घरेलू चुदाई समारोह 10

प्रेम ने धीरे से आगे antarvasna की ओर धक्का दिया kamukta उसे अभी भी यह चिंता थी कि कहीं कोमल को चोट न पहुंचे। उसका लण्ड इतनी जोर से फ़ंसा हुआ था जितना आज तक कभी नहीं हुआ था। हालांकि उसे इस बात की फ़िक्र थी कि कोमल की गाण्ड को कोई नुकसान न हो पर अब उसे यह भी ख्याल आ रहा था कि ऐसा न हो कि इस आक्रमण में उसका लण्ड ही शहीद हो जाए। उसका जैसे-जैसे लण्ड अंदर समा रहा था उसे अपनी रक्त-धमनियों पर दबाव बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था।

“मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझे दो टुकड़ों में चीर रहे हो…” कोमल ने अपना मुँह तकिये में गड़ाकर गहरी सांस लेते हुए कहा। आखिर यह पहला लण्ड था जिसने उसकी मखमली गाण्ड को चीरा था- “पर तुम ऐसे ही लगे रहो प्रेम, जब तक कि तुम्हारा लण्ड जड़ तक नहीं समा जाता…”

प्रेम ने ऐसा ही किया। उसने देर न करते हुए एक जोरदार शानदार धक्का मारा और अपने लौड़े को कोमल की गाण्ड में जड़ तक पेल दिया। फ़िर वो कुछ देर सांस लेने के लिए ठहरा। गाण्ड की माँसपेशियों का दबाव और स्पंदन वो महसूस कर पा रहा था। एक पल तो उसे लगा कि वो तभी वहीं झड़ जायेगा।

“फ़िर से डालो, प्रेम…” कोमल ने विनती की।

जब प्रेम थोड़ा सम्भला तो उसने अपना लण्ड बाहर खींचा और फ़िर दुगने जोश से वापस ठोंक मारा। कोमल की स्वीकृती पाकर उसने ऐसा ही एक बार और किया, फ़िर और… फ़िर और…

“यही तरीका है। इसमें तकलीफ़ जरूर होती है, पर अब थोड़ी कम है। मुझे यह बेहद पसंद आ रहा है। मुझे पता था कि मुझे गाण्ड-पेलाई पसंद आयेगी…”

कोमल को उसके गंतव्य तक शीघ्र पहुंचाने के लिये प्रेम ने अपना हाथ बढ़ाकर कोमल की चूत को ढूँढ़ा और अपनी एक उंगली उस बहती हुई नदी के उद्गम में डाल दी।
कोमल के लिये अब यह बता पाना कि क्या पीड़ा थी और क्या आनंद मुश्किल हो चला था। उसकी चूत और गाण्ड दोनों में चल रहे आनंद को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। दोनों यही संकेत दे रहे थे कि अब बांध ढहने को है।

“प्रेम और जोर से… तेज़ और तेज़… मार लो मेरी गाण्ड, अपने रस से मेरी गाण्ड भर दो…”

प्रेम भी यही सुनना चाहता था- “ए बेबी तुम तो मेरा लण्ड ही छील डालोगी…” वो चिल्लाया। कोमल की गाण्ड ने उसके लण्ड पर जकड़ बढ़ा दी थी। इस कारण वह ठीक तरह से झड़ भी नहीं पा रहा था। इसी कारण उसे अपना लण्ड खाली करने में काफी देर लगी।

कोमल और भी बहुत देर तक मैदान में टिकी रहती पर प्रेम अब थक चुका था। यह देखकर कोमल तकिये पर सहारा लेकर लेट गई। वो सोच रही थी कि आज उसने सच में एक आदमी से अपनी गाण्ड मरवा ही ली थी। आज उसने दो काम ज़िंदगी में पहली बार किये थे। अपने पति से दगा और गाण्ड मराई।