भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट २

मैं कुछ अलग ही antarvasna दुनिया में खोया हुआ था उस वक़्त… मैं किसके बारे में क्या बोल रहा था कुछ ख़याल नही था…. और तो ठीक किसी और के सामने? ये वो ख़याल थे जो मेरे दिमाग में घूम रहे थे, जो हर रोज़ हिलाके बहार निकलता था… आज मुह से बोल बन के बहार निकल रहे थे…. मैं आगे बोले जा रहा था और कोई भी मुझे रोक नहीं रहा था… क्योकि सब कोई अपनी पेंट की ताकत नाप रहे थे…

मैं: जब भैया उनपे चढ़ते है… तो अपनी बाहें फैलाकर उनका स्वागत ऐसे करती है जाने वो उनको खुद में समां लेंगे… कोई भी भूखा शिकारी भेड़िया बन जाए वैसे ही उस पर टूट सकता है…. डोगी स्टाइल हो, या अमेजॉन स्टाइल हो… या फिर मिशनरी पोज़िशन हो… वो भैया का स्वागत इस कदर करती है… जैसे भैया महसूस करता है.. की सिर्फ वही उनका मालिक है। एक लडके को और चाहिए भी क्या…? आखिर उस मल्लिका का शहज़ाद ए मालिक वो अकेला ही तो है… पूर्ण स्त्री है वो….

अब अचानक मेरा ध्यान टुटा… मुझे ख़याल आया के ये मैं क्या बोल गया… सब मुझे देख रहे थे… सब के मुह पर वासना के कीड़े थे… वहिषी बन चुके है… कुसूर मेरा है… मैं ही अपनी भाभी को सरेआम नंगा कर रहा हूँ…

राजू: उहू… उहू… भाई… कहा हो आप? क्या हो गया आपको?
मैं: एम्म्म… कुछ नहीं… अरे चलो ना बाहर जाते है…

और हम सब एक साथ बाहर निकल गए…

उस दिन हमने एक दूसरे के साथ कुछ कम ही बाते की… पर मैंने अपना दिमाग सब के दिमाग मैं फिट कर दिया था… चारो लोग मेरी मरजी की राह देख रहे थे ताकि वह भी मुझे साथ दे सके अपने खयालो में… वहा एक प्यारा सा कबूतर (मेरी भाभी) इन सब चीज़ों से अनजान भैया के निचे आके संसार का सबसे हसीन सुख देने में लगी थी….

मेरी भाभी को घूरने की हिम्मत बढ़ती जा रही थी… मैं घूरे जाता था… उनकी आँखे बयां करती थी के उसे पसंद नही आता है… पर मैं अपने आपको कंट्रोल कर ही नहीं पाता था…. मैंने फिर एक बार हिम्मत जुटा कर अपने दोस्तों के बिच बात निकाली….

मैं: दोस्तों… उस दिन मैं कुछ भावना मैं बह गया था। पर मुझसे रहा नहीं गया, कोई मेरी हेल्प कर सकता है क्या?
कुमार: कहना क्या चाहते हो?
मैं: मैं भाभी को चोदना चाहता हूँ…
(सब एक दूसरे को तके हुए थे, क्या बोलते?)
मैं: मैं भाभी को बस पाना चाहता हूँ, और मसलना चाहता हूँ
केविन: तू जनता भी है तू क्या बोल रहा है?
मैं: हा…
सचिन: पर ये होगा कैसे…?
केविन: क्या भड़वे क्या बके जा रहे हो तुम लोग… ये मुमकिन नहीं है…
मैं: पर मुझे बनाना है…
केविन: तो तूने कुछ सोचा है… जो हमसे तू छुपा रहा है…
मैं: हा कुछ चल तो रहा है….

थोडा पीछे जाते है… मैं भाभी को तके जा रहा था… और भाभी ने मुझे ३-४ बार ऐसे ही पकड़ा…
भाभी: क्या देख रहे हो…
मैं: कुछ नहीं बस ऐसे ही… आप थक जाते होंगे दिनभर नहीं?
भाभी: तो?
मैं: बस ऐसे ही…
भाभी: थोडा पढाई पर भी ध्यान दो…
मैं: देंगे… धीमे धीमे…
भाभी: कुछ अलग दिखने लगे हो… भैया… आपके भैया को बोलना न पड़े ध्यान रखना…
मैं: अरे भाभी… बता दीजिएगा… क्या फरक पड़ता है…

उस रात भैया जब भाभी को अपने निचे ला कर घबाघब पेल रहे थे, भाभी शायद उसके वीर्य निकलने की राह देख रहे थे शायद… हमारे दोनो भाइयो के कमरे में अंतर नहीं था… बाल्कनी से आप भैया भाभी की सम्भोग रस का आनंद ले सकते थे… आवाज नहीं सुनाई दे सकती थी… पर उस दिन मैंने उनके रूम में मैंने एक पुराना फोन रखा था जिसमे सब रेकॉर्ड हो जाए… दूसरे दिन तक वो चालू रहा २२ घंटे तक पर मैं सिर्फ काम की बाते आपको सुनाऊँगा….

भैया भाभी रूम में गए रात को….

भाभी: आह… एक मिनिट…
भाई: रहा नही जाता… मेरी रांड….
भाभी: हा मेरे मालिक आप ही का है… पर आज तैयार होउ के बस ऐसे ही?
भाई: नंगी ही तो होना है.. मैंने बोला है न की.. जब मैं अंदर आ जाऊ तब अगर तैयार हो चुकी है तो ठीक है, मैं इंतज़ार बरदास्त नहीं कर सकता…
भाभी: तो फिर… आउच… धीमे… आप ही की हूँ….
भाई: खा जाऊंगा आज तो…
भाभी: बस… आह… उम्म्म्म्म… आउच… हर रोज़… आह… बोलते हो… और… आह… उम्म्म्म्म… एक छोटा सा लव बाइट भी तो नहीं देते…
भाई: पण तुम्हे पसंद नही है ना इसलिए….
भाभी: पर तुम्हे तो है… आज मैंने आपके लिए कोई तयारी नहीं की… आज सजा के दौर पर एक लवबाइट दे देना…
भाई: कहा दूँ?
भाभी: जहा मर्जी करे आपकी… आ…..उ….च…. अरे बूब्स पर नही… आह…. उई माँ….काट दिया….सच में?
भाई: हा मिलेगी सजा जरूर….
भाभी: आप खुश है ना?
भाई: हा…
भाभी: दीजिये कोई बात नहीं…

फिर आवाज़ नहीं आई तकरीबन ३० मिनिट तक, पर आह आह आउच और प्यार भरी अलग अलग आवाज़े आती रही… पलंग की किचुड़ किचुड़ आवाज़ भाभी की घिसाई का प्रमाण देती रही… जो मैं कल रात को देख चूका था वो आज मैं सुन रहा था…. और वासना शांत हुई…

भाभी: आज क्या हुआ था आपको?
भाई: बस मज़ा आ गया…
भाभी: खुश है ना आप?
भाई: हा, बहोत खुश हूँ…
भाभी: एक बात बोलुं?
भाई: हा बोलो
भाभी: मुझे एक बात खटक रही है…
भाई: क्यों क्या हुआ?
भाभी: मैं कुछ बुरा नहीं चाहती पर…. भैया… लगता है की भैया मुझे अच्छी नज़रो से नहीं देखते…
भाई: क्या बकवास कर रही हो?
भाभी: देखो आप गुस्सा मत हो पर ऐसा मुझे लगता है…

भैया काफी देर तक चुप रहे… और बोले…

भैया: तुम क्या चाहती हो..?
भाभी: मैं कुछ चाहती नहीं हूँ बस आपके ध्यान में लाना आवश्यक था तो बोल दिया…
भैया: इग्नोर करो… या फिर तुम खुद बात करो… मैं बिच में पडूंगा तो भी तेरा ही नाम आएगा… और गन्दा लगेगा… अगर तुम बात करोगी तो मेरे डर के कारण अगर ये हो भी रहा है तो नहीं होगा… क्या कहती हो…
भाभी: मुझे वैसे शर्म तो आएगी पर ये बात मुझे ठीक भी लग रही है…

ये जानकारी आप लोगो के लिए जरुरी थी जाननी… इसी की बलबूते पर मैं ये मेरे फ्रेंड्स को बता रहा था की काफी कुछ होने के चांसिस है…

मैंने ये बाते मेंरे दोस्तों को भी बताई… कोई बोलना नही चाह रहा था पर सबके मनमे भाभी के लिए लड्डू फुट ने लगे थे….