घरेलू चुदाई समारोह 13

कोमल ने पानी चलाकर Antarvasna टब के अंदर अपना पैर रख kamukta जब उसने अपने पीछे सजल को आते न देखा तो आवाज़ दी कि वो अब देर न करे।
नंगा लड़का बाथरूम में घुसा। कोमल उसे देखकर समझ गई कि वह क्यों शर्मा रहा था। उसका लण्ड ताड़ की तरह अपनी पूरी दस इंची लम्बाई तक तनकर खड़ा था। सजल ने अपनी इस हालत के लिये क्षमा मांगने को मुँह खोलना चाहा।
“तो क्या तुम इसलिये इतने शर्मा रहे थे…” कोमल ने हँसते हुए कहा- “इसमें कुछ गलत नहीं है बच्चे… इससे सिर्फ़ यह सिद्ध होता है कि तुम एक स्वस्थ लड़के हो। मुझे इसलिये भी खुशी है कि शायद यह मेरे कारण है… “आओ अंदर, पानी तुम्हारी पसंद का है, हल्का गुनगुना…” कोमल ने अपना हाथ बढ़ाकर सजल को टब में खींच लिया। उसने सजल को साबुन देकर कहा कि वो उसकी पीठ पर मले। “जोर से घिसना…”
सजल का लण्ड नीचे उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था। ऊपर से उसकी मम्मी की नंगी पीठ का स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। उसका लम्बा लण्ड उचक-उचक कर उसकी मम्मी की गाण्ड को छूने की कोशिश कर रहा था।
“ऊँहुं… मुझे कुछ लगा…” कोमल खिलखिलाई जब सजल के लण्ड ने अपने परिश्रम में सफ़लता पाई और अपने लक्ष्य को छू लिया। वो थोड़ा पीछे सरकी जिससे कि उसे दोबारा यह सुख मिले।
“माफ़ करना मम्मी…” लड़का सकपकाकर बोला और थोड़ा पीछे हटा।
“क्यों, तुम्हारे शरीर का कोई हिस्सा मेरे शरीर को छुए तो इसमें क्या गलत है… मुझे साबुन दो, मैं तुम्हारी पीठ पे लगा दूँ…” पहले कोमल ने सजल की पीठ पर साबुन लगाया और फ़िर छाती पर और कहा- “अब मेरी छाती पर साबुन लगाने की तुम्हारी बारी है…”
“शर्माओ मत… मुझे छुओ…” कहते हुए उसने सजल के हाथ अपने मम्मों पर लगा दिये। इसके बाद कोमल ने अब तक की सबसे साहसी हरकत की- “तुम्हें अपने शरीर के हर हिस्से को अच्छे से साफ़ करना होगा, इसे भी…” कहते हुए उसने सजल का भरपूर लौड़ा अपने हाथ में भर लिया।
“ओह मम्मी…”
“मैं जानती थी कि तेरा लौड़ा ऐसा ही शानदार होगा…” कोमल उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसने अपने चेहरे को झुकाया।
“नहीं, मम्मी हम ऐसा… पापा…” लड़का हकलाने लगा पर उसने अपनी मम्मी को रोका नहीं।
“हमें करना ही होगा… मुझे तुम्हारी इतनी ज़रूरत है कि मैं रुक नहीं सकती… अब बहुत देर हो चुकी है… अपनी मम्मी को स्वयं को खुश कर लेने दो मेरे बेटे…” कहते हुए उसने वो मूसल अपने मुँह में भर लिया।
“आआआह… मम्मी, तुम्हारा मुंह…”
“ऊँह ऊँह…” कोमल तो अब उस महान हथियार का स्वाद लेने में जुटी थी। वह हुमक-हुमक कर लौड़े को चूस रही थी। इस समय उसकी तुलना गर्मी में आई हुई बिल्ली से की जा सकती थी।

सजल भी अब चुप नहीं रहा। जब उसने यह जान लिया कि उसकी मम्मी अब रुकने वाली नहीं है, तो उसने भी अपनी मम्मी को पूरा आनंद देने का निर्णय लिया। उसने अपने हाथ बढ़ाकर उसकी चूचियों पर रखे और धीरे-धीरे मसलने लगा।
“उन्हें खींचो और उमेठो…” कोमल ने सीत्कार भरी। वह समझ नहीं पा रही थी कि इस जवान लण्ड का स्वाद लिये बगैर वो अभी तक जीवित कैसे थी… उसके मुँह से तो वो छूट ही नहीं पा रहा था। हालांकि उसकी चूत उबल रही थी, पर उस प्यासी मम्मी ने पहले अपने पुत्र को पहला सम्पूर्णानंद देने का वचन लिया। वह दिखाना चाहती थी वह उसके लिये क्या कुछ कर सकती थी।