प्यार , सम्भोग ओर धोखा 15

अगली सुबह में antarvasna उठा नहा धो के सबको नाश्ते की टेबल पे मिला सबको गुड मॉर्निंग विश किया और फिर पापा से बिज़नेस की बात की ओर फिर भाई से पूछा के आज कोई खास प्रोग्राम तो नही तो पता लगा आज घर पे पाठ का प्रोग्राम है तो सभी औरते उसी की तैयारिया कर रही थी तो अब मेने सोच के में क्या करूँ तभी मुजे सभी बहनों का प्रोग्राम का पता चला उन्होंने आज सारा दिन जब तक पाठ का प्रोग्राम पूरा न हो जाए बाहर मस्ती करने की सोची ओर उसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी थी फिर हमने प्लान बनाया के हम सारी बहन और में मिलके पहले नंदिनी के घर जाएंगे उसे शादी का जोड़ा देंगे उसके बाद झा भी घूमने जाना हो वहां चलेंगे । फिर हम सब नाश्ता करके अपने अपने कामो में लग गए तभी मुजे लगा कि जैसे बार बार कोई मुजे चोर नजरो से देख रहा है और उस नजर का पीछा करते हुए पता लगा वो रश्मि दीदी उर उनको देख के मेने इशारे में पूछा क्या हुआ तो वो इशारे में बोली कुछ नही ओर शर्मा के अपने कमरे में चली फेर में तयार हो गया और सबका इंतजार करने लगा तभी मेने देखा मेरी सभी भहने चली आ रही थी सभी अपने अपने सूट सलवार में थी मगर एक बहन ऐसी थी जिसे देखते ही मेने उसे देखने का नजरिया बदल दिया दिमाग कह रहा था कि वो बहन है मगर मन मानने से मना कर रहा था के ये बहन है मन कर रहा था के अभी होंठ से होंठ चिपका लू आज पहली बार उसके एक एक अंग का पता लग रहा था मेरी रश्मि बहन टाइट टॉप ओर स्किन फिट जीन्स में कमर को लचकाते बलखाते मटकते मटकते आई और सीधा मेरे बगल में आ के बैठ गयी ये पहली बार था जब में जान बूझ के काम रास में लिप्त होजे अपने बहन के एक एक अंग की खुशबू महसूस कर रहा था उसका स्पर्श महसूस कर रहा था बोहुत ही सुखद अनुभव था वो राधिका के साथ बिताए लम्हो से भी सुखद कार में नही चलाने वाला था तो सभी बहन और में पीछे बैठ गए और कार जास्मिन चला रही थी कुछ देर बाद हम नंदिनी के घर चले गए वहां हमारी अच्छी खातिरदारी हुई नंदिनी की माँ बोहुत ही अच्छी नेचर की है बोहुत ही खूबसूरत महिला है आज तो एक के बाद एक माल टकरा ही रहे है पता नही कैसे कंट्रोल कर रहा हु में उनकी चल ढल देख के लगता है के ये बिल्कुल राधिका जैसी है और फिगर तो उससे भी मस्त है कामिनी आंटी का ओर जैसे प्यार दिखा रही है लगता है बेटी से पहले मा बिस्तर पे आएगी । और फिर हम वहां शादी का जोड़ा देखे वहां से निकल गए ।

विश्वास – तो हाँ बहनो क्या आज्ञा है कहा चलना है ।

देविका – विश्वास यहां से हम चले जाएंगे झा हमने जाना है हम गर्ल्स की शॉपिंग में तुम्हारा क्या काम तुम अपना एन्जॉय करो जब हम फ्री हो जाएंगे तब तुम्हे कॉल करेंगे तुम अजाना ओर फिर हम खा पी के घर चलेंगे ।

विश्वास – ओक दी हेव फन ।

रश्मि – अरे रुको में भी तुम्हारे साथ ही चलती हु ना तुम्हे भी कंपनी हो जाएगी ।

विश्वास – ओक चलो ।

देविका – मन में क्या अजीब लड़की है पहले खुद ही प्लान बनाती है और अब खुद रुक रही है । ठीक है तुम जाओ विश्वास के साथ हम काल करके बुला लेंगे ।

फिर वो सब अपने रास्ते ओर में जास्मिन ओर राधिका अपने रास्ते हम वहां से पास में ही एक फेमस पार्क था वहां चले गए जास्मिम ने हेड क्वाटर 10 जानो की ओर टीम मंगवा ली थी जो पार्क के आस पास ही थी तो जास्मिन भी पार्क के बाहर से ही हम पे नजर जमाए हुए थी ये तो में बताना भूल ही गया कि वो पार्क फेमस क्यों था वो फेमस था कपल्स के लिए जहा वो खुले में रोमांस करते है कोई रोक नही कोई टोक नही तो हम भी वहां जेक एक कोने में पेड़ के नीचे बैठ गए कुछ देर तो शांति रही फिर मेने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा ।

विश्वास – आई आम सॉरी रश्मि दीदी ।

रश्मि – सॉरी किसलिए ।

विश्वास – वो काल रात जो भी हुआ ।

रश्मि – काल रात ऐसा क्या हुआ काल रात जो तू माफी मांग रहा है ।

विश्वास – दीदी आप जानती हो में किस बारे में बात कर रहा हु वो मुजे नही पता क्या हो जाता है आजकल कंट्रोल ही नही होता है मुझसे ओर ये किये बगैर शांति भी नही मिलती ।

रश्मि – देख विश्वास जो भी हुआ तू अपने रूम में कर रहा था वो तो में बिना खटखटाए आ गयी तो गलती मेरी है ओर रही बात कंट्रोल की इस उम्र में ये आम बात है नही होता पाता कंट्रोल इसमे कोई गलत बात नही है हस्तमैथुन सब करते है लड़के हो या लडकिया जब तक उन्हें उनका पार्टनर ना मिल जाए ।

दीदी के मुंह से ऐसी बाते सुनके मुजे शोक लगा मुजे नही पता था दीदी इतनी फ्रैंक है मगर अच्छा भी लग रहा था कोई तो है बात करने के लिए ।

विश्वास – तो क्या दी आप भी करती हो ।

रश्मि – हाँ भई में भी तो नार्मल हु तो में भी करती हूं ।

विश्वास – तो दीदी आपको नही मिला अभी तक पार्टनर अभी तक ।

रश्मि – नही यार शादी तो माँ की मर्जी से ही करनी है तो बाहर वालो से डर लगता है कही प्यार हो गया तो कही माँ ही न दिल तोड़ दे शादी से मना करके या फिर कोई फायदा ना उठा ले मुजे नाजुक काली का । ओर यार तू मुजे दीदी मत बोल तुझमे ओर मुजमे एज का ज्यादा फर्क नही है तो तू मुजे नाम से बुला समझा ।

विश्वास – ओक रश्मि ।

रश्मि – तू बता तेरी गर्लफ्रैंड है ।

विश्वास – नही रश्मि यहां तो अपना हाथ जगन्नाथ ।

रश्मि – केसी लड़की चाहिए तुझे ।

विश्वास – तुम्हारे जैसी सेक्सी बोल्ड फ्रैंक केअर करने वाली मगर मेरी ऐसी किस्मत कहा चिराग लेके ढूंढने से भी नही मिलती ।

रश्मि – फिर तो तेरी प्रॉब्लम भी मेरे जैसी ही है काश हम दोनों भाई बहन ना होते तो में तुजे ही बॉयफ्रेंड बना लेती ।

विश्वास – यही बात तो में तब से सोच रहा हु जब से तुम्हे इन कपड़ो में देखा है और आंख मर्दि ।

रश्मि – वेसे एक काम हो सकता है अगर तुम्हें मंजूर हो तो तू ओर में , में ओर तू गर्लफ्रैंड बॉयफ्रेंड बन जाए किसी को कुछ पता भी नही चलेगा न ही हम पे शक होगा बोल मंजूर है ।

विश्वास – सोचले गर्लफ्रैंड होने के सारे फ़र्ज़ निभाने पड़ेंगे ओर मुजे सारे हक़ भी चाहिए बॉयफ्रेंड होने के ।

रश्मि – सोच लिया पर मेरा हक़ ओर तुम्हारे फ़र्ज़ का क्या तुम निभाएगे ।

विश्वास – आज़मा के देखलो ।

रश्मि – तुम भी आज़मा लो ।

विश्वास – किस्स में यहां खुले में सबके सामने अभी ।

रश्मि कुछ सोचती हुई ।

विश्वास – क्यों डर गई ।

रश्मि – डरी होती तो जो कल रात देखा उसके बाद तुम्हे बॉयफ्रेंड नही बनाती ।

इतना बोलते ही रश्मि ने अपने होठ मेरे होंठो से जोड़ दिए और चालू हो गया स्मूच ओर हमारा स्मूच कब वाइल्ड हो गया पता ही नही चला और दस मिनट तक मे रश्मि को युही चूसता रहा और मेरा हाथ ना जाने कब रश्मि की गान्ड पे चला गया और हमारा चुम्बन रश्मि के फ़ोन की विबेरेशन से टूटा जब चेक किया तो पता लगा वो कॉल दीदी का था हमे पार्क में 2 घंटे हो गए थे । रश्मि ने कॉल बैक किया तो पता लगा उन्हें दुकान से पिक करने को बोल रही थी ।

रश्मि – तुम ऐसा करो फ़िल्म की जितने हम लोग है उतनी टिकट बुक करा लो और ध्यान रहे हम दोनों की टिकट अलग हो और शाम वाले शो में बुक करना ।

विश्वास – हमारी अलग क्यों सब क्या कहेंगे ।

रश्मि – क्यों अब तुम डर गए बॉयफ्रेंड हो तो मेरा फ़र्ज़ है तुम्हे एन्जॉय करना वो ही कर रही हु ओर तुम किसी से कुछ मत कहना सब मे देख लुंगी । अब चलो ।

फिर मेने सबको पिक किया और चलदिये उस माल की तरफ जहाँ फ़िल्म बुक कराई थी वही कुछ खा पी भी लेंगे फेर हम उस माल में पोहुचे हमने खाना खाया ओर फिर दीदी जो शॉपिंग करके लाई थी वो रश्मि दीदी को दिखाने लगी कुछ देर बाद हमारी फ़िल्म देखने का टाइम आ गया मेने सबको सबकी टिकट दी ।

देविका – ये तुम दोनों की अलग सीट क्यों है ।

रश्मि – दी विश्वास का बोहुत मैन था फ़िल्म देखने का सभी जगह हाउस फुल था बस लडके यही सीट मिली तो ऐसे ही बैठना पड़ेगा भाई इतने टाइम बाद बाहर आया है इतना तो कर ही सकते है उसके लिए ।

मेरा नाम आते ही सब राज़ी हो गयी किसी को कोई शिकायत नही थी फिर हम थिएटर में पोहुचे फर्स्ट हाफ तक तो हम फ़िल्म देखते रहे ताकि ओरो का पूरा इंटरेस्ट बन जाए फेर सब उठके इंटरवल बाहर चले गए रश्मि टॉयलेट चली गयी वापिस फ़िल्म शुरू होने में 5 मिनेट थे तो सब अपनी अपनी जगह बैठ गए अब सबका ध्यान सिर्फ फ़िल्म में ही था तो यहां रश्मि ने मेरा हाथ पकड़ लिया पहले तो हाथ सहलाती रही फिर मेरा हाथ एक गर्म भट्टी जैसी जगह पे रख दिया कुछ ही देर में मैने भाप लिए की ये रश्मि की कुवारी चुत है ओर उसने वहां पैंटी नही पहन रखी थी में बोहुत ही प्यार से उसकी चुत सहला रहा था और अब मेरा दूसरा हाथ मेरे लंड पे था जो मेने पेंट से बाहर निकाल लिया था एक हाथ से मुठ मार रहा था एक हाथ से चुत सहला रहा था के तभी रश्मि में अपनी जेब से अपनी पैंटी निकली और मेरे लंड पे लगा के रगड़ने लगी सहलाने लगी जब तक मेरा पानी नही निकल गया तब तक फिर वो अपनी पेंटी जिसमे मेरा वीर्य था उसे लेके बाहर चली गयी और कुछ देर बाद वापिस आके बेथ गयी मेने अपना हाथ वापिस उसकी चुत पे रखा तो वहां पेंटी थी जो आगे से गीली थी फिर कुछ देर बाद फ़िल्म खत्म हो गयी और हम सब कार में बैठ के घर की ओर निकल गए कार में बैठने के बाद मेने उसे मेंसेज किया कि दम है तो यहां किस्स करो और मैने कार में नजर दौड़ाई तो सब सो रहे थे सिर्फ में जास्मिन ओर रश्मि जग रहे थे तो रश्मि ने मुजे छोटा सा किस्स किया और हम घर पोहच गए सभी लड़कियां थक गई थी तो अपने अपने रूम में जेक सो गई लेकिन में सबके साथ खाने की टेबल पे बैठ गया और कल क्या होने वाला के उसकी बात करने लगा तो पता लगा काल जो है बेचलर पार्टी है भाई की ।