भाभी ने की हर खाहिश पूरी – पार्ट ६

अब आगे आलम अब antarvasna ये था के शाम तक समय कैसे निकाले? भाभी आज मेरे सामने नंगी ऑफिशियली होने वाली थी… चुप चुप के बहोत देख लिया था… मैंने दिन में ३-४ बार पूछा भी सही…

मैं: भाभी आप को पता हैना मुझे निमंत्रण देने का मतलब?
भाभी: कितनी बार पूछोगे, बोला ना के सिर्फ देखने का ही आमंत्रण है.. और कुछ नहीं…
मैं: हा पर आप सिर्फ नंगी ही नही देखोगी…
भाभी: सेक्स करते हुए भी देखना है… बस?
मैं: ह्म्म्म तुम कितनी अच्छी हो… आज से मैं कभी भी तुजे आप गलती से भी नही कहूँगा… क्योकि आज तो तू मेरे खास बन जायेगी…
भाभी: ह्म्म्म वो तो है…
मैं: अभी कुछ टिप्स दू क्या? के मैं क्या क्या देखना चाहता हूँ?
भाभी: ठीक है बोल…
मैं: आज तू नहाने जाना पहले और गीली ही बहार आना… एक छोटा सा टॉवेल ओढ़े भैया के सामने आना…
भाभी: काफी खुराफाती दिमाग है तेरा… ऐसा सूझता कैसे है तुजे?
मैं: तुजे देख देख कर…
भाभी: चल एक जप्पी ले ले…
मैं: सच?

और भाभी मुझे लिपट गई.. मैंने भी खूब दबोचा… पर भावनाओ में बहा नहीं… पर हाथ घूमते वख्त मैंने जो महसूस किया वो बताया…

मैं: जैसे अभी नहीं पहना वैसे तभी भी मत पहनना…
भाभी: धत् बदमाश… चल रात को मुझे देखने आ जाना… तेरा लाइव पोर्नो….

हम दोनों हँस पड़े… भाभी को मेरे साथ कम्फर्ट महसूस होने लगा था… ये सब अब साबित हो रहा था… पर भैया का प्यार और भैया के लिए प्यार उसे बंधे रखा था.. जो सिर्फ वही तोड़े तो ही उसे पाने का कुछ अलग सुकून मिले… जैसे तैसे दिन निकल गया और रात को भाभी रूम में जाते ही फ़ोन किया… खूबसूरत जिस्म के साथ खूबसूरत दिमाग भी… पता था के अगर मैं फोन करू तो गड़बड़ हो सकती है… फोन रखा पलंग के एकदम नज़दीक…

भाई: अरे आज तो मैं बहोत थका हूँ…
भाभी: अरे अभी थकान मिटा देती हूँ… आपके लिए कुछ खास सोचा है मैंने…
भाई: क्या मेरी रांड?
भाभी: अभी आती हूँ, अभी मत आना (लास्ट वाली लाइन मेरे लिए ही थी)
भाई: जल्दी आना…

थोड़ी देर बाद भाभी अंदर से बोली…

भाभी: लाइट व रखना और पडदे बंध मत करना आज आपकी पसंद का…
भाई: अरे आना प्लीज़…
भाभी: आ रही हूँ…

और मैं धीरे से उनकी बाल्कनी में दाखिल हुआ… भाभी ने बाथरूम का दरवाजा खोला और अपना एक पैर बहार निकाला… पूरा गिला था… उनकी थाई से लेके पानी की बुँदे पैरो तक निचे एक धारा बना रही थी… जैसा मैंने सोचा था कुछ वैसा ही…

भाई: अब आ भी जा रंडु

भाभी अंदर से पूरी गीली और नज़ारा कुछ ऐसा था…

मैं सोचा साला भाभी के पास ये लिंगरी आई कहा से? अब क्या गलती निकाल के कल कुछ सिखाने की कोशिश करू? भाभी तो एक नंबर निकली… भैया ने तुरंत ही भाभी को बूब्स से पास होते हुए कपड़े की लाइन से पकड़ा और अपनी और भाभी के गीले बदन को खीच के अपने आगोश में लिया…

भैया: चल अंदर ही चोदता हूँ
भाभी: ना यही पर…
भैया: सब गिला हो जायेगा…
भाभी: नहीं आपको पसंद है न… कोई बात नहीं…

भाभी के बदन पर का पानी भैया चूस भी रहे थे और खुद भी गीले हो रहे थे… इतनी माल बीवी हो तो खुद को कोई किस तरह बचाए? भाभी का बदन था भी इतना गोरा चिट्टा… और क्या भरे भरे बूब्स थे… जाली से निकलते निप्पल भाई का हाथ न पड़े ऐसा हो ही नही सकता… एक हाथ से हॉर्न बजाओ और एक मुँह में लेकर चूसो, और औरत सिर्फ आह आह करे तो चुदाई का मज़ा डबल हो जाता है, और मर्द अपने आप पे फक्र महसूस करता है… जो अभी भैया कर रहे थे…

भैया भाभी का ये मिलन जलन जरूर पैदा कर रहा था पर भाभी का ये आँखों देखी वासना से पता चल रहा था के भाभी और मेरी रंडी के बिच के फासले और भी कम होते जा रहे है… आज नंगी हुई है सामने, मेरे सामने चुदवा भी रही है… मेरी ख्वाहिश पूरी होने को अब कुछ दिन ही बाकी थे…

भाभी थोडा जुकी ही थी के भैया ने अपने कपडे निकालना शुरू कर दिया… पेंट निक्कर अगर औरत निकाले तो ज्यादा अच्छा रहता है… मर्द यही चाहता है… भाभी ने वही किया था… गांड बहार निकली और भाभी निचे बिस्तर पर बैठी और भाई का पेंट हटा रही थी, भैया ने शर्ट निकाल ली थी तब तक… भैया का निक्कर निकलते ही लंड उछल पड़ा और भाभी ने लबक के अपने मुह में ले लिया…. भाभी भैया के आँखों में देख रही थी और लंड को धीरे धीरे चूस रही थी… और एक बात है… लंड चूसने के टाइम पर अगर औरत अपने मर्द की आंखोमें आँखे डाले तो मर्द को और मजा आता है… इसका कारण है की जब वो ऊपर देखती है.. उनके आधे मम्मे दीखते है… कुछ ना दिखाने के बहाने कुछ दिखादो तो वासना बढ़ जाती है… जो अभी हो रहा था…

भाई ने ये लिंगरी ले गले के भाग में डोरी थी वो खोल दी… वैसे भी पीछे तो गांड तक खुला था… पर भैया को वासना में शायद के लिंगरी जिसमे ऊपर कुछ था ही नही वो परेशान कर रहा था… भाभी के मम्मे डायरेक्ट हाथ में नहीं आ रहे थे… भैया की वासना और बढ़ाने भाभी ने लंड बहार निकाला अपने मुह से और पलंग पर उलटी लेट गई. और डीप थ्रोट का अलग लेवल दिखाया…

भाभी अगर पूरा साथ दे रही है, अपने शरीर को इस तरह मसलवाने में, तो कोई भी मर्द अपनी अलग अलग ख्वाहिश पूरी करेगा ही… भाई डीप थ्रोट में भाभी के मुह को चोदे जा रहे थे और ये बड़े बड़े स्ट्रोक लगाने भाई ने अपने दोनों हाथो को सहारे दिए थे भाभी के मम्मो पर… दो काम एकसाथ हो जाये… चोदने के लिए सहारा और स्तन मर्दन… भाई तो स्तन पर थप्पड़ भी दे धना धन लगा देते थे… लाल तरबुच हो गए थे ये गीले रसीले आम… क्या नज़ारा था.. मैं भी अपना लंड निकाले हिला रहा था… पर मज़ा इतना नही आ रहा था… नहीं ही आएगा… पर इसी स्थिति में भैया की स्पीड और तेज़ हुई और मुँह में ही अपना वीर्यदान कर दिया… भाभी सब पी गई जगह पर खड़ी होकर आगे आई और सारा लंड चूस चूस कर साफ किया और लंड साफ होते ही भाभी को खड़ी कर के उसकी पेंटी निकाल ने लग गए… और फिर गीली पेंटी जैसी चड्डी उतार के भाभी को धक्के से सुलाके उनके दो पैरो के बिच आ गए… और चूत चूसना शुरू कर दिया…

भाई चूत को मुँह से चोदने में आँखे बंध करके व्यस्त थे… और भाभी आह… आउच के साथ साथ मेरा भी खयाल किया? पर कैसे? इस सिचुएशन में भाभी का सर मेरी और था, बाल्कनी की विंडो की तरफ था…

भाभी इसी तरह मज़े ले रहे थे और अचानक से आँखे खोले मेरी और देखने का प्रयास किया… मैंने हाथ ऊपर करके होने का इशारा किया और मैंने 👍 का भी इशारा किया… भाभी होठो को दबाकर… हाथो से इशारा किया के मैं बाल्कनी में कुछ देखु… यहाँ पर अब मैं क्या देखु? निचे तो अँधेरा था… मैंने फ्लेश लाइट फटाफट जला कर बंध कर दी, सिर्फ एक सेकेण्ड में तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा… वहा भाभी की ब्रा पड़ी थी… और एक पेंटी भी… भाभी को ख़याल था के मुझे जरूरत पड़ सकती है तो मेरा इतना खयाल करके रख्खा वो मेरे लिये और एक इशारा था। वाह क्या नसीब था मेरा भी… भाभी एक औरत… एक मर्द को चाहे खुदका पति हो या गैर मर्द जिससे कम्फर्ट हो चुकी हो… उसे खुश करने के सारे प्रयत्न करती है… दूसरी बार जब उसने देखा तो ये ख्याल करने के लिए के मुझे वो मिला के नहीं… मेरे पेंटी को तो मुह में डाल दिया था और ब्रा को अलग से पकड़ कर हवामे लटका रहा था, तो भाभी ने भी स्माइल देकर 👍 इशारा किया और चूत चुदवाने में वापस लीन हो गई। थोड़ी ही देर में भाभी का चूत पानी निकाल ने लगा जो भाई सारा पी गए… मैं पेंटी को सूंघने में और ब्रा को लंड के चारो और फसा कर मास्टरबेट कर रहा था…

अब भैया बोले: चल तेरा हो गया न तो फिर मेरा खड़ा कर वापस…
भाभी: जो हुकुम आका… आज आप को चूत मारनी है या गांड?
भैया: तुजे क्या मरवाना है? चल सोचता हु तु टाइम खोटी मत कर लंड खड़ा तो कर… वैसे मुझे तो दोनों मारने है… साथ देगी ना…?

भाभी ने हा मिलाते हुए मिशन के अगले पड़ाव पर आगे निकल गई…