एक अजनबी हसीना की चूत की चाशनी

हाय फ्रेंड्स, Antarvasna नमस्ते कैसे हो आप सब? उम्मीद है कि, अच्छे ही होंगे. मेरा नाम प्रताप है. मैं राँची का रहने वाला हूँ. इंजिनियरिंग की पढ़ाई करता हूँ और साथ ही साथ छोटा मोटा काम भी कर लेता हूँ. आज मैं आपको अपनी सबसे अलग एक कहानी बताने जा रहा. उससे पहले मैं आपको बता दूँ कि, मैं देखने में गोरा हूँ, हालांकि मैं ज्यादा फिट तो नहीं हूँ पर मेरी बॉडी ठीक-ठाक है, मेरी लम्बाई 5.8 फुट की है। दोस्तों अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

बात यह है की दो साल पहले मैं किसी काम से देहरादून गया हुआ था, और वहाँ पर मुझको रात हो गई थी. और फिर मैंने सोचा कि, मेरा घर भी पहुँचना जरूरी है. इसलिये मैं जल्दी से जो मेरा काम था उसको खत्म करके रेलवे स्टेशन पर पहुँच गया था. और फिर मैंने वहाँ पर पूछताछ के काउंटर पर पूछा कि सर, राँची के लिए ट्रेन कितने बजे है? तो सर ने बताया 11 बजे एक एक्सप्रेस गाड़ी है, आपको उसके लिये 3 घन्टे तक इन्तजार करना पड़ेगा. और फिर मैंने उनको थेंक्स कहा और वहाँ से बाहर आकर रेलवे स्टेशन के बाहर बैठ गया था. और फिर मैंने सोचा कि, क्यों ना रोडवेज बस स्टेण्ड पर पता किया जाए. और फिर मैं वहाँ से एक रिक्शा से बस स्टेण्ड पहुँचा. वहाँ पहुँचकर मैंने रिक्शा वाले भाई को 20 रूपये दिए फिर मैं बस स्टेण्ड पर चल दिया. और वहाँ पर अन्दर पहुँचते ही वहाँ खड़ी पहली ही बस राँची को जाने वाली थी. और फिर मैंने कंडक्टर से पूछा भाई साहब यह बस क्या राँची जाएगी? तो उन्होनें कहा कि, हाँ जल्दी से बैठ जाओ बस 30 मिनट के बाद चलते है, अभी ड्राइवर खाना खा रहा है।

और फिर मैंने उसको कहा कि, ठीक है उनको खाना खाने दो, और मैं बस में पीछे की सीट पर जाकर बैठ गया था, और फिर धीरे-धीरे बस भरने लगी. और फिर कुछ ही देर में एक भाभी आई और उसकी उम्र शायद 30-35 के बीच की होगी. मेरी सीट पर मेरे अलावा कोई भी नहीं बैठा हुआ था लेकिन वह मेरे आगे की सीट पर बैठ गई थी. और फिर मैंने देखा कि, जिस सीट पर वह बैठी है वहाँ पर एक काला सा आदमी बीड़ी पी रहा जिससे वह बहुत परेशान हो रही थी. और फिर जैसे ही उन्होनें पीछे देखा तो मैंने उनको अपनी सीट की तरफ एशारा किया. और फिर वह खुश हो गई और फिर वह वहाँ से उठकर मेरी बगल की सीट पर आकर बैठ गई थी थोड़ा मुस्कुराकर उसने मुझको थेंक्स बोला तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा था। और फिर बस चल दी थी. आपको तो पता ही होगा कि, रात को बस के अन्दर की लाइट नहीं जलती है क्यूंकी बस के ड्राइवर को दिक्कत होती है आती-जाती गाडियाँ देखने में. इसीलिए ड्राइवर ने उस बस की लाइट भी बन्द कर दी थी. और फिर कंडक्टर आया तो उससे मैंने टिकट ले लिया और उस भाभी ने भी. कंडक्टर के जाने के बाद मैंने उस भाभी से पूछा था कि, क्या आप भी राँची ही जा रही हो? तो उसने भी हाँ में अपना सिर हिलाया और फिर उसकी हाँ को सुनकर मैं दिल ही दिल में यह सोचकर बहुत खुश हो रहा था कि, चलो इनके साथ पूरी रात बातें करते हुए जाएँगे, और फिर ऐसे ही 15-20 मिनट तक हम दोनों बैठे रहे. और फिर उनको नींद आने लगी तो उन्होनें अपना सिर आगे की सीट के पीछे रख लिया था. सड़क पर थोड़े बहुत गड्ढे थे तो बार-बार उनका सिर आगे वाली सीट की रोड पर लग रहा था. तो फिर मैंने उनको कहा कि, भाभी अगर आपको कोई परेशानी हो रही हो तो आप मेरे कन्धे पर अपना सिर रखकर सो सकती हो. उनको मेरा सुझाव अच्छा लगा। तो फिर उन्होनें मेरे कन्धे पर अपना सिर रख लिया था और फिर वह सो गई थी. और मैंने भी उनके पेट के ऊपर से हाथ करके पकड़ के रखा था कि, कभी वह गिर ना जाए।

वह गहरी नींद में थी और फिर मुझको पता ही नहीं चला कि, कब उनका हाथ मेरे लंड के ऊपर आ गया था. उनका हाथ लगते ही मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा हो गया था, और मैं उनका हाथ बार-बार मेरे लंड से हटाता तो वह भाभी फिर से अपना हाथ वहीं रख देती थी. और उनके बार-बार ऐसा करने से मुझे अब पता चल चुका था कि, वह भाभी जागी हुई है. तो फिर मैंने भी थोड़ी हिम्मत करके भाभी के पेट पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया था. हाय कसम से बहुत ही मुलायम पेट था उनका. और फिर धीरे-धीरे मैं मेरा हाथ उनके बब्स पर ले आया था. उनके बब्स एकदम गोल-मटोल रस से भरे हुए थे. दोस्तों उस समय मुझको डर भी बहुत लग रहा था, और मेरे ऐसा करने से उन भाभी को मज़ा भी बहुत आ रहा था. और फिर भाभी धीरे से सीधी हुई और फिर उन्होनें इधर-उधर देखा पहले तो और फिर उन्होनें मेरे कान में बोला कि, अब तुम भी अपनी जीन्स की पेन्ट की चेन को खोलो. और फिर मैंने भी धीर से अपनी पेन्ट की चेन खोल दी थी. फिर भाभी ने 6.5” के मेरे लंड को मेरी पेन्ट और अंडरवियर से बाहर निकाला और फिर उन्होनें धीरे से मुझको बोला कि, बहुत मस्त लंड है तुम्हारा तो, और फिर वह मेरे लंड की मूठ मारने लग गई थी. और मैं भी बहुत मज़े से बैठकर भाभी की सलवार के अंदर अपना हाथ डालकर उनकी रसीली चूत को सहला रहा था. और फिर भाभी ने अपना सूट ऊपर किया तो फिर मैं जान गया था कि, भाभी अब मुझसे क्या चाहती है. और फिर मैंने भाभी के बब्स को थोड़ा नीचे झुककर अपने मुहँ में ले लिया था फिर मैं उनको धीरे-धीरे चूसने लग गया था. और फिर मेरे ऐसा करने से भाभी शरमा गई थी और वह मुझको मना करने लग गई थी। तो फिर मैंने भी उन भाभी को बोला कि, भाभी अब तो सब-कुछ मैंने देख ही लिया है।

और फिर तो उन भाभी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपने बब्स पर मेरे मुहँ को दबा दिया था. और अब तो मैं भी जोर-ज़ोर से उनके रसीले आमों का रस चूस रहा था. और फिर उनके बब्स को चूसते-चूसते ही मैंने अपना हाथ भाभी की जाँघों की तरफ बढ़ा दिया. लेकिन भाभी ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया था और फिर उन्होनें मुझको कहा कि, रूको. और फिर उन्होनें अपना सिर नीचे झुकाकर मेरे लंड पर रखा और फिर वह मेरे लंड को बड़े ही प्यार से अपने मुहँ में लेकर चूसने लग गई थी. दोस्तों उस पल तो मैं तो किसी जन्नत में था, और इधर मैं एक हाथ से उनके पेट को सहला रहा था और दूसरे हाथ से उनके एक बब्स को दबा रहा था. दोस्तों बस में सब तो आगे बैठे हुए थे और बस में अँधेरा भी हो रहा था लेकिन फिर भी मैं यह देख रहा था कि, कोई हमको देख ना रहा हो. भाभी मेरे लंड को बहुत ही प्यार से चूस रही थी और चाट भी रही थी. और फिर लगभग 10 मिनट तक भाभी ने मेरा लंड चूसा था. और फिर पता नहीं कब हम दोनों ही पीछे वाली सीट पर एक-दूसरे के ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गए थे और वह मेरे लंड को चूस रही थी और मैं भी उसकी रसीली चूत को बड़े ही प्यार से चाट और चूस रहा था और फिर 15 मिनट के बाद हम दोनों ही एकसाथ एक-दूसरे के मुहँ में झड़ गए थे. और फिर इतने में राँची आने वाला था, तो फिर हमने अपने-अपने कपड़े ठीक किए. और फिर उन भाभी ने अपने पर्स में से 500 रूपये का एक नोट निकाला और मुझे देते हुए कहा कि, मुझे आपका नाम पता नहीं है. तो फिर मैंने उनको एकदम से कहा कि, भाभी मेरा नाम प्रताप है. और फिर भाभी ने मुझको कहा कि, यह तुम्हारी मेहनत का इनाम है।

और फिर मैंने उनको कहा कि, किस बात की मेहनत भाभी? तो फिर उन्होनें मुझको कहा कि, तुम बब्स बहुत ही अच्छी तरह से चूसते हो ना, और फिर वह मेरी तरफ मुस्कुराई. और फिर मैंने भाभी को वह 500 रूपये दिए और कहा कि, भाभी यह आपकी कमाई के पैसे है, इनको मैं नहीं ले सकता. मुझे माफ़ करना. आपने बहुत मेहनत करके यह पैसे कमाए होंगे और मेरा इनपर कोई हक़ नहीं है कि, जो मैं आपसे यह 500 रूपये लूँ. और फिर मेरी बात को सुनकर भाभी की आँखों में आँसूं आ गए थे, और फिर मैंने उनके आँसूं पौंछे. और फिर कुछ ही देर में बस स्टेण्ड आ गया था. और फिर उन भाभी ने मुझको कसकर अपने गले से लगाया. और फिर हम दोनों बस से बाहर आए और फिर हमने बाहर आकर कॉफी पी और एक-दूसरे के मोबाईल नम्बर आपस में बदले. दोस्तों मेरी जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ था और फिर मैंने सोचा कि, अच्छे इंसानों की कमी नहीं है दुनिया में। दोस्तों भले ही मैंने भाभी के साथ मस्ती करी पर भाभी ने कॉफी पीते हुए मुझको एक बात कही जिसको मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ. भाभी ने मुझको कहा कि, ”कुछ इंसान दो पल की मुलाकात में ही ऐसी छाप छोड़ जाते है कि, भुलाए नहीं भूल सकते है, अजनबी तो गहरे दोस्त हो जाते है और बहुत ही ख़ास भी एक पल में ही पराए हो जाते है”

तुमने मुझको आज दिल से बहुत खुश किया है प्रताप, और तुम यह बात हमेशा ही याद रखना कि, “खुश रहना और खुशियाँ बाँटना ही असली जिंदगी है. अगर इस चीज में आपने महारत हासिल कर ली तो तुमको दुनिया जीतने से कोई नहीं रोक सकता है बस दिल में भलाई सबके लिए रखना”. दोस्तों यह लाइन बहुत ही छोटी सी है यह पर अगर इसको समझो तो यह एक बहुत बड़ा सबक दे जाती है. दोस्तों उस अनजान भाभी ने एक ही मुलाकात में इतनी अच्छी बात कही कि, मैं इसके लिये उनका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!