भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट १४

मैं: मेरा शर्ट क्यों antarvasna पहन के आई? भाभी: क्यों जच नहीं रहा क्या? इसके बदले मैं अपना ब्लाउज़ और शॉर्ट्स आप के पास जमा करवा दूंगी…
मैं: ये ठीक है सोदा… अब?
भाभी: अब गांड मारो और खुश हो जाओ..
मैं: जिंदगी में सब गांड मरवाने से डरते है और औरत ही होती है जो ख़ुशी ख़ुशी गांड मरवा लेती है…
भाभी: हा हा हा हा … सच है..

मैंने अपना शर्ट जो भाभी पहने थे उसे निकाल के नंगी की भाभी को। और फिर भाभी खुद पलंग पर गांड निकाले घोड़ी कहूँ या कुत्ती बन कर सेट हो गई…. मैं उनके सपोर्ट पर आभारी था… मैंने जोर से गांड पर मारा और फिर तैल लेकर उसे गांड वाली दरार पर रगड़ ने लगा… धीरे से मैंने उनके होल में एक ऊँगली लगाई… भाभी उई….. कर गई… फिर मैंने तैल से धीरे धीरे करके दो ऊँगली लगाई…. और फिर तिन अंदर बहार करने लगा… पांच मिनिट ऐसा करके मैंने फिर से चाटा मारा तैल के कारन आवाज़ खूब जोरो से आई… अब मेरे मारने की आवाज़ पर जो छाप उठी थी वो करारी थी… लाल लाल गांड पर सफ़ेद सफ़ेद पंजा… ये बदन मेरा गुलाम है… कितना गर्व था मुजे मेरे पर… और फिर भाभी मुड़ी और बोली

भाभी: चल अपना लौड़ा भी ऑइल से करवा ले, वरना छिल जायेगा… सुबह ही तेरा लौड़ा इंजर्ड हुआ था…
मैं: हा पर आपका मुह है न मलहम के लिये…
भाभी: मुझे पता था… इसीलिए मैं खाने का तैल लेके आई हु… अगर मुह में लेना पड़ा तो भी प्रॉब्लेम नहीं…

और फिर अच्छे से भाभी घुटनो पर आके मेरा लौड़ा तैल से लथपथ कर के फिर से पलंग पर गांड निकाल के कुत्ती बन गई… ये गांड कुछ ऐसी दिख रही थी…

एकदम ऑइली… और एक बहोत ही छोटा सा छेद जिसमे मेरा लौड़ा जाने वाला था…

मैं: ए भोसडीकि चल अपनी गांड का छेद मोटा कर…

भाभी ने अपने दोनों कुल्हो को खीच के छेद को बड़ा किया… और फिर मैंने हल्के से उस छेद पर लण्ड लगाया… चूत के एकपिरियन्स के बाद गांड के साथ क्या क्या करना है मुझे पता था… एकाद मिनिट में मैंने एक स्ट्रांग धक्का दिया… और लण्ड का सुपाड़ा गांड चीरते हुए गांड में धँस गया…

भाभी: आउच…. आ…..उ…च… गांड ठुक गई… आ…
मैं: चुप कुतिया…
भाभी: हा कुतिया ही बन गई हु…
मैं: मादरचोद बन्द हो जा… सिर्फ आह ऊह ही कर…
भाभी: ओके…
मैं: बोली तू बहनचोद?

मैंने फिर एक धक्का और मारा…. लौड़े का टोपा थोड़ा अंदर घुसा… मेरा लौड़ा घायल था इसलिए मुझे थोडा दर्द जरूर हुआ… पर मुझे थोडा मजा भी आ रहा था…. तो मैंने दर्द को गोली मारी अब नज़ारा कुछ ऐसे था…

मैं: आज तक धमकिओ में गांड मारने की बात की थी, पर अब तो सचमुच की गांड मार दी है…
भाभी: हा पर अभी गांड पूरी नहीं ठुकी, पूरा अंदर डालना है न…?
मैं: भोसडीकि तू फिर बोली, गांड मार लूंगा साली…
भाभी: वो तो तू फिर भी मारने ही वाला हैं…
मैं: मादरचोद… बहोत गर्मी है?

और मैंने और जोर से धक्का दिया… भाभी ने मेरी और देखा… अब आधा लण्ड ही बाहर था…

मैं: साली कुतिया.. तेरी गांड तो और भठ्ठी जैसे है… भोसडीकि… चल और गांड फैला के ऊँची कर… अब लास्ट धक्के में अंदर डालना ही है अंदर तक….

भाभी ने एडजस्ट किया… और मैंने फ़ौरन एक धक्का मार दिया… अंदर बाहर बहोत हो चूका अब पूरा अंदर डालने की बारी थी….

भाभी का मुह खुला हो गया और वो जोर से…. आ……उ…….च बोल दी….. बहोत बड़ी आवाज़ थी… आज मैंने किसी की रियल में गांड फाड़ दी थी…. भाभी अपने आप को थोडा एडजस्ट किया और अपने लटके हुए मम्मे को पकड़के गांड मारने को निमंत्रण दिया…

मैं: अब तो बोल… आगे गाइड कर…
भाभी: मुझे तो करना था… तू मना कर रहा था… ले खेल मम्मे से… ये तो इतना ऑइली था तो कुछ प्रॉब्लेम नहीं हुआ और ना ही मुझे… बाकि पता चलता…
मैं: हम्म

थोड़ी देर बाद भाभी ने कुछ ऐसे भी मुझे उकसाया…. और ऐसे भी गांड मरवाई….

अगर आप लड़की को चोदते वख्त उसको एक रांड की तरह नहीँ चोदोगे तो तुम्हे मन में उस बदन पर पूरा हक है ऐसा महसूस नहीं होगा… मैं हर धक्के मैं भाभी के गांड में और उतारना चाहता था… और फिर जोर जोर से ज़टके मारने लगा… कुछ २० मिनिट गांड मारने के बाद… मैंने गांड में ही जड़ दिया… लंड निकालने की ताकत नहीं थी…. मैं भाभी की ऊपर ही पड़ा रहा… भाभी का शायद एक बार पानी निकल गया था… पर यहाँ कोनसी पड़ी थी भाभी की… मई पांच मिनिट तक ऐसे ही पड़ा रहा और फिर धीरे धीरे लंड को बाहर निकाला… मेरी और भाभी की साँसे एकदम तेज़ चल रही थी… गरम गरम साँसे एक दूसरे को देखते हुए और प्यार जता रही थी… भाभी बिना भूले जैसे ही लण्ड निकल के बाहर आया… मेरे लंड को देखा… खून तो फिर भी निकला था… मेरा लंड की चमड़ी थोड़ी घायल हो चुकी थी… भाभी ने चाट चाट के साफ़ किया… खूब सारा तैल लगाया था… इतनी चिकनाहट थी तब जाके मैं भाभी की गांड मार पाया था इतनी आसानी से…

भाभी: अभी १-२ दिन लण्ड को आराम कर ने देना
मैं: क्यों अभी तो शुरुआत हुई है.. ब्रेक?
भाभी: अरे बुध्धू तेरा लंड घायल है… उसे थोडा आराम दे… और तब तक तू भी आराम कर…
मैं: भाभी होठ के लव बाइट को क्या बोलोगी?
भाभी: बोल दूँगी के तबियत ठीक नहीं थी दोपहर को और बुखार था… तो ये बुखार उतरा है… उसी बहाने आज के दिन के लिए चुदने से भी बच जाउगी…
मैं: हम्म्म्म्म

भाभी ने आज मेरा बिस्तर सही में गरम किया था… मेरे बिस्तर पर गांड मारी थी…

मैं: भाभी आज से तू मेरा बिस्तर गरम करेगी…
भाभी: हा तो गरम तो कर दिया….
मैं: अरे यही बिस्तर पर चुदेगी… भैया के बिस्तर पर नहीं….
भाभी: ह्म्म्म्म जलन….
मैं: जो समजना है समज ले…
भाभी: तो फिर गैंगबैंग कराना था तुजे तो…
मैं: वो तो बस तुजे उकसाने के लिए… पर अब मन नहीं है…
भाभी: गुड़ अच्छा बच्चा…
मैं: पर अब वो लोग मेरी जान खा जाएगे…
भाभी: शुरुआत भी तो तूने की थी…
मैं: पर वी चारो मेरे खास दोस्त है… आप ने जब दोस्त बनाने की बात की तो यही चारो लोग जो मेरी नज़र के केटेगरी में आते थे या अभी भी आते है…. इसलिए मैंने उनको अपने प्यार के बारे में कहा….

हम एकाद घंटे तक सो गये… ऐसी बाते करते हुए… मैं उठा तो भाभी जा चुकी थी… मैं बाहर निकल के देखा तो भाभी अपने रूटीन कपड़ो में आ गई थी… भैया के आने में अभी एक घंटे का वक्त था… मैंने जाते ही भाभी के ब्लाउज़ में हाथ डाल के भैया की स्टाइल में मम्मे को दबोच दिया… भाभी ने तुरन्त दूसरे मम्मे का न्योता दिया… मैंने उसे भी दबोच दिया..

मैं: तू भैया को क्यों नहीं बोलती दूसरा हॉर्न बजाने को?
भाभी: वो मेरे पति है.. मतलब राजा है… उसे जो करना है… करने देना चाहिए…
मैं: तो अब मैं?
भाभी: तू सेनापति है… राजा को इस प्रजा का ध्यान रखना है.. सेनापति को हर चीज के लिये सज्ज रहना होता है, मतलब के उसे सब कुछ मिलना चाहिए जो राजा को भी नहीं… चल ट्रैक पेंट उतार तेरा पेंडिंग इनाम…
मैं: अरे हां वो तो मैं भूल ही गया…
भाभी: मैं नही भूली…. पर छोड़ कल सुबह… तेरा भाई चला जाए तब… क्योकि अभी तू उत्तेजित हो गया तो लंड और इंज्यूर्ड हो जाएगा…
मैं: ह्म्म्म्म थोडा दर्द हो रहा है…
भाभी: तभी तो….

मैं और भाभी फिर जैसे कुछ बना ही नही और अपना अपना काम करके टीवी देख रहे थे और मेरे दोस्त मुझे मेसेज पे मेसेज….

केविन: अबे लौड़े समीर मादरचोद तू है कहा पर? भाभी की बाहो में घुस के बैठा है क्या? भोसडीके सुबह से फोन कर रहा हूँ….
मैं: अरे मुजे घर में काम था… भैया ने काम दिया था सब निपटाना था…
सचिन: भैया अब क्या भाभी को चोदने का काम भी तुजे देते है?
मैं: अरे छोड़ना… क्या हर वक्त वही बाते….

भाभी ने मेरे पास आके मेरा मोबाईल छीन लिया अब वो टाइपिग कर रही थी…

राजू: भोसडीके तेरी भाभी का चस्का और बदन की नुमाइश भी तूने करी थी.. और अब तू है की…

भाभी ने मेरी और देख के हस दी और पूछा के क्या बोला था… तो मैंने शार्ट में बताया के कैसे बदन की आप मालिक है…. अब जहा “मैं” लिखा है वो भाभी टाइप कर रही थी…

मैं: तू ही तो क्या… क्यों ऐसा सोचते हो? मत सोचो…
कुमार: भाई प्यार तो तूने जब भाभी के बदन की रुपरेखा दी तब से हम भी करने लगे हैं.. आग तूने ही तो लगाई है..
मैं: क्या याद है तेरे को…?
केवीन: छोड़ न अभी मुठ मारनी पड़ेगी… उकसा मत… तू दोहरी बाते करता है… एक बाजु भाभी को प्यार करता है… एक तरफ चोदना चाहता है… और एक तरफ हमसे बाते भी नहीं करता और एक तरफ हमे चुप रहने को भी बोलता है… तू जरूर कुछ छुपा रहा है….
मैं: बाद में बात करता हूँ… भैया आ गए है..

फिर भाभी ने मेरी क्लास ली…

भाभी: ये केविन कौन है?
मैं: बिज़नेसमैन की औलाद है…
भाभी: तभी तो इतना चालाक है..
मैं: ह्म्म्म
भाभी: अब? बताएगा तू तो अपने दोस्तों में शेर बनने के लिए के मस्त माल का शिकार करके आया हूँ।
मैं: नही नहीं बताऊंगा प्रोमिस
भाभी: सच बता तेरा मन क्या कहता है… ये लोग तेरे दोस्त कैसे है… ये लोग अभी तक तूने जो भी बताया है किसीको बोलेंगे नहीं न?
मैं: अरे भाभी कभी नहीं बोलेगे लिख के लेलो…
भाभी: तो फिर ठीक है… तो ये सब बताएगा तू?
मैं: भाभी जब वासना सर चढ़ जाती है तो ऐसे ख्याल आते है… शांत होते ही सिर्फ मेरा हक्क है ऐसा भाव पैदा होता है… जैसे अभी तो यही दिमाग में आ रहा है… की मैं सेनापति हु तो मुझे मेरे देश की रक्षा खातिर चढ़ाइए करने देनी चाहिये और देखना चाहिये के क्या मैं बचा पाटा हूँ?
भाभी: वासना के टाइम तो मेरा भी यही हाल रहता है.. पर कोई आक्रमण करे और तू बचा न पाए तो?
मैं: तो सयुंक्त सरकार चलाएंगे… जैसे भैया को थोड़ी पता है, की राजशाही शासन चल रहा है के राष्ट्रपति… अभी तो दोनो मिल कर चला रहे है और देश में भ्रस्टाचार हो रहा है…

हम दोनों हस पड़े…

मैं: भाभी करना है ट्राई…
भाभी: चल लंड शांत कर दू? फिर सोचे?
मैं: भैया दस मिनिट में आ जाएंगे… पर सोच तो सकते है…
भाभी: फिर तू मुठ मारेगा…
मैं: नहीं..एक कंडोम देदो भैया का उसमे ही मार के वीर्य जमा करूँगा… रात को जब नींद खुले मेरे कमरे में आके पि लेना…
भाभी: चल तेरे लिये वो भी करुँगी… अब वादा किया है तो निभाउंगी…
मैं: जब वासना सर चढ़ जाती है तो तू क्या क्या सोचती है…
भाभी: देख जब मैं तेरे भाई के साथ होती हूँ तो ये कोई ख्याल नहीं आता… पर न जाने क्यों कल तू बोला के तेरे लिए १२” का लण्ड कम पड़े तो तब ऐसा लगा के हा… २-३ और हो जाए तो काम बन जाए… उस टाइम मुझे कुछ अजीब सा लगा पर मज़ा आया…
मैं: सच?
भाभी: पर फिर जब मैंने पानी छोड़ा मुझे कुछ मन नहीं हुआ ऐसा…
मैं: मेरा भी यही था… जब मैं तेरे पे चढ़ कर चोद रहा था… तब ऐसा ही हुआ के साला आने दू सब दोस्तों को… साले वो भी तो तेरी जवानी का मज़ा ले… मेरे बुरे वख्त में वो लोग काम आएटी थे तो अब रिटर्न गिफ्ट देना तो बनता है.. पर जब वीर्य की बून्द तेरी चूत में ख़तम हुई तो ऐसा लग ने लगा के नहीं मैं इतना बड़ा गिफ्ट क्यों दू?

हम दोनों हसने लगे… भाभी के मन में भी वही चल रहा था जो मेरे मन में… हम दोनों ने ये खुलकर बात की… पर साला डर लग रहा था… एकदूसरे को बताने को, के दोनों रेड़ी है….