घरेलू चुदाई समारोह 4

अगर उसका पति यह antarvasna समझता था कि वो जीत kamukta जायेगा तो वो गलत था। वो जितना भी दे सकता था कोमल उससे ज्यादा लेने के औकात रखती थी। वो जितना जोर लगाता कोमल को उतना ही ज्यादा मज़ा आता। वो उससे जितनी बुरी तरह से बोलता, उतनी ही उसकी वासना में वृद्धि होती। उसने अपनी प्यासी चूत से सुनील का मोटा लण्ड जकड़ लिया और उम्मीद करने लगी की वह इसी वहशियाने तरीके से उसे चोदता रहेगा। सुनील को भी अपनी पत्नी को इस तरह से चोदने में मज़ा आ रहा था, इसलिये उसने अपना स्खलन रोक रखा था। उसने कोमल की चमकती कमर का नंगा नाच देखा और उसके पुट्ठे जोर से भींच डाले।

जब उसके दिमाग में सजल का ख्याल आया तो कोमल ने कुछ और सोचने की कोशिश की। पर वह अपने बेटे को अपने दिमाग से निकालने में सफ़ल नहीं हुई। सजल की नंगी छाती की चमक उसके दिमाग में रह-रहकर कौंधने लगी। हालांकि उसने सजल का लण्ड सालों से नहीं देखा था पर अब उसे वह अपनी आंखों के आगे देख रही थी।

“हाँ, और अंदर…” उसने आह भरी। फ़िर उसने महसूस किया कि ये उसने सुनील नहीं बल्कि सजल से कहा था। उसने सोचा था कि यह सजल का मोटा लण्ड था जो उसे चोद रहा था। उसके ख्वाब में सजल का लण्ड दस इंच लम्बा और बहुत मोटा था।

सुनील के स्वाभिमान को कोमल की कही हुई कुछ बातों से बहुत चोट पहुंची थी- “तो मैं हमेशा तुम्हें झाड़े बिना ही झड़ जाता हूँ…” वो तमतमा कर बोला। “तुम्हें यह दिखाने के लिये कि तुम कितनी गलत हो, मैं तुम्हें एक बार से ज्यादा बार खुश करके ही झड़ूंगा…”

“हाँ, ये हुई न बात…” कोमल बोली- “तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों को किस तरह निचोड़ रहे हैं। हाँ सुनील मुझे जोर से चोदो…” कोमल झड़ गई- “चोदो मेरी चूत को…” वो चिल्लाई। उसे पता था कि अगर सजल जागता होगा तो वो सुन लेगा। इससे उसे और अधिक गर्मी आई और उसकी चूत के स्पंदन और तेज़ हो गए।

“और…” वो चीखी। उसे सुनील के हाथ अपनी छाती पर आग की तरह महसूस हो रहे थे- “और, मैं फ़िर झड़ रही हूँ मुझमें यह पूरा लण्ड पेल दो जानेमन…”

आज सुनील को अपने अभी तक न झड़ने पर यकीन नहीं हो रहा था। कोमल की बेहद गर्म और टाइट चूत उसके लौड़े को कसकर जकड़े हुए थी पर वह अभी तक झड़ा नहीं था।

“अब…” वो बोला जब उसकी पत्नी ने झड़ना बंद किया। वो कोमल की सुलगती चूत से अपना लण्ड निकलना तो नहीं चाहता था पर वो एक दूसरे तरीके से झड़ना चाह रहा था। वो झड़ते समय कोमल का चेहरा देखना चाहता था और उसके हसीन चेहरे पर ही अपने प्यार का प्रसाद चढ़ाना चाहता था।

“अब तुम मुझे ऊपर आकर चोदो…” कोमल बोली तो उसके पति ने उसे कमर के बल बिस्तर पर पलट दिया। हालांकि वो अभी-अभी ही स्खलित हुई थी पर यह भी जानती थी की दो चार धक्के और पड़ने पर वो एक बार फ़िर नदी पार कर लेगी।

पर सुनील उसके पेट पर आ बैठा- “अब मैं तुम्हें और नहीं चोद रहा, मैं तुम्हारे मुँह में आना चाहता हूँ…” और वह अपने लण्ड का हस्तमैथुन करने लगा।

“नहीं सुनील, ऐसा मत करो। मुझे थोड़ा और चोदो…” उसे यह बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था कि सुनील अकेले ही झड़ना चाह रहा था।

“अपनी चूत से खेल लो अगर तुम्हें और झड़ना है…” सुनील उसकी भावनाओं को नज़र-अंदाज़ करते हुए बोला।

हालांकि उसकी चूत अभी और प्यासी थी पर समय की ज़रूरत समझते हुए कोमल ने इसका ही आनंद उठाने का निश्चय किया। “ऊह…” उसने गहरी सांस लेते हुए अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां घुसेड़ दीं।

“ये ले…” सुनील चिल्लाया और अपना गर्मागर्म रस की पिचकारी कोमल के चेहरे पर मारने लगा। कोमल ने उस फ़ुहार को अपनी तरफ़ आते हुए देखा। पहले उसके माथे, फ़िर नाक पर और अंत में वह स्वादिष्ट रस उसके मुँह में आ गिरा।

“थोड़ा और…” उसने चटखारे लेते हुए कहा। जब बाकी का रस उसकी छातियों पर गिरा तो उसने एक हाथ से उसे उठाकर चाटा और वहीं अपनी छातियों पर मल दिया और दूसरे से अपनी चूत से खिलवाड़ जारी रखा। वह एक बार फ़िर सुख की कगार पर थी।

“मुझे अपने रस से सरोबार कर दो, मेरे मुँह में आओ, मेरे मम्मों पर आओ। आओ… मैं आ रही हूँ, अपने टट्टों को मेरे ऊपर खाली कर दो। मेरे पूरे शरीर को नहला दो…” जितना वो चाट सकी उसने चाट लिया बाकी उसने अपने जिश्म पर मल लिया। कोमल इसी हालत में और घंटों रह सकती थी। उसे अपने पति का भारी शरीर अपने ऊपर बहुत अच्छा लगता था।

पर सुनील उसके ऊपर से हटते हुए बोला- “तुम उठकर क्यों नहीं नहाकर अपने को साफ़ कर लेतीं…”

“नहीं, बस तुम मुझे लिहाफ़ ओढ़ाकर ऐसे ही छोड़ दो। मुझमें अब कुछ भी करने की ताकत नहीं है…” उसने बहाना बनाया। वो इसी तरह रहना चाहती थी। उसने अपने चमकते स्तनों को देखा और सोचा कि उसे कैसा लगता अगर यह वीर्य-रस सजल का होता…