आम की लालच में चूत फड़वाई आदिवासी

कच्चे आमो के Antarvasna पकने की सीजन चालु हो गई. हम लोगों को वलसाड के पास एक साहब के खेतो की रखवाली का काम पिछले 7 साल से मिल रहा हे. करना कुछ नहीं होता हे. आम के पेड़ो के निचे खटिया लगा के सोना होता हे. और कोई चोरी शोरी ना करें और जानवरों आम की फसल को नुकशान ना करे वही देखना होता हे.

मेरे साथ मेरे ही गाँव के अफजल, बंटी, रमेश और रघुनाथ थे. रघुनाथ हम सब से बड़ा था और वही ठेका भी लेता था. वो हमें दिहाड़ी पर ले के आता था. ट्रेन का टिकट, खाना पानी, रहना सहना सब वही देखता था. पता नहीं आम वाले शेठ लोग उसे कितना पैसा देते थे. लेकिन हमें हमारे गाँव से डबल टिबल मिलता था इसलिए हम चुपचाप पड़े रहते थे. और काम भी तो कुछ नहीं था. मन करे तो आम खाओ और लेटे रहो खटिया में.

रघुनाथ उस दिन शेठ जी के साथ उन्के दुसरे बाग़ पर गया था. अफजल और बंटी बाग़ के छोर पर थे और मैं रमेश के साथ दुसरे छोर पर. दोपहर का वक्त था. कुछ देर पहले ही खाना खाया था इसलिए आँख लग गई. गर्मी की सुखी हवाएं नींद उड़ाने की पूरी कोशिश करती थी. तभी मुझे ठप का आवाज आया. मुझे लगा की शायद गिलहरी ने आम निचे गिराया होगा. लेकिन कुछ देर में फिर से ठप की आवाज आई. मुझे लगा की पीछे की केमिकल फेक्ट्री के मजदुर होगे जो पथ्थरों से आम गिराते होंगे.

मैं अपना डंडा ले के निकला. वहां जा के देखा तो एक आदिवासी लड़की खड़ी थी और उसके साथ दो छोटे छोटे लड़के थे. वो लोग दिवार फांग के इधर आये थे शायद. मुझे देख के लड़के तो भाग गए. लड़की भी दिवार पर चढ़ी लेकिन उसका घाघरा फस गया और मैंने उसे पकड़ लिया. मैं उसके हाथ पकड़ के रमेश के पास ले के गया. वो भी नींद से उठ चूका था.

रमेश ने पूछा, क्यूँ री मादरचोद, कब से चोरी कर रही हे?

वो लड़की कुछ नहीं बोली. मैंने सूए डराया, साली को पुलिस में दे देते हे वो डंडो से मारेंगे और जेल में बंद कर देंगे इसे.

मेरे ये कहते ही वो रोने लगी. मैंने पूछा काम शाम करती हे की नहीं. वो बोली, मैं पड़ोस के खेतो में काम करती हूँ. लडको को भूख लगी थी इसलिए बस दो आम लेने के लिए आई थी. रमेश की नजर इस लड़की के दो आम के ऊपर थी. और मैंने देखा की उसका लंड खड़ा होने लगा था. उसके लंड को खड़ा होते देख मेरा भी खड़ा हो गया.

रमेश ने मुझे कहा, क्या करेंगे इसका?

मैंने कहा, आप कहो!

वो बोला, बुला पुलिस को फिर!

वो लड़की अब रोने लगी और हाथ जोड़ के माफ़ी मांगने लगी. मैंने देखा की रमेश उस लड़की की गले के भाग को देख के नजरे निचे करता जा रहा था. रमेश एक नम्बर का हरामी हे, मेरे से भी बड़ा. उसने लड़की के बूब्स को देखा और अपने लंड को खुजा के बोला, छोड़ दे तुझे? क्यूँ भाई छोड़े तुझे? हमारे शेठ हमें काम से निकाल देंगे तुझे छोड़ा दो.

मैंने कहा, रमेश भाई लगाऊं ना फोन पुलिस को?

अब वो लड़की चीख चीख के रो रही थी. मैंने उसके बूब्स दबाये और रमेश ने उसे अपने पास खिंच के कहा, चल जाने देंगे लेकिन हमे खुश कर दे पहले.

लड़की, क्या?

रमेश उसकी गुठलियों जैसे बूब्स को दबाते हुए बोला, अब आम का लालच माज़ा वाले बोलते हे वैसा होता हे, एकदम महंगा! कीमत देनी पड़ती हे आम के लिए! फिर उसने उस लड़की के टॉप को खोला. उसके छोटे छोटे बूब्स थे और निपल्स भी बूब्स के अन्दर ही थी अभी तो. रमेश ने ऊँगली की उसके उअप्र तो निपल थोड़ी थोड़ी बहार निकली. रमेश ने कहा, कितनी उम्र हे रे तेरी शकल से तो बड़ी लगती हे.

वो लड़की रोनी आवाज में ही बोली, 19 साल!

रमेश ने कहा, ठीक हे, लंड चूसा हे कभी तूने!

वो ना में मुंडी हिला बैठी. रमेश ने अपनी लुंगी लंड के ऊपर से हटाई उसका कडक लोहा हो रखा था. उसने कहा, ये ले केला खा फिर आम खिलाते हे तुझे. रमेश ने लड़की के मुहं में लंड भर दिया और उसके लिए चुसना बड़ा मुश्किल हो रहा था. मैंने पीछे से उस लड़की की सलवार को निचे कर दी. उसने अंदर कुछ नहीं पहना था. मैंने अपने हाथ से उसके कुल्हे हिलाए तो वो पीछे मूड के देखने लगी.

मैंने उसकी गांड के निचे ऊँगली कर के भीगी हुई चूत में ऊँगली डाली. वो सिहर उठी. मैंने अपनी लुंगी को ऊपर कर के लंड निकाल के उसकी चूत पर घिसा. रमेश का आधा लंड वो चूस रही थी. और लंड चूसने के लिए ऊपर निचे हो रही थी. मैंने अपने लंड के ऊपर थूंक लगा के पीछे उसकी चूत में डाल दिया. वो दर्द के मारे चीख पड़ी. रमेश ने उसे एक थप्पड़ मारा और उसके होंठो से खून बहार आ गया.

साली, रंडी, चोट्टी, आवाज किया तो गांड मारूंगा पकड के मादरचोद, रमेश खूब गुस्से में बोला.

मैने कहा, रमेश चल इसे पुलिस में ही दे देते हे छोड़ नहीं चोदना हे!

वो बोली, चोद लो लेकिन पुलिस को मत कहना. वो साले पैसे भी लेंगे और चोदेंगे भी!

मैं मन ही मन हंस पड़ा. और अपने लंड को मैंने पूरा अन्दर डाल दिया. वो लड़की जितनी भोली लग रही थी उतनी थी नहीं. चूत उसकी 19 साल की लड़की के जैसी ढीली नहीं थी. शायद खूब लंड लिए थे उसने और अभी यहाँ पर सीधी होने की एक्टिंग ही कर रही थी. रमेश ने पूरा लंड उसने मुहं में ठुंसा और मैं उसके बूब्स पकड के उसे चोदने लगा.

मैं कस कस के झटके दे रहा था. और वो लड़की भी गांड हिला हिला के चुदवा रही थी. साली ने लंड के ऊपर अपनी चूत के स्नायु ऐसे टाईट किये थे की मजा आ गया था मुझे.

पांच मिनिट के अन्दर मेरे लंड का पानी उस लड़की की चूत में निकल गया. रमेश ने मुझे हटा दिया और उसने लड़की को खटिया पकडवा के खड़ा किया. उसने लुंगी नहीं उतारी बल्कि लुंगी के अंदर लड़की को ले लिया था. फिर वो भी घोड़ी बना के उस लड़की को चोदता रहा.

पांच मिनिट उसके चोदने के बाद मेरा फिर से खड़ा हो गया. मैंने कहा, चल हट रमेश मैं फिर से चोदुंगा इस साली को वैसे भी बहुत दिनों से लंड को कुछ मिला नहीं था खाने को.

मैंने सेकंड टाइम इस लड़की को अपनी गोदी में ले लिया और उछाल उछाल के उसकी चूत को मारी.

रमेश उतने में बंटी और अफजल को बुला के आ गया. वो दोनों ने भी इस लड़की की चूत फाड़ी. उस आदिवासी लड़की को फिर हमने 50 50 रूपये कर के 200 रूपये दे दिए. और रमेश ने पक्के आम तोड़ के दिए.

मैं उसे दिवार के पास छोड़ने गया. उसको ऊपर चढ़ा के मैंने कहा, जब भी आम खाने हो तो यहाँ आके हमें बुलाना पथ्थर मत फेंकना पेड़ के ऊपर.

और सच में वो लड़की फिर भी आती थी. दिवार के पास से भैया भैया कह के बुलाती थी. हम उसे अन्दर लाते थे चोदते थे और पैसे और आम देते थे. पता नहीं आम खाने आती थी की लंड लेने