मंगलसूत्र (एक लघु-कथा) 5

मैंने यह दोनों ही antarvasna कपडे अपने अंदाजे से खरीदे थे – मेरे दिमाग में दो साल पुरानी अल्का की ही छवि थी। लेकिन अभी की अल्का शारीरिक तौर पर और परिपक्व हो गई थी। इस कारण से जो कपड़े मेरे ख्याल से अल्का के नाप के थे, अभी काफी कसे हुए लग रहे थे, और उसकी देहयष्टि साफ़ दिखा रहे थे। अल्का का शरीर गांधार प्रतिमाओं जैसा था – नपा तुला शरीर, सुडौल ग्रीवा, छाती पर शानदार स्तनों की जोड़ी जो सामने की तरफ अभिमान से उठे हुए थे, क्षीण बल-खाती कटि, और उसके नीचे सौम्य उभार लिए हुए परिपक्व नितम्ब!

मौसी ने टी-शर्ट के अंदर किसी भी प्रकार का अधोवस्त्र (ब्रा) नहीं पहना हुआ था। वैसे भी रात में जितना कम पहना जाय, उतना ही अच्छा। और इस अनुभव से वह भी काफी रोमांचित दिख रही थी। उसके स्तनों के दोनों चूचक और उसके आसपास का करीब दो इंच का गोलाकार हिस्सा टी-शर्ट के होशरी कपड़े को सामने की तरफ ताने हुए थे। इस उम्र तक लड़के लड़कियों को एक दूसरे के शरीर के बारे में ज्ञान तो हो ही जाता है, और मैं भी कोई अपवाद नहीं था। मैं अब तक डेबोनियर और चेस्टिटी जैसी पत्रिकाओं में नग्न लड़कियों की तस्वीरों का कई बार आस्वादन कर चुका था, और मुझे यह तो अच्छे से पता था की लड़कियों के शरीर में कहाँ पर क्या क्या होता है। लेकिन चित्र में देखना और वास्तविकता में देखना दो अलग बातें हैं।

उनका पेट पूरी तरह सपाट तो नहीं था – अच्छे खान-पान के कारण पेट में एक सौम्य उभार था, जो कि नीचे की तरफ जाते जाते और जाँघों के जोड़ तक पहुँचते पहुँचते एक प्रकार की गहराई में परिवर्तित होता जा रहा था। इतना तो मुझे मालूम था की यही हिस्सा अल्का की योनि है, लेकिन मैं उसके बारे में सिर्फ अंदाज़ा लगा सकता था। निक्कर से बाहर उसकी दोनों टाँगे शरीर के अन्य हिस्सों के मुकाबले गोरी थीं और काफी सुडौल थीं। जाँघों, घुटनों और पिण्डलियों की मांस-पेशियाँ काफ़ी उभरी हुई थीं।

बाहुबली फिल्म की अवन्तिका याद है (हेरोइन का नाम है तमन्ना)? अरे, याद कैसे नहीं होगी? बस ये समझ लीजिये कि बिलकुल वैसा का शरीर, नाक-नक्श और उम्र! बस, अल्का उसके मुकाबले सांवली थी। आज पहली बार मैंने एक बला की सुन्दर लड़की देखी थी!

“तो?” आखिरकार अल्का ने ही चुप्पी तोड़ी।

मेरी तो जैसे तन्द्रा टूटी! मैं हैरानी से उसको देख रहा था।

“चिन्नू बाबू… कभी लड़की नहीं देखी क्या?” वो मुस्कुराते हुए कह रही थी – वो हल्का फुल्का मज़ाक तो कर रही थी, लेकिन खुद भी कुछ घबराई हुई थी।

“देखी तो है… लेकिन आप जैसी सुन्दर नहीं!”

“हम्म्… अच्छा है! ‘मेरे जैसी’ सुन्दर लड़की के साथ सोने का मौका मिलेगा!”

कहते हुए वो बिस्तर में मेरे पास आ गई, और आते ही उसने खुद को चद्दर से ढक लिया। मौसम गर्म था, और अब हम दोनों भी! और ऐसे में चद्दर ओढ़ना! यह तो तय बात थी की वो अपने स्तंभित चूचकों को ढकना चाहती थी।

“यह निक्कर बहुत कसी हुई है….” कह कर उन्होंने निक्कर के बटन खोल दिए। आवाज़ और उसके हाथ की हरकतों से मुझे इतना तो मालूम हो गया। माहौल बहुत ही भारी हो गया था। हम दोनों ने बहुत देर तक कुछ भी बात नहीं करी।

“और ये टी शर्ट भी!” उन्होंने चुप्पी तोड़ी।

मैं क्या कहता! वो तो लग ही रहा था कि टी शर्ट बहुत कसी हुई थी।

“मेरा साइज़ लगता है कि थर्टी फोर हो गया है!” उन्होंने ऐसे कहा जैसे कि ऐसे ही कोई आम बात कह रही हों।

“ब्रेस्ट का?” मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया।

“हाँ!”

“ह्म्म्म… आपके संतरे अब पृयूर बन गए… हा हा!” मैंने मज़ाक में कहा।

पृयूर दरअसल एक बहुत ही उत्कृष्ट नस्ल का आम होता है जो केरल में होता है। इसके फ़ल में खटास कभी नहीं होती, कच्चा होने पर भी नहीं। और पक जाने पर यह बहुत रसीला, और मीठा हो जाता है।

मेरी इस बात पर वो भी खिलखिला कर हंस पड़ी!

“पृयूर नहीं… उससे भी बड़े!” उसने हँसते हुए आगे जोड़ा। उनके यह बोलते ही मेरे आँखों के सामने उनके स्तनों का एक परिकल्पित दृश्य घूम गया… मैंने कुछ कहा नहीं, बस एक हलकी सी, दबी हुई हंसी छोड़ी।

“गुड नाईट चिन्नू” अंततः अल्का ने कहा।

“गुड नाईट अल्का!” मैंने भी कहा और जबरदस्ती सोने की कोशिश करने लगा।