मेरी नोकरी जाते जाते बची

हेलो दोस्तों मेरा नाम पूजा है और मैं 30 साल की हूं मैं शादीशुदा हूं मैं दिखने में बहुत सुंदर हूं और मेरा फिगर भी कमाल का है ३६-३०-३६. मैं आपके लिए अपनी जिंदगी की सच्ची कहानी लेकर आई हूं.

मैं एक नर्स हूं और लुधियाना के सरकारी हॉस्पिटल में लगी हुई हूं. मेरी नाइट शिफ्ट है. एक दिन में रात को अपनी नाइट शिफ्ट लगा रही थी तो मैंने वार्ड के बाहर एक जवान लड़के को देखा जिसके पास बहुत सामान था, मैं उसके पास गई.

मैंने कहा : आप कौन हो और यहां क्या कर रहे हो? और इतना सामान??

मैं राज हूं और यहां मेरी ट्रांसफर हुई है और मैं एक कंपाउंडर हूं..

मेरा नाम पूजा है आप अंदर आइए और ऑफिस में जा कर अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर लें और पता कर ले कहां पर है.

राज कुछ देर बाद वापस आ गया. मैं पेशेंट को देख रही थी, तभी राज बोला मेरी ड्यूटी यही इसी सेक्शन में लगी हुई है.

मेने कहा – हां ठीक है.

चलो आओ जॉइन करो राज ईस शहर में नया था, और मेरा जूनियर था, उस का यहां रहने का कोई इंतजाम भी नहीं हुआ था, तो मैंने उसे डॉक्टर के क्वार्टर में रहने को कहा क्योंकि मैं भी कुछ दूर किराए के घर पर रहती थी और नेक्स्ट मंथ से मैंने अपने क्वाटर में शिफ्ट होना था. अब मैं उसे सामने ही एक होटल में ले गई और मेरे पास टिफिन भी था..

हम वहां बैठ कर खाना खाने लगे, बातों बातों में पता चला कि वह पास के ही किसी गाव का था और राज बहुत हंसमुख था और छोटी छोटी बातों का बुरा भी नहीं मानता था. राज दिखने में ठीक ठाक था पर उस का शरीर एकदम मर्दों वाला था. और मैं उसे पहली नजर में ही पसंद करने लगी थी. राज भी मेरी फिगर को निहारता रहता था और बातें करता रहता था..

राज और मेरी ड्यूटी एक साथ ही थी, तो मैंने उसे एक दिन आराम करने को कहा और अगले दिन से वह मेरे साथ ड्यूटी देने लगा. धीरे धीरे हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए. राज मुझे हमेशा देखता ही रहता था और अगर कभी पूछो कि क्या हुआ? तो कहता पूजा जी आप हमेशा मुस्कुराते रहा करो बस यही कहता था.

दोस्ती गहरी होती चली गई और मेरा देखने का नजरिया भी बदलता गया. मुझे उस में मर्द नजर आने लगा और मेरी नजरे कभी उसके लंड पर तो कभी उस के चुतड पर चली जाती थी. मेरा मन भी नया लंड लेने को कर रहा था. ऐसा नहीं कि मैं अपने पति से खुश नहीं हूं, वह मुझे बहुत प्यार करते हैं और मैं उन से बहुत खुश भी हूं. और मेरा एक बेटा भी है.

राज की शादी नहीं हुई थी और शायद उस के मन में भी चूत चोदने की इच्छा थी, इसलिए मैं अपना नंबर लगाने के लिए कभी कभी उस के चूतड़ों पर हाथ मार देती जिस से वह एकदम से चहक जाता.

आज मैं उसे अपनी गुफा की सैर कराने की ईरादे से आई थी इसलिए मैंने पेंटि भी नहीं पहनी थी और ब्लाउज के अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी. हम दोनों एक ब्लॉक में थे और तब पेशंट भी बहुत कम थे जिसे कि मुझे इतना डर नहीं था. डॉक्टर भी ९ बजे राउंड ले कर चले जाते थे, और हम ने भी १० बजे तक पेशंट को चेक कर लिया था और आ कर अपनी जगह पर बैठ गए थे.

अब सरे पेशंट थोड़ी देर में सोने की तयारी में थे, उन के रूम की लाईट भी ऑफ़ हो चुकी थी. राज मेरे आगे पीछे चक्कर काट रहा था, शायद उसे भी मुझे चोदने की इच्छा थी. मैं जान बूझ कर कंबल और चादर वाले रुम में चादर लेने के लिए चली गई और वह भी मेरे पीछे पीछे आ गया.

राज ने कहा : क्या मैं आप की मदद कर दू?

मेने कहा : हां जरूर, मैं चादर उतार रही हूं जरा देखना की स्टूल डगमगाए ना.

अब मैं उसे पटाने में कामयाब होने लगी और अपनी साड़ी का पल्लू उस के मुंह पर गिराने लगी और मन ही मन सोचा कि उस को अपना बनाने के लिए जान बूझ कर स्कूल से गिर जाती हु जिस से वह मुझे बचाएगा और मैं उस की गोद में गिर जाऊंगी. पर पहल तो राज ने ही कर दी क्योंकि शरारत तो उस के मन में भी थी.. उस ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर रख लिया और दूसरा हाथ मेरे चुतड पर.. मुझे ऐसा लग रहा था कि बिना पेंटी के मेरे चुतड उस के हाथों में समा गए हैं और मेने खुद को कंट्रोल कर लिया.

मैंने कहा : राज तुम स्टूल पकड़ो यह क्या पकड रखा हे?

उस ने मुझे अपनी और खींचा तो में एक कटी पतंग की तरह उस की गोदी में आ गिरी.

राज ने कहां : कैसा लगा झटका?

मैंने कहा : क्या कर रहा है? कोई देख लेगा. मुझे नीचे उतार.

राज ने कहा : हाय पूजा क्या कातिलाना निगाहें है आप की. मैं तो आप की इन्ही अदाओं पर लट्टू हो गया और फिर उस ने मुज को नीचे उतार दिया.

मैंने कहा : हटो राज, और वहां से बाहर आने लगी. तभी राज ने मेरा हाथ पकडा और मुझे अपनी ओर खिचते हुए कंबल पर ही गिरा दिया और खुद भी वहीं गिर गया.

वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होठों को अपने होठों में डाल कर चूसने लगा और उस के दूसरे हाथ मेरे बूब्स पर आ गए और जोर जोर से दबाने लगा, में एकदम से चहक उठी.

अब राज ने अपने लंड को मेरी चूत पर रख कर रगड़ मारनी शुरू कर दी और मेरी चूत को उस के लंड का अहसास अच्छी तरह हो रहा था. वह लंड को अंदर तक डालने की कोशिश में लगा हुआ था, मैं मदहोशी की हालत में थी और अपनी गर्म सांसे भरने लगी.

मैंने कहा : राज, छोड़ दो अब, प्लीज रहने दो.

राज ने कहा : प्लीज मुझे मत रोको. देखो नीचे कितना सॉफ्ट सॉफ्ट लग रहा है.

राज ने मेरी बिना बात सुने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ रहा था और मेरी चूत भी उस की रगड़ खाती रही और मदहोश होती रही. मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी मैं उसे पागलों की तरह किस करने लगी..

तभी बाहर से कुछ आहट हुई, राज एकदम से खड़ा हो गया और मुझ पर चादर कर के मुझे छुपा दिया. मैं लंबी लंबी सांस ले कर हांफती रही और खुद को कंट्रोल करती रही. फिर उठ कर खुद के सही कर के देखा तो राज किसी दूसरी नर्स से बात कर रहा था. और कुछ देर बाद वह नर्स चली गई और मैं फिर से चुदने के लिए तड़पने लगी.

मेरी किस्मत अच्छी थी जल्दी ही मुझे मौका मिल गया. रात के १ बजे चुके थे. सब पेशंट गहरी नींद में सो रहे थे, राज मुझे रेस्ट रूम में ले गया जिस रूम में डॉक्टर रेस्ट और नाश्ता करते थे. जैसे मैं कमरे में आई राज ने अपने हाथ मेरे बूब्स पर रख दिए और दबाने लगा. मेरी आंखें राज को प्यार से निहार रही थी. अब मैं मैं भी मजे में अपने दूध राज से दबवा रही थी. फिर उस ने अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया और दबाने लगा. और मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया.

राज बस कर आह्ह आयी औउ इई आयन म्म्म्ह औऊ औऊ हाय राज तुम मेरी चूत में अपना लंड क्यों नहीं डाल रहे हो.. मेरे मुंह से पूरी मस्ती में यह लफ्ज़ निकले, मैंने अपनी सारी शर्म छोड़ दि और अपने हाथों में उसका लंड पकड़ लिया..

राज में तुम्हारा लंड पकड़ लू? मेने मस्ती में कहा.

पकड़ ले पुजा अगर लंड तूने पकड़ लिया तो चुदना पद सकता हे तुमको, राज ने भी मस्ती में जवाब दिया.

अब मैं उस के मोटे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी और बोली सच में राजा चोदोगे मुझे.. बस अब चोद दो.. प्लीज मुझे अब नहीं रहा जा रहा तुम्हारा लंड तो बहुत मस्त है.

यह सुनते ही राज ने अपने पैर दरवाजे पर मारा और दरवाजा बंद कर दिया और अपनी पेंट खोल कर अपना लंड मेरे सामने कर दिया. मैंने भी देर ना करते हुए सारे कपड़े उतार दिए और अपनी दोनों बाहें खोल कर राज को अपनी बाहों में बुलाने लगी. मेरा नंगा जिस्म देख कर राज भी पागल सा होता दिख रहा था और अपने होश खो रहा था.

राज मेरे पास आया मेरे हाथों में अपना बड़ा सा लंड रख दिया. उसका लंड अपने हाथों में लेते ही मुझे लगा कि यह मेरी चूत फाड़ देगा. मैं अपने हाथों से उसकी झांटे बार बार खींच रही थी जिस में मुझे बहुत मजा आ रहा था.

मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. राज ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी दोनों टांगें अपने आप ऊपर हो गई और राज के सामने अपनी चूत खोल दी. राज भी मेरी चूत के सामने आकर अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया. राज ने धक्का लगाया और मेरी गीली चूत ने उस के मोटे लंड का स्वागत किया और लंड को अंदर लेने लगी.

हम दोनों के चेहरे पर खुशी ही झलक रही थी और देखा जाए तो मेरी चूत और उसका लंड भी अब खुश था. राज का लंड मेरी चूत की गहराइयों में उतरता जा रहा था, क्या कमाल का मजा आ रहा था मुझे.. मेरे मुंह से मस्ती भरी सिसकियां निकल रही थी. जब उसका लंड चूत से बाहर निकलता मेरी चूत खाली हो जाती, पर अगले ही पल उस का फिर से अंदर चला जाता और मुझे मस्ती के सागर में डूबा देता.

अब राज ने अपनी स्पीड तेज कर दी जिस से मुझे चुदने का आनंद और ज्यादा आना शुरू हो गया. अब मैं अपने आप को रोक नहीं सकती थी. मैं भी अपनी चुतड को उसके झटकों के साथ ऊपर नीचे करने लगी. मेरे ऊपर चुदाई का नशा छा रहा था और मैं दूसरी दुनिया में पहुंच चुकी थी..

यह मजा मुझे आज तक नहीं आया था, मेरे पति में यह दम नहीं था जो राज के लंड में मुझे दीख रहा था. अब मेरी चूत दम तोड़ने वाली थी, आखिर कब तक सहन कर सकती थी गांव चूत देसी लंड को? अब मेरा जिस्म पूरा अकड गया और मेरी सांस रुक गई और मेरी चूत अपना सारा पानी निकालने के लिए बेताब हो रही थी..

आह हू हहह औउ ई औउ राज मेरा पानी निकल गया और मेरा शरीर ढीला हो गया. मेरा साथ छोड़ने लग गया था, राज का लंड मेरी चूत के पानी से नहा चुका था. वह यह समझ चुका था इसलिए आपने बहुत आराम से मेरी चूत मारने लगा और मेरी चूत का पानी निकालने में मेरी मदद करने लगा.

राज ने कहा : मेरी जान पूजा ऐसे ही करो प्लीज़.

मैंने अपनी टांगें ऊपर उठा दी, मेरा काम हो गया था पर राज का देसी लंड इतनी जल्दी हार नहीं मानने वाला था. अचानक मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुआ अब मैं दर्द से छटपटाने लगी, राज का बड़ा और ताकतवर लंड मेरी चूतडो को चीरता हुआ मेरी गांड में घुसता चला गया..

मेने कहा नहीं राज नहीं, प्लीज. ऐसा ना करो, निकालो. मैं मर जाऊंगी. मैंने दर्द से तड़पते हुए कहा.

पर राज कहा मेरी सुनने वाला था? उसने जोर कर के अपना पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया और बोला बस पूजा मेरी जान हो गया. अब दर्द नहीं होगा, प्लीज मेरा साथ दो तुम.

राज मेरी गांड फट जाएगी, प्लीज मान जाओ. इसे निकल हो अभी, मैंने दर्द में ही उसे जवाब दिया.

पर राज ने मेरी एक ना सुनी उसने मेरी गांड पर पूरा कब्जा कर लिया और जोर दार तरीके से मेरी गांड को चोदने लगा, मुझे बहुत दर्द हो रहा था. पर कुछ देर बाद वह भी ठीक होने लग गया. पर अभी भी राज का लंड बहुत गर्म था, मुझे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने मेरी गांड में गरम लोहे की रॉड डाल दी हो. और वह रोड मेरी गांड में पूरी तेजी से अंदर बाहर हो रही हो..

राज अपने हाथों से मेरे दोनों दूध लगातार दबा रहा था जिस से मुझे थोड़ी राहत मिल रही थी. और साथ मैं फिर से गर्म होती जा रही थी. राज ने अपनी स्पीड तेज कर दी, मेरी गांड की तो बैंड बज चुकी थी और पूरी फट चुकी थी.

अगले ही पल आयी औऊ अह्ह्ह हां औउ इई ओऊ अहह हय्य आयी हां मर गया पूजा मेरी जान.. तभी राज ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाल लिया. मुझे अपनी गांड में खालीपन सा महसूस हुआ, मैंने उसका लंड अपने हाथों में पकड़ा और मुठ मारने लगी. राज के लंड में लहर उठी तो मैंने तुरंत अपने मुंह में ले लिया और उसके बाद एक तेज पिचकारी निकली और उस के बाद एक के बाद एक छोटी छोटी पिचकारियां निकल गई. मेरा मुंह उस के पानी से भर चुका था, अपने गले में उतार लिया. राज अब तेज तेज सांसे लेने लगा और बेड पर मेरे साथ बैठ गया.

जैसे ही हमारी नजर सामने पड़ी तो हमारी गांड फट गई. सामने मैंट्रेन खड़ी थी. हम दोनों के होश उड़ गए मेरी तो हालत खराब हो गई. राज जल्दी से उठा और नंगा ही उनको पैरों में गिर गया और बोला प्लीज मुझे माफ कर दो, आगे से यह सब कभी नहीं होगा.

मेरी तो आंखों में आंसू आ गए, मुझे आज साफ साफ दिख रहा था की नौकरी कैसे जाती है.

अब तुम दोनों चुप हो जाओ आगे से ध्यान रखना यह काम करने से पहले दरवाजा लॉक होना चाहिए. कभी मत भूलना, समझे.. अब राज तुम मेरे पास आओ और मुझे नंगा करो और तुम पुजा बाहर खड़ी हो जाओ कि कोई अंदर ना आ सके, मैंट्रेन मुस्कुराते हुए बोली.

मैं भी उनके पास गई और उनसे लिपट कर माफी मांगने लगी. मैंट्रेन की उम्र ५० साल थी, उसके बाल वाइट हो चुके थे पर उसका दिल काफी दयालु था.

पागल मैं भी तुम्हारी तरह इंसान हूं मुझे लंड की जरूरत होती है. तुम दोनों टेंशन ना लो जब तक मैं यहां हूं खूब मस्ती करो, और जिंदगी के मजे लो. मेट्रेन अपने कपड़े उतारती हुई बोली.

अब मैंट्रेन मेरे वाली जगह लेट चुकी थी और मैं अपने कपड़े डाल कर रूम के बाहर स्टूल ले कर बैठ गई. राज अंदर मेंट्रेन की चुदाई कर रहा था, अंदर से मस्ती भरी आवाज आ रही थी. शायद मेट्रेन ने भी इतना बडा लंड पहली बार लिया था..

अब मैं नॉर्मल हो चुकी थी और मन ही मन ऊपर वाले का शुक्रगुजार कर रही थी कि आज उसने मेरी नौकरी बचा ली. अब मैंट्रेन अंदर चुद रही थी और मेरी नौकरी बच गई थी, वरना आज की यह चुदाई मेरी नौकरी लेकर जाती.