भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी 2

भैया की जब शादी antarvasna हुई थी, तब माँ kamukta बाप ज़िंदा थे। और सिर्फ १ साल में ही हादसा हुआ और चल बसे। घर में भाई के ऑफिस जाने बाद, में भी कॉलेज चला जाता था। घर में भाभी अकेली ही रहती थी। पसंद आये ना आये पर यही होता था। भैया को ऑफिस जाना पड़ता था, सब जिम्मेदारी उनके ऊपर थी, और मैं तो ठीक कभी जाता था कॉलेज तो कभी नहीं। कॉलेज के दिन तो यही होता है ना….?

पर माँ बाप के जाने का सदमा मुझे इस कदर लगा था के, मैं कॉलेज की परीक्षा में फ़ैल हुआ। भैया कभी गुस्सा नहीं करते मुज पर, और उस दिन भी नही किया, मुझे पास बिठा कर शांति से समजाया के संसार का यही नियम है। तुम्हे धक्का जरूर लगा है, मुझे भी लगा है, पर हमारे माँ बाप तभी सुखी होंगे जब हम कामयाब होके बताएँगे….

बात भी सही थी उनकी… पर मेरा एक ही कन्सर्न था के भाई तो फिर भी ठीक है, रात को अपनी फ्रस्ट्रेशन निकाल देते होंगे, भाभी भी पूरा दिन भैया के लिए अपने आपको संवारती थी, और रात को भाई की बाहों में टूट के बिखर जाती थी। मैं भाई का बिस्तर गरम होते कई बार देख चूका था। शायद चस्का लग गया था मुझे, भैया और भाभी की चुदाई देखने का। भाभी को नंगा देखने की तलब ऐसे खत्म होगी ये नही पता था मुझे। हर रोज़ भाई भाभी आगोश में लिपटे एक दूसरे को सुख देने में नही पर एक दूसरे से सुख लेने में लगे होते दीखते थे। भाई का चहेरा सुबह और खिल जाता था।

कई बार ये सवाल ध्यान में आता है, की कोई गुज़र जाए तो चुदाई करनी चाहिए या नहीं? मैं कहता हु के हा, मन हो रहा है तो कर ही लेनी चाहिए तो ही आपका दिमाग शांत रहेगा और लड़ने की ताकत मिलती रहेगी…

तो यही बात थी जो मुझे खटक रही थी की, अब मेरा कौन… मुझे कई बार खयाल आता था के मैं रंडी बाजार चला जाउ। और अपनी वासना को शांत कर दूँ। पर ये इतना आसान नही होता। तो बस मैं शांत होने लगा, और शांत, और शांत… भैया ने मुझे छूट दे दी थी की अगर एक साल ड्रॉप लेना चाहते तो ले सकते हो और घूमने जाना चाहते तो वो भी कर सकते हो… मानसिक सपोर्ट भैया और भाभी दोनों दे रहे थे… पर शायद मुझे शारीरिक सपोर्ट चाहिए था….

भैया वैसे सब समजते थे, क्योकि वो शादीशुदा थे….

एक दिन की बात है, मैं कॉलेज नहीं गया था, और भाभी मुझसे बाते कर रही थी अचानक मुझसे पूछा
कीर्ति: भैया आपके कोई फ्रेंड्स नहीं है क्या जहा आप अपने दिल की बाते शेयर कर सको? (वो मुझे रिश्ते के कारन भैया बुलाती थी)
मैं: हा है तो सही भाभी पर सब मतलबी होते है, कुछ कुछ लोग सही भी है, जो मेरी केर करते है, पर ठीक है, मैं दुरिया बनाता हूँ।
कीर्ति: ऐसा क्यों भला? जब तक जानोगे परखोगे नहीं तब तक कैसे पता चलेगा?
मैं: हम्म बात तो सही है आपकी.. ठीक है मैं कोशिश करूँगा।

यही वार्तालाप मेरे हसीन पलो को दस्तक देंगी ये पता नहीं था… मैं अपने दोस्तों से मिलने लगा… सब के साथ मस्ती मारने लगा… अच्छा लगा और में नेक्स्ट परीक्षा में पास भी हुआ !!!!! में मन से खुश रहने लगा था… दोस्तों के साथ बात करता तो पता चला के सब कोई न कोई लड़की पे मरता है कैसी फेंटेसी लेके बेठे है, एक अजीब रोमांच देता था, पर वासना को और भड़का रहा था… मिलके अब हम सिर्फ ५ फ्रेंड्स है…. केविन, सचिन, राजू, कुमार और मैं…

केविन के पापा बहुत बड़े बिजनसमैन थे, सचिन के पापा किराने की दुकान थी, राजू के और कुमार के पापा मजदुर थे तो लॉन लेकर पढ़ते थे… पर हमारे बिच पैसा नही था, बस विश्वास और प्यार था… उसीके कारन दोस्ती इतनी गहरी हुई थी…

इक बार हम पांच जन बैठे थे और शांति से मोबाईल में देख रहे थे के, वासना से अँधा मैं बोल पड़ा…
मैं: मैंने अपने भाई भाभी की चुदाई देखी है…
थोडा सन्नाटा जरूर हुआ पर…
केविन: भाई ठीक है पर ये क्या बोल दिया तूने?
मैं: नहीं पता शायद मैं अपनी भाभी को….
केविन: (बात काटते हुए) प्यार करने लगा है?
मैं: शायद हा….
केविन: क्या वो जानती है?
मैं: नहीं… क्योकि अभी तक मैं ज़िंदा जो हूँ…
राजू: पर ये गलत है…
मैं: पर क्या करू? पोर्न देखो भाभी देवर, वार्ता पढ़ो भाभी देवर… सब जगह भाभी देवर… और ये एक ही तो औरत है तो मेरे सब से करीब है…

सब शांति से सुन रहे थे मैं बोले जा रहा था…

मैं: सुबह उठो… एक चाँद सा चहेरा नज़र आता है… घर में पायल की आवाज़ खन खन करती रहती है… पसीने से लथबथ जब उसकी कमर दिखती है तो होश खो बैठता हूँ। पूरा दिन काम करके आराम करे तो जब सोती है तो बाहे और तड़पाती है… उसके छाती के उभार… और ब्लाउज़ के हुक पर आते प्रेशर कुछ अलग सा रोमांच पैदा करती है… कपडे धोती है तो भीना बदन मेरे अंदर आग लगा देता है… रात को भैया की बाहो में देखता हूँ, कितनी शिद्धत से अपने आपको भैया को समर्पित कर के अपने बदन पे गुमान करना… बड़ी बड़ी चुचिया को इस कदर भैया को हवाले करना के जैसे एक बच्चा खिलवाड़ करता हो और दर्द का पता भैया को पता नहीं होने देना… भैया के लिए अलग अलग आवाज़ करके और उत्साहित करना…. लंड मुँह में इतना अंदर लेना के मानो भैया के पास लंड हे ही नही… एक मर्द को कैसे खुश करना है… ये कीर्ति भाभी अच्छी तरह से जानती है… भैया घर में दाखिल होते ही अगर ब्लाउज़ के अंदर हाथ न डाले तो उसे भी चैन नहीं पड़ता….

मैं ये भावना में बह कर कुछ भी बोले जा रहा था क्योकि वो मेरे दोस्त थे… और वो सब चुपचाप मुझे सुने जा रहे थे….