प्यार , सम्भोग ओर धोखा 13

उसी रात में अपने antarvasna कमरे में लेटा हुआ kamukta राधिका का इंतजार कर रहा था के तभी कमरे का गेट खुलने की आवाज आई और जिसका मुजे इंतजार था वो आ गयी थी ।

राधिका – क्या हुआ विश्वास सोए नही अभी तक तबियत तो ठीक है ना ।

विश्वास – नही राधिका जी किसी का इंतजार कर रहा हु ।

राधिका – मुस्कुराते हुए किसका वो भी इतनी रात को ।

विश्वास – वही जिसने मेरी रातो की नींद उड़ा रखी है तो उसका इंतजार भी तो रात को ही होगा ना ।

राधिका – अच्छा कब तक आएगी वो आप कहे तो में चली जाऊ में कबाब में हड्डी नही बनना चाहती ।

विश्वास – नही नही आप कही नही जाएंगी यहां रहना आपकी ड्यूटी है और रही बात उससे मिलने की तो वो में आपके सामने भी मिल सकता हु आप भी मिल लेना उससे ।

राधिका – ठीक है में नहा के फ्रेश होके आती हु तब तक वो आ भी जाएगी ।

राधिका – मन में में भी तो देखु क्या चीज है वो जो मेरा नशा इतनी जल्दी उत्तर दिया विश्वास पे से ।

फिर राधिका के जाते ही मेने रूम को सजना शुरू कर दिया कैंडल से ओर गुलाबों से बेड को सजा दिया और बीएड पे आके लेट गया और साइड में अपनी पसंद को लिटा लिया । कुछ देर बाद राधिका आई तो एक दम से चोंक गयी के ये सब क्या है ऐसे पल उसकी जिंदगी में पहली बार आ रहा था मगर वो अभी नही जानती थी के ये उसके लिए है या किसी ओर के लिए है ।

राधिका – ये सब क्या है विश्वास ओर जिसके लिए है वो आई के नही आई मुजे तो नही दिख रही है कहा है वो ।

विश्वास – यही तो है मेरे पास मेरी बहो में ।

फिर मेने अपनी माशूका जिसे मेने कपड़े से ढका हुआ था मेरे साथ रखा हुआ था उसपे से मैने कपड़ा उठाया और कहा यहाँ देखो और जैसे ही राधिका ने मेरे पास पड़े शीशे में देखा और खुद का चेहरा देख के शर्मा गयी और बोली ।

राधिका – विश्वास क्या तुम सच मे इससे प्यार करते हो मगर ये हो नही सकता इस औरत के कुछ दायरे है बंधन है इसकी कुछ जिम्मेदारी है ।

विश्वास – राधिका प्यार से बड़ा रिश्ता जरूरत का होता है मुजे तुम्हारी है और तुम्हे मेरी है रही बात प्यार की मेरा प्यार किसी एक के लिए नही है मगर जितना जिसके लिए उतना उसके लिए भरपूर है आज से तुम्हारी सारी जिम्मेदारी मेरी ओर तुम अब यही गांव में रो जहाँ कोई बंधन नही है ना ही कोई सवाल पूछेगा तुमसे बोलो तुम्हे मंजूर है तो मैने अपने दिल की बात कर दी है । इतना सुनते ही राधिका जोर से मेरे गले लग गयी और कब हमारे होंठ एक दूसरे से चिपक गए पता ही नही चला मन कर रहा था बस यही सारी रात होंठ चुस्त रह मुजे इसीमे ही जन्नत दिखने लगी थी और फिर किस्स तोड़े बिना हमने एक दूसरे के शरीर से कपड़े अलग कर दिए और फिर में उसे उठा के अपनी गोद मे बेड पे लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया और हाथो से बूब्स दबाने लगा फिर जब सांस उखाड़ने लगे तो हमारे होंठ अलग हो गए और मैने अपना मुंह राधिका के बूब्स पे ले गया और निप्पल चूसने लगा दांतो से काटने लगा और राधिका तिलमिला गयी और मेरे बालो में हाथ फेरने लगी और अपने बूब्स पे दबाने लगी फिर में हाथो से बूब्स दबाने लगा और उसके पेट को चाटने लगा चूसने लगा राधिका बिन पानी मछली के जैसे फड़फड़ा रही थी और बोल रही थी के प्लीज अब चोद दो और बर्दाश्त नही हो रहा है में मार जाऊंगी । फिर मेने अपनी जीभ राधिका की क्लीन चूत पे रख दिया और मेरी जिब रखते ही मानो राधिका हो करंट लगा हो और उसने अपनी टंगे भीच के मुजे कैद कर लिया और में मज़े से उनकी चूत चूस रहा था ओर उंगली कर रहा था के तभी राधिका का शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत से खूब सारा पानी भहने लगा और में सारा पानी पी गया राधिका अब रिलेक्स थी और मैने भी अगला वॉर करने की सोची ओर मेने अपना 10इंच का लंड उसकी चुत पे टिकाया ओर एक जोरदार धक्का के बाद मेने अपना 5इंच ला लंड उसकी चुत में डाल दिया और वो तड़प उठी वो तो अच्छा था मेने अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ रखे थे नही तो पूरी हवेली उठ के यहां आजाती फिर में कुछ देर धक्के लगता रहा जब तक वो नार्मल नही हो गयी फिर मेने एक ओर जोरदार धक्का लगाया पर पूरा चुत में उतार दिया 1 घंटे तक लगातार चोदता रहा इस बीच राधिका 4 बार झड़ी अब मेरे भी झड़ने का टाइम आ गया था तो मैने पुछा कहा छोड़ू तो उसने चुत में ही झड़ने को कहा और में उसकी चुत में झाड़ गया । पूरी रात चुदाई करने के बाद 4 बजे राधिका अपने रूम में जाके सो गई क्योंकि 6 बजे लक्ष्मी ने आना था तो दो घंटे में सो गया । 7 दिन तक अब बस यही चलता रहा