आंटी ने रात भर चुदवा के लंड

दोस्तों ये Antarvasna कहानी नहीं लेकिन मेरी सच्ची चुदाई का अनुभव हे जिसे मैं आप लोगो के समक्ष हिंदी में लिख रहा हूँ. बात करीब डेढ़ साल के पहले की हे. मेरे घर के बगलवाले घर में ही एक आंटी रहती थी जिसका नाम शिला था. आंटी के साथ उनके परिवार में उन्के पति, वो खुद और एक पांच साल की बेटी थी. शिला आंटी के पति विनोद अंकल एक ड्राईवर थे. और वो अक्सर लम्बी वर्दी पर जाते थे. ऐसे में घर के अन्दर सिर्फ आंटी और उनकी छोटी बेटी ही रहते थे.

एक दिन ऐसे ही अंकल अपनी कार ले के वर्दी लगाने के लिए गए हुए थे. आंटी तिन दिन से अपने घर पर एकदम अकेली थी. मैं खाना खाने के बाद अपने दोस्तों के साथ टहलने के लिए निकला था. तभी आंटी का फोन आया. आंटी ने बोला, मेरी पैर के अन्दर मोच आ गई हे और शबनम के पापा भी घर पर नहीं हे. तुम प्लीज़ एक काम करो ना मेरा.

मैंने कहा, हां बोलो न आंटी क्या काम हे?

आंटी: एक दवाई ले के आनी थी मेडिकल से.

मैंने कहा मैं अभी ले के आता हु आंटी. बस पांच मिनिट में.

मैं फटाक से दवाई ले के आंटी घर गया तो आंटी ने मुझे कुर्सी पर बिठाया और बोली, अब तू दवाई ले के आया हे तो एक काम और भी कर दे ना मेरा.

मैंने कहा, हां बोली आंटी मैं पक्का कर दूंगा.

आंटी बोली, मेरे पैरो में जरा तेल की मालिश कर दो ना. चलने में भी मुश्किल हो रही हे मुझे तो.

मैंने कहा तेल कहाँ पर हे आंटी.

आंटी ने मुझे तेल दिखाया और मैंने तेल की शीशी ले के आंटी के पास आके कहा, आप लेट जाओ आंटी.

दोस्तों शिला आंटी बड़ी ही सेक्सी टाइप की हे. वो 36 साल की हे और उनका रंग एकदम गोरा हे. और आंटी की एस यानी की गांड ऐसे बहार आई हुई हे की विनोद अंकल रोज उनकी गांड में अपने लंड को डाल के चोदते हो. जब मैं अपने हाथ से आंटी की तेल मसाज कर रहा था तो उन्के गोरे बदन को देख के मेरे लंड में गुदगुदी सी होने लगी थी. मेरा लोडा एकदम टाईट हो गया था. मेरा अपना खुद पर काबू करना मुश्किल सा हो गया था. लंड पेंट में से फाड़ के बहार आने को बेताब सा था. आंटी की गांड देख के मेरी ये हालत हो गई थी. मैंने आंटी के एकदम करीब जा के उसकी मसाज की. और ऐसा करने पर मेरा लंड आंटी की गांड की दरार पर टच हो गया. शिला आंटी जरा हिली और आगे बढ़ी. मैंने भी आगे बढ़ के उसे बता दिया की मेरे इरादे क्या हे!

मेरा लंड वहां टच हो रहा था और मैं और भी पागल हो रहा था. आंटी ने पूछा, तुम्हारी कोई माल शाल हे की नहीं?

मैंने कहा, नहीं आंटी अभी तो कोई नहीं हे?

आंटी: पहले थी क्या?

मैं: हां थी ना एक.

आंटी: वो नहीं हे इसलिए ही तू अन्दर से इतना गरम हो गया हे.

मैं ये सुन के एकदम चौंक पड़ा और बोला, ऐसा क्यूँ कह रही हो आंटी?

आंटी ने हंस दिया और वो बोली, कुछ भी तो नहीं तू अपनी मालिश चालु रख.

मैंने लंड को पूरा आंटी के चूतड़ पर रख दिया और उसे बता दिया की मेरा कितना बड़ा हे. वो बोली, चल अब बहुत हो गई मसाज. अब मैं तेरे लिए मस्त शरबत बना के ले के आती हूँ.

मैंने कहा, आप का पैर ठीक हो गया क्या आंटी?

वो बोली: हाँ तूने डोक्टर से भी बढ़िया काम कर दिया हे मेरे लिए!

आंटी अन्दर गई. मैं उसकी मटकती हुई गांड को देख रहा था. वो शरबत ले के आई और शायद उसने जानबूझ के शरबत को मेरे पेंट के ऊपर उडेल दिया. उसने एक्टिंग अच्छी की थी पर मैं समझ गया की उसने जानबूझ के ही शरबत को मेरी पेंट पर फेंका था

मैं अपनी पेंट को साफ़ कर रहा था. आंटी फटाक से एक सूखा कपडा ले के आ गई और मेरी पेंट को पोछने लगी. और साली ने जानबूझ के मेरे लंड को टच कर लिया. मैंने उसे देखा तो वो बड़ी फुदक रही थी लंड पकड़ के. वो जानबूझ के लंड के पास कुछ ज्यादा ही साफ करने में लगी थी.

मैंने आंटी से कहा, आप रहने दीजिये आंटी मैं बाथरूम में जा के साफ़ कर लूँगा.

मैं बाथरूम में गया तो एकदम गर्म हो चूका था आंटी की सेक्सी हरकतों से. मेरा लंड एकदम खड़ा कर दिया था आंटी ने. मैंने जल्दी से बाथरूम में पहले अपनी पेंट को साफ़ किया और फिर अपने लंड को बहार निकाल के हिलाना चालू कर दिया. और मैं ये सब दरवाजे को खुला रख के ही कर रहा था. आंटी पीछे से मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी. वो अन्दर आ गई और बोली, अरे ये सब क्या कर रहे हो तुम? मैं हूँ फिर ये सब करने की क्या जरुररत आन पड़ी तुम्हे!

और ऐसा कहते हुए वो मेरे एकदम करीब आ गई और मेरे लंड को अपने हाथ में ले के उसे हिलाने लगी. आंटी ने अब मेरे लिए लंड को हिलाना चालू कर दिया. और कुछ ही देर में ढेर सारा वीर्य निकाल दिया मेरा.

आंटी ने कहा, कैसा लगा दिल को सुकून मिला की नहीं!

मैंने कहा, मजा आ गया आंटी!

आंटी अब बाथरूम के अन्दर घुसी और उसने अपनी साडी को ऊपर उठा दिया. और वो मेरे सामने अपनी चूत में ऊँगली करने लगी. मैं उसके पास गया और मैं उसके बूब्स को मसलने लगा. कुछ देर चूत में ऊँगली कर के वो शांत हो गई. हम दोनों ने एक दुसरे को साफ़ किया. मैंने चूत साफ़ करते हुए आंटी की चूत के बाल का मजा लिया उँगलियों से.

आंटी ने फिर मुझे पूछा, तुमने कभी किसी के साथ चुदाई की हे?

मैंने कहा नहीं.

आंटी बोली, चल आज तुझे दिखा देती हूँ और अनुभव करवा देती हूँ की कैसे करते हे!

आंटी बाथरूम से मेरा हाथ पकड़ के मुझे अपने बेड के ऊपर ले गई. आंटी ने मेरे सब कपडे अपने हाथ से उतार के मुझे पूरा नंगा कर दिया. और फिर वो बोली, चल अब तू मुझे नंगा कर दे.

मैंने आंटी के बूब्स पकडे और उन्हें किस करने लगा. और ये सब करते हुए मैंने उन्के कपडे उतार के उन्हें न्यूड कर दिया. अब हम दोनों एकदम न्यूड खड़े हुए थे एक दुसरे के सामने.

आंटी ने कहा, चल अब जरा भी रुकना मत, मैं इस लंड को कब से अपनी चूत में लेना चाहती हूँ! इसे मेरे अन्दर डाल के सब आग को शांत कर दे आज.

मैंने आंटी की टांगो को पूरा खोल दिया और अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया. एक ही धक्के में मैंने पुरे लंड को अन्दर कर दिया. आंटी की आह निकल पड़ी. और वो अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह औऊऊ उह्ह्ह्ह करने लगी. मुझे भी आंटी की सिसकियाँ सुन के बड़ा मस्त लग रहा था. मैं भी जोर जोर से धक्के लगा के उन्हें चोदने लगा.

थोड़ी देर चोदने के बाद मेरे लंड का पानी आंटी के बुर में छुट गया. और वो भी अपनी पानी निकाल के शातं पड़ गई.

दोस्तों शिला आंटी ने फिर मुझे कहा की आज की रात तू मेरे पास ही रुक जा. सुबह तक तुझे बहुत कुछ सिखा दूंगी!

मैंने कहा मैं घर पर कॉल कर दूँ की अपने दोस्त के वहां हूँ.

वो बोली, किसी ने यहाँ आते देखा तो नहीं ना तुझे?

मैंने कहा नहीं.

और फिर मैं पूरी रात आंटी के पास रहा. आंटी ने रात में 4 बार मेरे से चुदवाया और दो बार मैंने उसकी गांड मारी. आंटी ने सुबह तक मेरे लंड के ऊपर सुजन ला दी थी. लेकिन सच में बड़ा मजा आ गया उस रात आंटी के साथ.

आज भी जब आंटी के पति कही बहार जाते हे तो मैं कम से कम एक बार उनके साथ सेक्स जरुर करता हूँ