भाभी ने की हर ख्वाहिश पूरी – पार्ट ३

आगे…. मेरे दोस्तों के लिए तो जो मैं बोल रहा था वो सपना लग रहा था… सब बोले के आल ध बेस्ट….

मेरा मेरे भाभी को antarvasna घूरना चालू रहा… खास करके बूब्स और गांड… इतनी इठलाती थी वो की बस मुझे जानबूझकर देखने की कोशिश करनी नही पड़ती थी… मेरी आँखे टिक जाती थी ऐसे ही…

एक दिन भाभी: समीर तुम मुझे यु घूरना बंध करोगे?
मैं: क्यों? क्या हुआ?
भाभी: मुझे शर्म आती है और ये सही भी नहीं है… मुझे आपके भैया से बात करनी पड़ेगी…
मैं: कर दो… ज्यादा से ज्यादा ज़ग़ड़ा होगा और क्या?
भाभी: क्यों कर रहे हो ऐसा?
मैं: भाभी… प्यार करने लगा हूँ आप से…
भाभी: (एकदम गुस्सा होकर) क्या घटिया बोल रहे हो… समज नहीं आता की क्या बोल रहे हो?
मैं: (भाभी का ये स्वरुप देखकर मैं डर तो ज़रूर गया और भैया का ख्याल आने पर थोड़ी फ़टी तो पड़ी थी मेरी पर) जाओ मैं आपसे बात नहीं करता…
(ये था उल्टा चोर कौतवल को डांटे)
भाभी: ले भला… क्यों? गलती आप कर रहे हो और….
मैं: और नहीं तो क्या… दिन भर मेरे साथ ही रहती हो मेरी पास ही रहती हो.. मेरी कोई गर्ल फ्रेंड भी नहीं है… तो फिर आपसे प्यार युही हो गया… क्या करू.. हम हमउम्र भी है… मैं तो आखिर जवान हूँ… जो करना है करो… मुझे नहीं पता क्या गलत है और क्या नहीं…

ये में सच में अपने दिल की बात बोल रहा था… मैं सच में इमोशनल हो गया और रो ही पड़ा…. मैं फ़साना जरूर चाहता था… पर… इमोशनल हो चूका था….

भाभी: देखो समीर भैया ऐसे नही रो आप… मैं पानी लाती हूँ…
मैं: भाभी मुझे पानी नहीं प्यार की जरूरत है…
भाभी: क्या मतलब? (गुस्सा आश्चर्य दोनों भाव साथ थे इसमें)
मैं: मतलब कुछ नहीं भाभी मैं बस प्यार चाहता हूँ, क्या मैं आपको प्यार नहीं कर सकता? क्या गलत है? (मेरा रोना चालू ही था)
भाभी: पर… पर ये गलत है… प्यार हम भी आपसे करते है, पर आपकी भावनाए कुछ अलग बयां कर रही है… जो मुमकिन नहीं है…
मैं: भाभी… क्यों गलत है एक कारन बताओ…
भाभी: (मक्कमता से बोली) गलत है मतलब गलत है… और आइन्दा मुझसे बात मत करना…

मैं फिर चला गया वहा से… पर अब मेरा काम था के भाभी भैया को अपडेट क्या देते है? हररोज़ मैं रेकॉर्डिंग् लगाता था और सुनता था, मेरा भाभी को ज़ाखना चालू था… भाभी इग्नोर करती थी… एक दिन एक रेकॉर्डिंग् में जब भैया भाभी का सम्भोग खत्म हुआ भैया ने भाभी को सामने से पूछा

भैया: समीर से कुछ बात हुई क्या उस बारे में?
भाभी: (थोडा हिचकिचाके बोली) नही.. हा एक बार हुई थी, वो बस ऐसे ही खो जाता है सोच विचार में वो क्या करता है उसे नही पता… इमोशनल है न…
भैया: ह्म्म्म तुम खामखा डर रही थी… ऐसे तू है ही मस्त माल किसीके भी पेंट का घण्टा बजवा सकती हो

ऐसा कह कर दोनों हसने लगे और उस दिन भाभी ने भैया को शायद और एक बार अपना शरीर सोपा, जिसके शायद भैया ने बहोत मज़े लुटे होंगे…

मैंने भाभी को बुलाना बंध कर दिया था… मैं नज़रे चुरा रहा था। मैं बाते भी नहीं कर रहा था… मानो जैसे मैं उससे नफरत करता हूँ। भाभी को यह बरदास्त नही हो रहा था…. एक दिन….

भाभी: क्या है समीर भाई, क्यों इतना गुस्सा है आप हमसे?
मैं: कुछ भी तो नहीं…
भाभी: तो क्यों नहीं बोलते?
मैं: बोलता हूँ तो आप गुस्सा हो जाते हो, नही बोलता तो भी प्रॉब्लम?
भाभी: पर आप जो बोल रहे हो वो गलत है, वही बोलो न जो सही है?
मैं: मुझे जो सही लगा है वही बोला है
भाभी: क्यों सब कॉंप्लिकेशन्स खड़ी कर रहे आप?
मैं: क्या कर रहा हु? क्या हुआ आपको अब? इसीलिए तो दूर रहता हु.. आप क्यों कॉंप्लिकेशन्स करना चाहती है…
भाभी: समीर भाई…
मैं: मैं आपसे नजदीक रहूँगा तो बिना प्यार किये नहीं रह पाउँगा। आप मुझसे दूर ही रहे…
भाभी: बैठ के बात करे?
मैं: हा बोलिए…
भाभी: देखो समीर भाई ये गलत है… दुनिया भी क्या सोचेगी?
मैं: अरे मैं कुछ करने को थोड़ी बोल रहा हूँ? प्यार करता हूँ वो बता रहा हु!
भाभी: पहेली बात ये सब सिर्फ प्यार तक नहीं रह सकता, वो आगे बात बढ़ ही जाती है… और दूसरी बात ये सब को पता चले तो पता भी है क्या हो सकता है?
मैं: (उसीकी बातो पर मैंने पकड़ा) भाभी, सुनो मेरी बात, ज़माने को बताने जायेगा कौन?
भाभी: आपके भैया को मैं धोखा नहीं दे सकती…
मैं: आप बहोत आगे की सोच रही है भाभी। इतना तो मैंने भी नहीं सोचा। एक गर्लफ्रेंड नहीं बन सकती?
भाभी: (थोडा सोचकर) सिर्फ गर्लफ्रेंड तक ही हा समीर, और कोई उम्मीद मत रखना।
मैं: अरे भाभी उम्मीद पे तो दुनिया कायम है… पर मंज़ूर?
भाभी: हा पर एक शर्त पर… ये बात की किसीको भी भनक नही लगनी चाहिए, और हमारे बिच ये आप आज से, अभी से बंध ओके?
मैं: तो क्या नाम से बुलाऊ?
भाभी: हा पर सिर्फ अकेले हो तब ही!
मैं: तो तुम भाई या भैया नहीं ओके?
भाभी: ओके डील!
मैं: एक हग तो देती जाओ हमारे नए रिश्ते पर…
भाभी: नही। क्या मजाक कर रहे हो?
मैं: क्यों? गर्लफ्रेंड है तू मेरी, अगर गर्लफ्रेंड की तरह नही रह सकती तो फिर जो चल रहा था चलने दो…
भाभी: तू बाज़ नहीं आएगा ठीक है चल आजा….

ये था मेरे और मेरी प्यारी भाभी के बिच का पहला जिस्मानी टच… आज तक सिर्फ हाथ मिले थे… आज उसका जिस्म मेरे जिस्म को छूने जा रहा था… बस यही एक सोच थी के साले किस मादरचोद ने कपडे बनाये थे… आहाहा क्या बयां करू और कैसे करू? ब्लाउज़ के पीछे का भाग, माने पीठ वाला भाग… जहा मैं ब्रा के हुक छु सकता था। मेरा हाथ जैसे ब्लाउज़ के निचे हिस्से के कमर तक पहोचा के भाभी ने रोक दिया….

भाभी: समीर…
मैं: थैंक्स… ये कुछ अलग ही आनंद था.. भैया काफी लकी है…
भाभी: (शर्मा गई) वेलकम…

उस दिन के बाद मैं भाभी से एकदम गर्लफ्रेंड की तरह बिहेव करता था। यहा वहा छु लेता था। कंधे पर हाथ रख के थोडा दबा लेता था। कभी गले मिल के उनके बूब्स को मेरी छाती मैं भीच देता था। भाभी कुछ नही बोलती थी तो मैं पूरी छूट ले लेता था… एक दिन…

मैं: कीर्ति तेरी साइज़ क्या होगी?
कीर्ति: क्या साइज़?
मैं: अब ज्यादा बन मत, जल्दी बता चल…
कीर्ति: यह कुछ ज्यादा नहीं हो रहा बच्चू?
मैं: नहीं मैं अपनी गर्लफ्रेंड को ब्रा पेंटी का सेट गिफ्ट करना चाहता हु, पहेली बार है इसीलिए पूछ रहा हूँ… बाद में नहीं पूछूँगा।
कीर्ति: नहीं
मैं: अरे बोलना…
कीर्ति: बोला ना नहीं मतलब नहीं

मैं उठा और उनके रूम में जाने लगा…

कीर्ति: अरे अरे कहा जा रहे हो…
मैं: ब्रा पेंटी लेने साइज़ चेक करने…
कीर्ति: तो तुम नहीं जाओगे? रुको वही रुक जाओ मैं कहती हूँ!
मैं: मैं सुन रहा हूँ…
कीर्ति: ३४-२४-३४

(सोचो ये पिछले सालो मैं कमर के अलावा दोनों दो दो इंच बढ़ चुके है)

मैं: थेंक्स…
कीर्ति: क्या गिफ्ट कर रहे हो?
मैं: ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा हूँ। कल तक घर आ जायेगा। भैया खुश ना होवे तो मैं अपना नाम बदल दूंगा…

कीर्ति ने थोड़ी सी स्माइल थी और शर्मा के हंस दी…

अब भाभी को मैंने क्या सरप्राइज़ दिया वो फ़ोटो भेजता हु जो वेबसाइट से ली है