भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट १०

अब आगे मुझे नींद antarvasna काफी देर तक नहीं आयी क्योकि मैं उत्तेजना में अपना भान भूल चूका था… और तभी भाभी का मेसेज आया… “सो जाना… गुड नाईट… स्वीट ड्रीम… एंड हा आई लव यु”… रिप्लाय मत करना…. तकरीबन २ बजे थे… मतलब भाई २ बजे तक भाभी को चुद रहे थे… या फिर उसकी जब नींद खुली मुजे याद किया… मैं तो पहला वाला ऑप्शन नहीं मानुगा… क्यों मानु के मेरा प्यार किसी और के निचे देर तक घिसा जा रहा था… और दर्द ना बढे इसलिए पुछुगा भी नहीं…

एक तरफ प्यार था और एक तरफ हकीकत भी… ऐसा खयालातों के बिच कब नींद में चला गया पता नहीं चला… सुबह आँख खुली बड़ी देर के बाद… करीबन १० बज चुके थे… भैया तो ९:४५ को चले जाते है… और में एकदम चोक के खड़ा हुआ… भाभी कहा है? और भैया गये के नहीं? मैं जल्दी से उठा और घर में ढूंढ ने लगा…

मैं: भाभी? ओ भैया? कहा हो आप सब लोग?

किसीका जवाब नहीं आया… मैं किचन गया.. फ्रिज पर कुछ चिपकाया पड़ा था कागज, और उसमे कुछ् लिखा था…

“मेरे प्यारे देवर जी पता था मुझे ढूंढो गे… और ये भी पता था के किचन तक जरूर आओगे… तो आप को बता दू के जाओ पहले मुह धोके आओ और नहाना भी खत्म कर ही देना… बाद में मिलते है.. तुम्हारी प्यारी और सेक्सी भाभी”

मैं चला अब नहाने… मुह भी धोना बाकी था… भाभी मुझे कितना जानती थी… जैसे ही बाथरूम में पहोचा.. अंदर आईने में एक और चिठ्ठी थी… मैं ब्रश कर रहा था…

“हा हा हा… पहले ब्रश तो अच्छे से कर लो, मुझे पता था के तू पहले पढ़ेगा… चल तेरी मर्जी… अच्छे से मुह धो के… अच्छे से नहा लेना… और फिर मेरे रूम मैं आ जाना…”

अरे वाह… अब तो मैं और बरदास्त कर नही पा सकता था… जैसे ही मैंने मेरे बाथरूम का दरवाजे को खोलने चाहा… वहा लिखा था…

“पता है की तू नहीं ही मानेगा… जाओ नहाओ पहले…”

अरे भाभी… ठीक है चलो नहा लेता हूँ… और क्या… मैंने जैसे तैसे नहाना खत्म किया… मेरा लौड़ा खड़ा हो चूका था… पर अगर मैं उनको छूता तो फिर मुठ मार के ही मानता… मैंने जल्दी से नहा लिया और फिर.. धीरे से बहार कपडे पहने और भाभी के रूम की तरफ जाने लगा.. दरवाजा धीरे से खोला तो अंदर कुछ दिखाई नहीं दिया… मैं थोडा निराश जरूर हुआ… पर अब मुझे अगला सुराग ढूँढना है… अभी तक वही हुआ था… मैं धीमे धीमे रूम में घुसा और सब जगह ढूंढने लगा… पहले आईने पर गया… कुछ नहीं दिखाई दिया… फिर पलंग पर देखा… और फिर अलमारी की और ध्यान गया… वहा लिखा था कुछ् छोटे टुकड़े पर…

“इंतज़ार की घड़िया खत्म करनी है तो आईने वाले कपबर्ड को खोलो”

क्या भाभी कपबर्ड मैं है? क्यों? ऐसा क्या है… मैं धीमे पगले आगे बढ़ा उसकी और… धीरे धीरे मैंने वो कपबोर्ड खोला… और भाभी… मुझे कुछ् ऐसी मिली…

वाह क्या नज़ारा था… मैं वहीँ कपबर्ड मैं घुस गया और अपने बदन को उनसे मिलाने की कोशिश करने लगा… मैं भाभी को चूमे जा रहा था… भाभी मुझे पूरा साथ दे रही थी…

भाभी: आह… धीमे… पूरा दिन पड़ा है… और कितना सोते हो तुम? आउच… नहीं मत खीचना… अभी अनरेप नहीं होना मुझे रुको… छोडो चलो बाहर निकलो…

मैं चुपचाप बाहर निकला उनके पीछे पीछे… अरे पीछे से तो वो पूरी नंगी ही थी। गांड की दरार में फसी तंगी लिंगरी की डोरी… मुझे तो ये सोच भी नहीं आई के भाभी ने ये कब खरीद कर ली? पर मेरा तो काम बन रहा था… भाभी पलंग पर जाके बैठ गई… मेरी जबरदस्ती में भाभी का मेरे साइड वाला लेफ्ट मम्मे की निप्पल बाहर आ गया था… और राईट वाला पूरा मम्मा दिख रहा था… भाभी ने एक कातिल स्माइल दिया और… धीरे से दोनों ही मम्मे को एक एक करके अंदर वापस ढक दिया…

भाभी: भारी उतावले हो तुम… चलो आओ… बैठो यहाँ पर…

मैं चुप चाप आके बैठ गया…

भाभी: देखो शांत रहो वर्ना यही सब में ठंडे हो जाओगे.. शांति…
मैं: भाभी… (ऐसे करके मैंने लिंगरी के बो को खोलने की कोशिश कर ही रहा था के भाभी ने फिर रोका)
भाभी: एक चपत लगाउंगी.. बोलाना सब्र करो…
मैं: पर…
भाभी: (थोडा गुस्सा हुई) हा कर ले जो करना है… धनाधन पेल के चला जा…
मैं: अरे नहीं नहीं.. वो आपका निप्पल अभी भी थोडा बाहर है…
भाभी: (थोडा इठलाके) हां तो? (और उसे भी अंदर ढक दिया)
मैं: अब?
भाभी: पहले कभी कुछ किया है किसीके साथ?
मैं: नहीं वर्जिन हूँ
भाभी: चलो तो फिर मजा आएगा…

भाभी खड़ी हुई, और पीठ को मेरी तरफ की और हल्की सी गर्दन घुमाके मेरी और देखा.. मैं पगला गया… मैंने लण्ड पर हाथ रखा, बाहर से ही सहला रहा था…

भाभी: वो मेरा है.. उसे तो छूना भी मत।
मैं: हा ठीक है पर और कितना तड़पाएगी?
भाभी: हा हा हा सब्र करो… बहोत मीठा फल मिलेगा…
मैं: ह्म्म्म

भाभी ये सब बाते गर्दन घुमाए कर रही थी… और फिर धीरे से मेरी और घुमी… मैं उसके पुरे बदन को नजदीक से देख रहा था… पर छु नहीं सकता था… अब तो पेंट में ही हो जायेगा लग रहा था… भाभी और करीब आई और बोली…

भाभी: मुझे एकदम नजिक से देखने के लिए, और वो भी नंगी सिर्फ ये एक डोरी खींचनी है… मैं तेरे सामने नंगी हो जाऊंगी…

अब मुझसे बरदास्त नहीं हो रहा था, तो मैंने बस खीच ही लिया… भाभी ‘अरे रुको’ बोली पर तब तक भाभी मेरे सामने नंगी हो गई ही… दोनों मम्मे बहार थे… पर चूत फिर भी ढकी हुई थी… भाभी ने लिंगरी को थाम।लिया था…

भाभी: हा हा हा… जरा भी सब्र नहीं है…

और मैंने भाभी को लिंगरी को चूत से हटा ने के लिए लिंगरी खिची तो भाभी भी करीब आई…

भाभी: आज मैं तेरी हो जाउंगी…

इस समर्पण की भावना के साथ भाभी ने लिंगरी छोड़ दी… और भाभी पूरी नंगी हो गई… पर शर्मा गई तो पीछे मुड़ गई…

और इस तरह से मुझे देखने लगी… मैं जगह पे खड़ा हुआ और भाभी की गांड की दरार से लेकर मेरी ऊँगली घुमाने लगा… और उनके पेट के हिस्से पर मैंने अपने दोनों हाथ रख्खे… गांड को सहलाया और धीरे से जब उनकी गोरी चिट्टी पीठ को चूमने गया के… भाभी तुरंत घूम के, मुझे गले लग गई… और ‘ओ समीर’ इतना ही बोली… ये उनका समर्पण था, मैं उनके मुह को थोडा दूर करके होठो पर किस करने लगा… और अपने हाथ को उनके पीछे वाले हिस्से को बराबर सहलाता गया.. किस करने के टाइम पर गांड सहलाना कितना अच्छा लग रहा था… मैं होश मैं कूल्हे पर चुटिया भी भर लेता था… मैं पुरे कपडे में थी और वो मेरी बाहो मैं… आज मैं उनके गोर बदन का मालिक था… आज मैं जो चाहूँगा वो उनके बदन से खेलूंगा…

भाभी: (मेरा कब का चल रहा किस को तोड़कर) आगे भी तो बढ़ना है ना?
मैं: आज तो तुजे मस्त रगड़ना है… तेरे हर एक कोने से वाकेफ होना है…

भाभी ये सुनते सुनते बेड पर बैठी… और लेट गई… मुझे उनपर चढ़ने का निमंत्रण देने लगी… मैंने कपड़े अभी तक नहीं निकाले थे और भाभी मना ही कर रही थी… मैंने धीरे से अपने बदन को पहेली बार किसी औरत के बदन पर रखने जा रहा था… मुझे इस वखत भाभी की चूत भी याद नहीं आ रही थी… मैं जब उनके ऊपर पड़ा तो जाने रुई के गद्दे पर पड़ा… हमने वापस किस का दौर जारी रख्खा, धीरे धीरे गर्दन से होते हुए मैं निच्चे स्तन तक पहुचा…

मैं: भाभी ३४ के भी बहोत बड़े होते है…
भाभी: भी माने?
मैं: माने ३६ बेस्ट होते है ना…
भाभी: वो देख लेना १ साल में ३६ के हो जाने है देख लेना…
मैं: तो लग जाउ?
भाभी: क्या?
मैं: ३६ के करने में?

हम दोनों हस पड़े… मैं भाभी के ऊपर था और भाभी मेरे निचे… मेरी छाती पर वो स्तन और निप्पल छु रहे थे.. मेरा हाथ उसे छूने जा रहा था.. पर भाभी वहा पहोचने ना देकर तड़पा रही थी…

भाभी: सुन…
मैं: हम? आज तू पहली बार कर रहा है.. जो भी करना है… शिद्धत से करना… तेरा पहला अनुभव् याद रह जाना चाहिए… समजे? और हां… (मेरे हाथ को वापस रोक लिया… हाथ भी नही छुआ था स्तन को) आज मेरे चहेरे पर कोई भी भाव हो… सिर्फ अपना ख्याल रखना… मुझे क्या फिल होता है… वो मत सोचना… (मैं वापस छूने जा रहा था के…) सुन सिर्फ हाथ नहीं मुह भी चलाना… (अब ये लास्ट होगा समज कर वापस छूने जा रहा था) और एक बात सुन?
मैं: क्या है भाभी? भैया के आने तक सलाह सूचना देते रहोगे?
भाभी: हा हा हा हा… चल तुजे जो मर्जी हो करना… कोई भी कमी तेरे मन में होवो बाकी रहनी चाहिए नहीं… चल होजा शुरू…

भाभी का हुक्म मिलते ही मैंने भाभी के दोनों मम्मो को हाथ में ले लिया… और फिर जोरो से दबाने लगा… भाभी कहर ने लगी पर कुछ बोल नहीं रही थी… ऐसे मस्त नरम नरम मम्मे मैं तो खूब मसल रहा था…

कभी ऐसे

ऐसे भी…

ऐसे खीचना और भी मजा आ रहा था

और भाभी एकदम सेक्सी आवाज में बोल रही थी… आज ही ३६ के हो जाने वाले है… मैं मम्मे को निचे दबाता तो निप्पल खड़े हो के बहार आते और मैं इस तरह से निप्पल को काट रहा था… निप्पल पर मैं अपने दाढ़ी का हिस्सा रख के निप्पल को रगड़ रहा था… भाभी आह… आउच करे जा रही थी… और मैंने दो बूब्स के बिच में दोनों निप्पल पर और फिर आजूबाजू खूब चूस चूस के १५ मिनिट के बाद खेलना बंध किया और वापस भाभी को होठो पर किस किया… एक नंगी औरत मेरे निचे थी ये बात का मूज़े अभिमान था…

भाभी: थक गए?
मैं: तुजे दुखेगा…
भाभी: मैंने पहले ही बोला आज मैं कुछ नहीं कहूँगी…
मैं: एक दो है ऐसे मुझे मेरे खुद के लव बाइट देने है..
भाभी: हां तो दे दे…

मैंने भाभी के निप्पल को उंगलिओ के बिच से खीच कर बिलकुल निचे जैसे ही…

ऐसे खीच कर निप्पल के ऊपर के भाग पर हल्का सा किस किया.. दूसरे मम्मे को भी मैंने ऐसा ही किया… निप्पल से निचे वाले मम्मे के हिस्से में स्तन जहा पूरा होता है वहा लेफ्ट मम्मे को पहले मैंने अपने दातो से काटा, ये थोडा ज़ोर से किया ता के मेरे अगले दांत की छाप बैठ जाए.. मैंने उत्साह मैं और भीच के रखा… और जब छोड़ा तो मेरे दांत के निशान वह जगह थे.. मुझे गर्व महसूस हुआ… फिर तो मैंने निप्पल को छोड़ कर आजूबाजू सब जगह ऐसे दांतो के निशान दोनों मम्मो पर छापना शुरू किया… मुझे खैलने में मज़ा आ रहा था… भाभी को दुःख भी रहा था… मैंने निप्पल पर कुछ नहीं किया क्योंकी मैं जनता था के निप्पल सब से सेंसिटिव होता है, पर फिर भी मैंने जैसे कैरम से खलते वखत स्ट्राइकर से मारते है बिल्कुल वैसे ही दोनों निप्पल पर एकसाथ जोर से मार के मेरी वासना का लेवल और दिखा दिया.. भाभी का चहेरे पर आंसू भी नज़र आये…

मैं: भाभी रुक जाउ?
भाभी: शशशश… आज कुछ मत बोल… और हा… सिर्फ दातो के निशान बैठाने से लव बाइट नहीं मिलेगा… तुजे और भींचना पड़ेगा… ये तो शाम तक निकल जायेंगे।
मैं: मैं तो कर दू पर रात को भैया को जवाब आपको देना है..
भाभी: ह्म्म्म ठीक है चल आज ये तेरा उधार रहा मुज पर…

मैं धीरे धीरे और निचे खिसक के पेट की और आया वह जगह पर भी मैंने अपने दातो से काटना चालू रख्खा.. वहा भी मैंने दातो की छाप छोड़ी और नाभि की चमड़ी को भी दातो से खीचा… अब मैं हर मर्द की फेवरिट जगह पर था… चूत पे.. वाह दोनों तरफ फूली हुई और बिच में एक मस्त दरार जो स्वर्ग का दरवाज़ा है, मैंने हल्के से अपनी उंगलिओ से खोला… वाह क्या नज़ारा था…

उसमे देखा के पानी की धारा बह रही थी… मैंने उसे अपने दूसरे हाथ से पोछा पर फिर अंदर से धारा बही… स्त्री की उत्तेजना दिख रही थी… मैं नजदीक गया क्या नमकीन सी खुशबु थी और धीरे से जीभ से छुआ… थोडा नमकीन लगा… पर फिर मैंने वहा अपने दांत जीभ और होठ से भाभी की चूत को चोदना चालू किया… कभी दातो से चूत के बाहर के पडदे को खिचता कभी जीभ अंदर तक घुसाता… कभी ऊँगली करता, कभी दो ऊँगली… यहाँ कितना मुलायम था भाग… मैंने सपने में भी नहीं सोचा था के ये भाग इतना सिल्की होता है… अंदर का भाग तो चमड़ी ही है… पर इतना गरम होता है? अंदर हाथ डालो तो जैसे भट्ठी हो, जिसमे पानी निकलता है… मानो के लड़की पिघल रही है… मैंने करी १० मिनिट तक उसे खूब चूसा और ऊँगली भी की काटा भी सही भाभी की जांघो को और फिर भाभी अकड़ ने लगी और वो जड़ने लगी… मुझे वो सब खारा खारा चिकना चिकना था, पर मुझे अच्छा लगा… मैं चाटे रहा… भाभी के मुख पर लाली छायी हुई थी.. मैं अभी भी भाभी के चूत से खेल रहा था… पर अब भाभी ने मुझे रोक के बोला… चल अब मेरी बारी….