सरपंच बनने के लिए

पुरे बहादुरपुर Antarvasna गाँव में चुनावी माहोल छाया हुआ था. जो एक ग्लास में लुल हो जाते थे उन्हें भी बोतले मिलने लगी थी. शाम होते ही किसी न किसी उम्मीदवार के वहां दावत होती थी या फिर नचनियां और लौंडे डांस की पार्टियों का शोर-गुल रहता था. इस बार की सिट लेडीज़ अनामत की थी और सरपंच लेडिज को ही होना था. मुन्ना की चाची बालो ने भी फॉर्म भरा था. और वो भी खूब कुश्ती लड़ रही थी इस चुनाव में सरपंच बनने के लिए. और कैसे उसके पति ने ही बालो की चूत चुदवाई वो आप इस कहानी में पढेंगे.

शाम होते ही बालो सज धज के चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ती थी. कभी महंगी साड़ी तो कभी रुआबदार पंजाबी सूट सलवार. पति हरीश ने ही डिजाइनर बनने का भी जिम्मा लिया था. माहोल काफी गरम था चुनाव की वजह से, कौन सा प्यादा कब बदल जाए अपनी चाल वो कह नहीं सकते थे.

खेत के किसानो को तो नोट के बदले वोट का सौदा कर के कुलदेवी के मंदिर पर सौगंध और शपथ दिलवाई जा चुकी थी. अब वो वोट तो जेब में ही थे. लेकिन गांव के वोटों की जबरदस्त खींचातानी थी. जो बालो के सगे थे वो दुसरें उम्मीदवार के भी रिश्ते में थे. और उन्के वोट किधर को पड़ेंगे वो कुछ कहा नहीं जा सकता था. एक शाम को शराब बांटने के बाद हरीश घर वापस आया.

बालो: कैसा रहा जी आज का दिन?

हरीश: डेढ़ हजार लिटर खप गया आज भी, साले मुफ्त की मिल रही हे इसलिए पानी की तरह पी रहे हे, मादरचोद लोग सब्जी तरकारी भी इसी में पकाते हे क्या!

बालो: बहुत खर्चा हो रहा हे जी.

हरीश: घबरा मत संदीप की माँ, चुनाव तो हम ही जीतेंगे. लेकिन तुझे कुछ कुर्बानी करनी पड़ेगी इसके लिए?

बालो: अरे मैं इतनी सब आप के लिए ही झमेले में पड़ी हूँ, मैं तो पहले से कहती थी की राजनीति बड़ी कुत्ती चीज हे, किसी का कोई सगा नहीं होता हे.

हरीश: हां साले, जो देता हे सब का ले रहे हे, अब पता नहीं ठप्पा किसे लगायेंगे.

बालो: आप कुछ कह रहे थे?

हरीश: अरे हां, वो लाला जी मिले थे. उनके फेमली और किसानो वगेरह के 250 वोट हे. बड़ी फेमली हे और वो जो कहते हे उसे सब लोग अंधे के जैसे ठप्पा लगाते हे.

बालो: तो आप बतिया लिए के नाही?

हरीश: बात तो करे हे पर उनकी डिमांड कुछ अलग और बहुत ज्यादा हे.

बालो: मतबल?

हरीश: मतबल इ की उनको पैसा और शराब चाहिए.

बालो: तो आप उन्हें कहो की हम इमानदारी से काम करेंगे.

हरीश: अरे अब इ बखत में कौन सा राजनेता इमानदार हे, और उसे तो चुनावी वादे ही लग रहे हे. वो कीमत पहले मांग रहा हे.

बालो: अभी तो आप कहे की उसे पैसा नहीं चाहिए!

हरीश: दरवाजे की कुण्डी लगा फिर बात करते हे.

कुण्डी लगा के बालो अपनी कुर्सी में वापस बैठी. वो बेताबी से हरिश के बोलने की वेट कर रही थी. हरीश ने एक गहरी सांस ली और जैसे बहुत बड़ी बात कहनी हो वैसे इधर उधर देखा एक बार उसने. उसकी ऐसी हरकतों से बालो का दिल जोर जोर से धडक रहा था. ऐसा क्या मांग लिया था लाला जी ने?

हरीश: देखो ये करना पड़ेगा हमें, चुनाव के लिए!

बालो: पर बोलो भी तो की क्या करना हे?

हरीश: बस एक बखत लाला की लुगाई बन जाओ रातभर!

बालो की आँखे खुली की खुली रह गई. उसने अपने दुपट्टे को मुहं में ठूंस लिया. चुल्लूभर पानी होता तो शायद वो हरीश को बोल भी देती की जाओ उसमे डूब जाओ! भले ही बालो बोलने में फाडू थी लेकिन उसने किसी पराये मर्द की तरफ गन्दी सोच नहीं रखी थी. और हरीश को भी ये बात पता ही थी.

बालो: अरे इ क्या अनाप सनाप बक रहे हो आप. लाला को दो तमाचे लगा देते!

हरीश: संदीप की माँ, इस चुनाव का बखत हे यहाँ रिश्ते पकड के रखने होते हे.

बालो: ओ का मतबल इ थोड़ी न हे की उ कुछ भी बोले और हम सुन ले!

हरीश: ओ कुछ गलत नहीं बोला, रमेशवा की बीवी जानकी भी इ सब कर रही हे. लाला तो फिर भी साफ़ सुथरा हे, जानकी तो झोपडीवालो के साथ झोपड़े में दोपहर को ही घुस के सब कुछ करवा रही हे.

बालो: बाप रे बाप, इ कैसा चुनाव! साला इज्जत तक नीलाम.

हरीश ने एक गहरी सांस ली, उसे पता था की वो जो कहनेवाला हे उस से बालो की गांड फट के हाथ में आ जायेगी. वो बालो को देख के बोला, एक बात कहे?

बालो: हां बोलिए.

हरीश: हम्म्म्म लाला को हाँ कह दिए हे!

बालो: दैया, हमसे पूछे बगेर ही! इ सब हमसे ना होगा देखो जी, आप परचा वापस ले लो.

हरीश: अरे अब तो हम डेढ़ लाख से ऊपर खर्चा कर चुके हे चुनाव के पीछे.

बालो: हमारी ही मत मारी गई थी जो हम पर्चे के लिए आप को हाँ कह दिए. आप को उ बखत ही मना कर देते तो सही रहता.

हरीश ने अपने माथे की पग को निकाली और अपने मुहं के ऊपर आये हुए पसीने को पोंछने लगा. बालो ने उसकी तरफ देखा. लेकिन हरीश उस से आँखे नहीं मिला पा रहा था.

बालो: अब बोलिए क्या करेंगे?

हरीश: अब कितनी बखत बताये की हम लाला को हाँ कर दिए हे!

बालो: फिर बुला लीजिये, इ दिन भी देखही लेंगे हम!

हरीश: वो कल रात को आएगा.

बालो गुस्से से बोली: इ का मतलब आप सब फिक्स कर के ही आये हे!

हरीश कुछ नहीं बोला क्यूंकि बालो की बात सही थी. लाला को चुदाई के लिए बोल दिया था. हरीश ने गाँव में बहुत गप लगा दी थी की हम इस चुनाव में बिना किसी मुश्किल के जित रहे हे. लेकिन जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आई और लोगों ने रंग और पार्टी बदलनी चालू की तो उसे लगा की वो हार भी सकते हे. उसके कुछ दोस्तों ने भी अंदरूनी सेटिंग की थी जिसकी भनक उसे लगी थी. और लाला के 250 वोट agar बालो को मिल जाए तो वो आराम से जित सकती थी. हरीश की फेमली और लाला के वोट से ही 50% से ऊपर काम बन सकता था.

बालो दुसरे दिन शाम को घर पर ही थी. हरीश ने एक ट्रांसपैरेंट साडी उसे ला के दे दी और बोला: इ पहन लेना, लाला जी ने भेजी हे.

बालो ने साडी झूंट ली हरीश से और कुछ नहीं बोली.

शाम के 7 बजे लाला की फटफटी आंगन में रुकी. मुन्ना जो हरीश का भतीजा था वो फटफटी की आवाज सुन के खुश खुश हो गया. गाँव में बाइक्स बहुत थी लेकिन ऐसी पुरानी मॉडल की फटफटी एक लाला के पास ही थी. ऐसे कहे की लाला इस फटफटी से ही मशहूर थे. बालो कमरे में घुसी और उसने वो साडी पहन ली. साडी के अंदर उसका ब्लाउज साफ़ दिख रहा था. लाला ने जो साडी भेजी थी वो पहनो या न पहनो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था. हरीश ने निचे लाला को चाय पानी करवाया.

कुछ देर के बाद लाला को ले के हरीश ऊपर के कमरे की तरफ आया. दोनों की कदमो की आवाज सुन के बालो के दिल की धडकन एकदम से तेज हो गई. लाला को कमरे में बिठा के हरीश ने कहा: चलो आप दोनों चुनाव की रणनीति पर साझा कीजिये मैं जरा पंडालवाले से मिल के आता हूँ.

लाला: हरीश भाई जाते बखत कमाड खिंच लेना बहार से!

हरीश बेशर्म के जैसे निकल गया रूम से. लाला बालो के करीब आया और उसके थरकते यौवन को निरखने लगा. लाला बोला: बालो जी चुनाव तो आप ही जीतेंगी कुछ भी कर के, हम हे न आप के लिए महनत करेंगे जम के.

बालो कहना तो चाहती थी की साले हरामी मेरे बाप से थोडा ही छोटा हे और मुझे चोदने आया हे चुनाव के चारे को डाल के. पर अपना पति ही जब साथ ना तो एक औरत क्या कर सकती हे भला. उसके सूखे हुए गले से सिर्फ एक ही शब्द निकला.

बालो: जी!

लाला: हरीश सब बात कर लिए हे ना आप से?

बालो ने फिर वही शब्द कहा.

लाला ने अंगडाई सी ली और बोला, चलो बढ़िया हे! मेरा काम घटा.

फिर वो अपनी कुर्ती के बटन को खोलने लगा. उसकी बहार निकली तोंद पर हाथ रख के उसने कुर्ती निकाली. फिर कुर्ती को खिंट पर टांग के उसने निचे सफारी पेंट के जिप को खोला. बालो नयी नवेली दुल्हन के जैसे बिस्तर के ऊपर बैठी थी. और लाला जैसे नंगा होता हुआ दूल्हा! लाला सिर्फ बड़ी लम्बाई वाली चड्डी में था एक मिनिट में. उसने बनियान, पेंट, कुर्ती साब टांग दिया खुंट पर और वो बिस्तर पर चढ़ गया. जवान बनने की सब कोशिशे कर ली थी उसने. सफ़ेद हुए बालो को आज दिन में ही उसने महंदी लगवा ली थी ब्लेक वाली. और अपने मुछो को भी कुतरवा के सेट करवाई थी नाइ से. एक बेटा जो शहर में पढता हे उसने लाला को सेंट दिया था उसे बगल में और कपड़ो पर लगा के वो आया था बालो को चोदने.

लाला ने बालो के कंधे पर हाथ रखा. डर की एक ठंडी लहर बालो के बदन में दौड़ सी गई. उसका बदन सुन्न सा हो रहा था. लाला ने मुखड़े को हाथ से अपनी तरफ किया तो बालो शर्मा के निचे देख रही थी.

लाला: अरे अब इतनी भी काहेकी शर्म भाभी जी, आप को भी मजा मिलेगा पूरा, हम इंग्लिश स्टाइल में करेंगे.

ये कह के ठरकी लाला ने बालो के पेट के ऊपर हाथ रखा. सांस तेज चल रही थी इसलिए बालो का पेट भी ऊपर निचे हो रहा था. लाला के हाथ एकदम गरम थे. उसने बालो के पेट को सहलाया और फिर नाभि बिंदु के ऊपर ऊँगली रख के हिलाने लगा. बालो अब थोड़ी उत्तेजित हो रही थी. फिर भी उसे ये सब अजीब लग रहा था. लाला ने अपने दुसरे हाथ को काम में लिया. वो उसने बालो को जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा. बालो की जांघ एकदम चिकनी थी और लाला के हाथ सिल्की साडी की वजह से जैसे फिसल रहा था. बालो भी अब मस्ती में आ रही थी. हरीश ने ऐसे प्यार भरे सेक्स किये हुए ज़माना हो गया था. लाला का हाथ कुछ देर में तो बालो की बुर पर था. चुदवाने के लिए वो दोपहर में ही कटरीना कैफ वाली विट से अपनी झांट को निकाल चुकी थी. उसकी मुनिया एकदम मुलायम थी उ बखत. लाला ने चिकनी बुर का स्पर्श मिलते ही अपने आनंद की सीमा को खो दी. उसने साडी के ऊपर से ही बालो के बुर के छेद को टटोल लिया और उसे हिलाने लगे. बालो भी अब आह आह करने लगी थी लाला की ऊँगली की ताल पर!

लाला ने बुर के अन्दर ऊँगली की तो उसे चिपचिपा सा लगा. वो समझ गया की बालो भी मस्तिया गई थी. लाला ने अब पेट के ऊपर से हाथ लिया और उस हाथ से बालो का हाथ पकड़ लिया. हाथ को अपने मुह के पास ले के लाला ने चूमा. और फिर धीरे से उसे अपनी चड्डी के ऊपर रख के बालो को लंड पकड़ा दिया. बालो ने लंड का अहसास लिया तो वो चौंक सी गई. उसे तो था की लाला का लंड झुर्रियों वाला होगा. लेकीन यहाँ तो मामला ही काफी अलग था. लाला का लंड किसी जवान लड़के से भी सख्त था. लाला ने वाएग्रा खाई थी वो बालो को थोड़ी पता था 😉

हरीश के लंड से भी सख्त था लाला का. और अब बालो इस कडक लंड को अपने हाथ से पकड़ के सहला रही थी. कुछ देर में ही लाला का लंड एकदम कडक और तन गया. लाला ने अपनी चड्डी बिस्तर पर बैठे हुए ही खिंच ली. और अब डायरेक्ट लंड से टच कर लिया बालो ने.

लाला ने बालो की साडी पकड़ी और उसे खोली, अंदर मेचिंग रंग का ब्लाउज और ब्लेक ब्रा थी. लाला बालो के छाती के उभार को देख के मचल सा गया. उसने ब्रा में हाथ डाल के मम्मे मसल दिए. और बुर के ऊपर वाले हाथ को छेद में डाल के उसे हिलाने लगा. बालो को भी बहुत मजा सा आ रहा था. वो आह्ह्ह्ह अहह ह्ह्ह्हह कर रही थी.

लाला अपने होंठो को बालो के कान के पास ले आया. कानो को थोडा सा काट के और किस कर के वो बोला: मेरी रानी को तो हम गाँव की सरपंच बनायेंगे!

तभी बालो ने लाला के लंड को मुठ्ठी में जकड़ के उसे हिलाया.

लाला: रानी सिर्फ हिलाओ नहीं अपने मुह में भी ले लो. बालों ने निचे झुक के सरपंच बनने के लिए इस लंड को अपने मुहं में ले लिया. लाला ने लंड चूसाते हुए ही बालो को पूरा नंगा कर दिया. वो केवल पेंटी में थी और लाला का लौड़ा चाट रही थी.

लाला ने अब बालो से कहा, रानी हम भी तेरी मुनिया चूसेंगे.

बालो ने अपनी पेंटी खिंच ली. लाला ने उसके साथ 69 पोजीशन बनाई. बालो ने अपनी लाइफ में सिर्फ मिशनरी पोज में चूत और डौगी स्टाइल में गांड मरवाई थी. आज के ये सब पोस उसके लिए नये थे. और इस वजह से उसे भी अलग फिलिंग हो रही थी.

लाला की जबान जब उसकी बुर पर लगी तो बालो को लगा की भले लाला सरपंच ना बनाये पर मुनिया को ऐसे ही चूसता रहे एक घंटे तक.

लाला के लौड़े को उसने मुहं में डीप तक डाला और मस्ती से सक करने लगी थी. उसकी बुर चटवा के जो मजा उसे मिल रहा था वही मजे को वो लाला का लंड चूस के उसे वापस दे रही थी!

लाला भी फुल एक्शन में था. वो मस्ती से बस आह आह आह करता गया. और उसके होंठो से वो बालो की बुर को चूसता गया.

बालो ने मजे से कुछ देर चूत चटवाई और लाला के लंड को उसने खूब चूसा. लाला के मजेदार ओरल सेक्स ने उसे दो बार झाड दिया था. और लाला ने अपनी जबान से चूत के सब दहीं को चाट लिया था. बालों मन ही मन सोच रही थी की उसके पति ने पूरी लाइफ एक ही सही काम किया था की उसे लाला से मिलवा दिया.

लाला को भी पूरा मजा आ रहा था. वो अपनी जबान को ऐसे घुमा रहा बुर के अन्दर जैसे वहां पर शहद लगा हुआ हो और वो बहुत सालों का भूखा हो! बालो की चूत में से और एक बार पानी निकाल दिया लाला ने. और उसका लंड तो अभी ज्यों का त्यों खड़ा था. अब लाला ने बुर में से जबान निकाली, उसकी मूंछो के बाल पर भी बुर का दही लगा हुआ था.

बालो ने उसे इशारे से दिखाया और अपनी जबान को बहार निकाल के लाला ने उसे अपने मुहं में ले लिया. बालो को लाला का ये अंदाज खूब अच्छा लगा. वो अब लाला के गिले लंड को हाथ में पकड़ के हिला रही थी. लाला का लंड किसी चट्टान की तराह सख्त था. हरीश होता तो अभी 4 बार पिचकारी मार दी होती उसने.

लेकिन ये तो वाएग्रा वाले लंड का कमाल था जो बालो नहीं जानती थी.

अब लाला ने बालो को कहा, चलो खड़े खड़े करते हे.

बालो: खड़े खड़े घुसेगा कैसे?

लाला: उसका भी रस्ता हे ना.

फिर लाला ने बालो को खड़ा किया और उसकी एक टांग उसने पलंग के ऊपर रखवा दी. बालो को थोड़ा आगे झुकाया और पीछे से अपने लंड को उसने चूत में पेल दिया. लंड जब घुसा तो बालो के मुहं से सीईईईइ निकल गया. लाला ने बूब्स मसले और बोला, मैं पूरा अन्दर कर दूँ तब इस पाँव को भी जमीन पर रख देना हे.

बालो बोली, निकल आएगा बहार.

लाला: नहीं आएगा मेरी रानी.

लाला ने बूब्स मसलते हुए एक और धक्का दिया और पुरे लंड को धकेल दिया अन्दर. बाला के मुहं स दर्द भरी सीत्कार निकल पड़ी. लेकीन उसे ये बड़ा लंड ले के मजा भी खूब आया. वो धीरे स ऊपर वाले पैर को निचे ले आई. लाला ने उसे कमर से पकडे रखा. और जैसे लाला ने कहा था लंड बहार नहीं आया. हालाँकि आधा ही लंड सही जगह पर था. पर लाला का लम्बा था इसलिए जितना बुर में था उतना काफी था बालो के लिए.

अब लाला अपने बदन की शक्ति को लगा के बालो की बुर चोदने लगा. और साथ में वो उसके चिकने बदन के ऊपर अपने हाथ को घुमा भी रहा था. बालो भी कुल्हे हिला के लंड को मजे से चूत में हिलाने लगी थी.

कुछ देर में तो लाला के लंड के झटको से दर्द होता था वो चला गया. और बालो को चुदाई का सुख मिलने लगा था.

लाला ने झटके तेज कर दिए और लंड फिसल के बाहर आ गया. बालो ने हाथ गांड के निचे से निकाला और लाला के लंड को वापस चूत की राह दिखा दी. लाला ने फिर से धक्के चालु कर दिए. और 10 मिनिट तक ऐसे ही खड़े खे उसने बालो को चोदा.

फिर लाला ने अपने लंड को बुर से निकाला और बोला, अब घोड़ी बन जाओ भाभी.

बालो बिस्तर में लेट के गांड को ऊपर उठा के लाला के लिए कुतिया बन गई. लाला ने अपने सख्त लंड को बुर में पीछे से डाला. अब कही जा के पूरा लंड बालो की बुर में पेला गया था. उसे फिर से थोडा थोडा दर्द हुआ. लेकिन मजा भी उतना ही था इस बड़े लौड़े को ले के. वो मजे से अपनी गांड को हिला रही थी. और लाला ने कस कस के धक्के लगाये.

10 मिनिट चोदने के बाद बालो के कान में लाला ने कहा,. अंदर ही छोड़ देता हु मेरा पानी.

बालो मस्तियाँ हुई थी, वो बोली, हां लाला जी अन्दर ही निकाल दो अपनी पिचकारी को.

लाला ने अब कुछ झटके एकदम तेजी से मारे. और उसके लंड से गाढे वीर्य की पिचकारियाँ छुट गई. बालो का बुर पूरा भर गया और वीर्य बहार ओवर फ्लो भी होने लगा था. चूत का दही और लाला का वीर्य मिक्स हो गया. और बालो की बुर से ये मिश्रण बहार निकलने लगा था. बालो भी तृप्त हो गई थी और लाला को भी सकून मिल गया था.

लाला ने अपने खुंट पर टंगे हुए कपडे लिए और उन्हें पहनने लगा. बालो का मन तो बहुत हुआ की वो लाला को कहती की एक बार फिर से करते हे. पर वो अपनी मन की मन में ही रख गई.

हरीश का आवाज आया निचे कुछ देर में. लाला और बालो ने कपडे पहन लिया.

लाला सीड़ियों से उतर रहा था और हरीश उसे वही मिला. हरीश के दोनों हाथ अपने हाथ में लेते हुए लाला ने कहा, आप के सब वोट पक्के, भाभी ने चुनाव के लिए बहुत महनत की हे, आशा हे की ऐसी महनत वो चुनाव के बाद भी करेंगी.

बालो साडी के पल्लू को ठीक करते हुए बोली, लाला जी आप के लिए हम आधी रात को भी महनत करेंगे!

और फिर अगले हफ्ते चुनाव हुए. बालो सरपंच बन गई. और उसके जलूस में लाला अपनी छड़ी को उठा उठा के नाच रहे थे