उसे भी भैया को ऐसे राह तके रहने देना पसंद नहीं था।

रस्ते भर हम एकदूसरे को छूते रहे… मैं अब भाभी के मम्मो को मसल था पूरी ताकत से और वो भी हक़ से… मैंने बहोत मज़े किये रस्ते भर…. घर पहोचते ही हम लोग गाड़ी से बहार निकले लिफ्ट में गए… हम रहते तो थे पहले माले पर, पर हम हमारे दसवे माले तक गए और पूरी लिफ्ट एकदूसरे को एकदूजे में समां ने के लिए किस करते रहे… मैंने भाभी को खड़े खड़े दबा दिया था… भाभी ने मेरा ख्याल रखा और मेरा लंड पहली बार अपने हाथो से दबा दिया और मुझे जड़ने के लिए साथ दिया… मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाया और भाभी के हाथो की ताकत पर मैं दसवे माले से जब पहले माले तक पहोचा तब तक जड़ गया… तब मुझसे भाभी का मम्मा और जोरो से दब गया… और भाभी चिल्ला पड़ी… और हम दोनों हँसने लगे… और मेरे चहेरे पर ख़ुशी छा गई… मेरा पेंट गिला हो गया था अंदर से तो मैंने अपना शर्ट बहार निकाल लिया और ढकने की खोटी कोशिश करी… और जब भाई ने डोरबेल बजाया… मुझे सुसु आई है करके मैं जल्द ही अपने बाथरूम में चला गया… और फ्रेश होकर ही बाहर आया… हम सबने प्रसंग के बारे में थोड़ी बात की और फिर सब अपने अपने रूम में जाके सो गये…

मैं उस रात को देखने नहीं गया… क्योकि मैं कल वो खुद करने वाला था भाभी के साथ….