घरेलू चुदाई समारोह 2

कोमल को ऐसा antarvasna महसूस हुआ जैसे वो कुछ ज्यादा ही मुश्कुराया था। उसे कभी-कभी यह लगता था कि उसका लड़का उतना सीधा नहीं था जितना कि वो उसे समझती थी। सजल उससे हमेशा अपनी बात मनवा लिया करता था। कोमल जब अपने कमरे में पहुँची तब भी अपने मन से वह उन भावनाओं को नहीं दूर कर पाई। इससे उसे डर और रोमांच दोनों हुए। उसे पहले भी कभी-कभी सजल के लिए ऐसी भावनाएं आयीं थीं पर आज जितनी तेज़ नहीं। उसे ग्लानि होने लगी, पर कुछ-कुछ रोमांच भी।

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“अपने बच्चे को अच्छे से सुला दिया…” सुनील ने व्यंग्य भरे शब्दों में पूछा। उसने अपना तना हुआ लण्ड अपने हाथ में लिया हुआ था और उसे धीरे-धीरे सहलाते हुए व्हिस्की पी रहा था।

“ज्यादा मत बोलो…” कोमल ने कुछ ज्यादा ही गुस्से से जवाब दिया। उसने सुनील का बड़ा लण्ड देखा तो उसके मन में चुदाई की तीव्र इच्छा हुई, पहले से कहीं ज्यादा ही तीव्र। पर वह अपनी कामुकता को दिखाना नहीं चाहती थी। कोमल ने भी एक ग्लास में तगड़ा डबल पैग बनाया और नीट ही पीने लगी। उसे नशे में चुदाई का ज़्यादा आनंद आता था।

“ठीक है, लड़ो मत…” सुनील बोला- “मेरे ख्याल से आज मैं तुम्हें सेवा का मौका देता हूँ। क्या तुम मेरे लण्ड को चूसने से शुरूआत करना पसंद करोगी…”

“बड़े होशियार बन रहे हो…” कोमल भुनभुनाई। पर वो भी मन ही मन उस कड़कड़ाते हुए लण्ड का रसास्वादन करना चाह रही थी। उसका गाउन एक ही झटके में ज़मीन पर जा गिरा और वो धीमे से बिस्तर की ओर कदम बढ़ाने लगी। इससे उसके पति को उसकी सुनहरी नंगी काया का पूरा नज़ारा हो रहा था। सुनील का पूर्व-प्रतिष्ठित लण्ड कोमल की जघन्य काया को देखकर और तन्ना गया।

उसकी मनोरम काया पर उसके काले निप्पल जबर्दस्त एफ़ेक्ट पैदा कर रहे थे। सुनील की नज़र फ़िर अपनी पत्नी के निचले भाग पर जा टिकी, जहाँ चिकना और सुनहरी स्वर्ग का द्वार चमचमा रहा था।

“तुम 34 साल की होने के बावज़ूद भी बहुत हसीन हो…” सुनील ने मज़ाक किया। कोमल की जांघें परफ़ेक्ट थीं, न पतली न मोटी।

“तारीफ़ के लिए शुक्रिया…” कोमल थोड़े गुस्से से बोली। उसने एक गोल चक्कर घूमा जिससे सुनील को उसके पृष्ठ भाग का भी नज़ारा हो गया। उसका यही हिस्सा सुनील को सवार्धिक प्रिय था, उसे देखते ही वो पागल हो जाता था।

“इधर आओ जानेमन…” वो लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोला। जब कोमल बिस्तर पर पहुंची तो सुनील ने उसे अपने ऊपर खींच लिया। वह काफ़ी उत्तेजित था। कोमल को भी यही पसंद था।

“हाँ, आज रात मुझे कुचल दो, जानेजाँ…” वो अपने जिश्म को सुनील के शरीर से दबवाते हुए बोली। और जब सुनील ने उसके निप्पल काटे तो वो सनसना गई। उसे सुनील से एक ही शिकायत थी, वो बहुत प्यार से पेश आता था, जबकी कोमल को जोर ज्यादा भाता था। उसे घनघोर चुदाई पसंद थी।

“और जोर से काटो…” वो बोली। जब सुनील ने उसके चूतड़ पकड़कर दबाए तो वो बोली- “मेरी चूचियों को और जोर से चूसो…” कोमल आनंद से पागल हो गई थी।

पर उसके पति ने उसे वहशी तरीके से प्यार करना बंद किया और उसका सर अपने लण्ड को चूसने के लिये नीचे किया- “मेरा लण्ड चूसो…” वो बोला।

“अभी नहीं सुनील, मेरे मम्मों को थोड़ा और चूसो, उन्हें और काटो। तुम जब ऐसा करते हो तो मुझे बहुत मज़ा आता है…”

“मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता। मैं बहुत उत्तेजित हूँ, मेरा लण्ड चूसो…” सुनील ने सिर्फ़ अपने आनंद का ख्याल करते हुए कहा।

“नहीं…” कोमल चीखी- “हम हमेशा ऐसा ही करते हैं। तुम इस मामले में बहुत खराब हो। तुम जानते हो कि मुझे क्या भाता है, फ़िर भी तुम सिर्फ़ वही करते हो जिसमें तुम्हें खुशी मिलती है। मुझे अपनी खुशी के लिये तुम्हारी मिन्नतें करनी पड़ती हैं…”

“देखो जानेमन, हम इस बारे में कई बार बहस कर चुके हैं। मुझे जबर्दस्ती अच्छी नहीं लगती, कभी-कभी जैसे कि आज, मैं बहुत उत्तेजित हो गया था और मैंने तुम्हें पकड़ लिया। अब क्या तुम बेवकूफ़ी बंद करोगी और बचपना छोड़कर मेरा लण्ड चूसोगी…”

“नहीं, मैं मूड में नहीं हूँ…” कोमल गुस्से से बोली और बिस्तर की चौखट पर बैठ गई।

“तुम किसे मूर्ख बना रही हो प्रिय… मैं जानता हूँ तुम हमेशा चुदाई के लिए तैयार रहती हो। और तुम भी ये जानती हो…” सुनील ने उसे वापस खींचते हुए कहा।
“तुम बहुत बद्तमीज़ हो…”

सुनील ने उसे वापस अपने लण्ड पर जोर देकर झुका दिया। इस जबर्दस्ती से कोमल फ़िर से रोमाँचित हो उठी। सुनील गुर्राया- “बकवास बंद करो और मेरा लण्ड चूसो…